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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Kitab-kitab Kitab Taurat Keutamaan dan saat mustajabah pada hari Jum’at juga tertera di Taurat

हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Keutamaan dan saat mustajabah pada hari Jum’at juga tertera di Taurat
Imam Nasa'i : 1413

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا بَكْرٌ يَعْنِي ابْنَ مُضَرَ عَنْ ابْنِ الْهَادِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَأَتَيْتُ الطُّورَ فَوَجَدْتُ ثَمَّ كَعْبًا فَمَكَثْتُ أَنَا وَهُوَ يَوْمًا أُحَدِّثُهُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَيُحَدِّثُنِي عَنْ التَّوْرَاةِ فَقُلْتُ لَهُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَيْرُ يَوْمٍ طَلَعَتْ فِيهِ الشَّمْسُ يَوْمُ الْجُمُعَةِ فِيهِ خُلِقَ آدَمُ وَفِيهِ أُهْبِطَ وَفِيهِ تِيبَ عَلَيْهِ وَفِيهِ قُبِضَ وَفِيهِ تَقُومُ السَّاعَةُ مَا عَلَى الْأَرْضِ مِنْ دَابَّةٍ إِلَّا وَهِيَ تُصْبِحُ يَوْمَ الْجُمُعَةِ مُصِيخَةً حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ شَفَقًا مِنْ السَّاعَةِ إِلَّا ابْنَ آدَمَ وَفِيهِ سَاعَةٌ لَا يُصَادِفُهَا مُؤْمِنٌ وَهُوَ فِي الصَّلَاةِ يَسْأَلُ اللَّهَ فِيهَا شَيْئًا إِلَّا أَعْطَاهُ إِيَّاهُ فَقَالَ كَعْبٌ ذَلِكَ يَوْمٌ فِي كُلِّ سَنَةٍ فَقُلْتُ بَلْ هِيَ فِي كُلِّ جُمُعَةٍ فَقَرَأَ كَعْبٌ التَّوْرَاةَ ثُمَّ قَالَ صَدَقَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هُوَ فِي كُلِّ جُمُعَةٍفَخَرَجْتُ فَلَقِيتُ بَصْرَةَ بْنَ أَبِي بَصْرَةَ الْغِفَارِيَّ فَقَالَ مِنْ أَيْنَ جِئْتَ قُلْتُ مِنْ الطُّورِ قَالَ لَوْ لَقِيتُكَ مِنْ قَبْلِ أَنْ تَأْتِيَهُ لَمْ تَأْتِهِ قُلْتُ لَهُ وَلِمَ قَالَ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا تُعْمَلُ الْمَطِيُّ إِلَّا إِلَى ثَلَاثَةِ مَسَاجِدَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ وَمَسْجِدِي وَمَسْجِدِ بَيْتِ الْمَقْدِسِ فَلَقِيتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ سَلَامٍ فَقُلْتُ لَوْ رَأَيْتَنِي خَرَجْتُ إِلَى الطُّورِ فَلَقِيتُ كَعْبًا فَمَكَثْتُ أَنَا وَهُوَ يَوْمًا أُحَدِّثُهُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَيُحَدِّثُنِي عَنْ التَّوْرَاةِ فَقُلْتُ لَهُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَيْرُ يَوْمٍ طَلَعَتْ فِيهِ الشَّمْسُ يَوْمُ الْجُمُعَةِ فِيهِ خُلِقَ آدَمُ وَفِيهِ أُهْبِطَ وَفِيهِ تِيبَ عَلَيْهِ وَفِيهِ قُبِضَ وَفِيهِ تَقُومُ السَّاعَةُ مَا عَلَى الْأَرْضِ مِنْ دَابَّةٍ إِلَّا وَهِيَ تُصْبِحُ يَوْمَ الْجُمُعَةِ مُصِيخَةً حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ شَفَقًا مِنْ السَّاعَةِ إِلَّا ابْنَ آدَمَ وَفِيهِ سَاعَةٌ لَا يُصَادِفُهَا عَبْدٌ مُؤْمِنٌ وَهُوَ فِي الصَّلَاةِ يَسْأَلُ اللَّهَ شَيْئًا إِلَّا أَعْطَاهُ إِيَّاهُ قَالَ كَعْبٌ ذَلِكَ يَوْمٌ فِي كُلِّ سَنَةٍ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَلَامٍ كَذَبَ كَعْبٌ قُلْتُ ثُمَّ قَرَأَ كَعْبٌ فَقَالَ صَدَقَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هُوَ فِي كُلِّ جُمُعَةٍ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ صَدَقَ كَعْبٌ إِنِّي لَأَعْلَمُ تِلْكَ السَّاعَةَ فَقُلْتُ يَا أَخِي حَدِّثْنِي بِهَا قَالَ هِيَ آخِرُ سَاعَةٍ مِنْ يَوْمِ الْجُمُعَةِ قَبْلَ أَنْ تَغِيبَ الشَّمْسُ فَقُلْتُ أَلَيْسَ قَدْ سَمِعْتَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يُصَادِفُهَا مُؤْمِنٌ وَهُوَ فِي الصَّلَاةِ وَلَيْسَتْ تِلْكَ السَّاعَةَ صَلَاةٌ قَالَ أَلَيْسَ قَدْ سَمِعْتَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ صَلَّى وَجَلَسَ يَنْتَظِرُ الصَّلَاةَ لَمْ يَزَلْ فِي صَلَاتِهِ حَتَّى تَأْتِيَهُ الصَّلَاةُ الَّتِي تُلَاقِيهَا قُلْتُ بَلَى قَالَ فَهُوَ كَذَلِكَ

हमनी के [कुतैबाह] के रिपोर्ट देके उ कहले कि; हमनी के [बकर बिन मुधर] [इब्नुल हद] से [मुहम्मद बिन इब्राहिम] से [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े उ कहले; 'हम एक बेर -पहाड़ी- गुरु में आइल रहनी आ ओहिजा का'ब मिलल।' फेर हम आ उ एक दिन ओहिजा रुकल रहनी जा। हम रसुलुल्लाह शलाल्लाहु अलैहि व सल्लम से हदीस उनुका से सुनवले रहनी, जबकि उ हमरा से तौराह सुनवले रहले। हम उनका से कहनी कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर कहले रहले कि जब तक सूरज उगता तब तक सबसे बढ़िया दिन जुमार होला। ओह दिन आदम भविष्यवक्ता के रचना भइल, ओह दिन उनुका के नीचे भेजल गइल, ओह दिन उनकर पश्चाताप स्वीकार कइल गइल, ओह दिन ऊ मर गइलन आ ओह दिन प्रलय होखी. धरती के सतह प मौजूद सभ जानवर शुक्रवार के सबेरे सूरज के उगला तक सुनवाई के अनुकूल बनावे के स्थिति में रहेले, काहेंकी उनुका इंसान के छोड़ के प्रलय के आवे से डर लागेला। जुमार के एगो समय होला जब ओह घरी कवनो मुसलमान अल्लाह से कवनो चीज के दुआ ना करे, सिवाय एह बात के कि अल्लाह ओकरा के दे दीहें. तब काब कहले कि, "उ समय हर साल एक दिन मात्र होखेला।" तब हम कहनी: "साँचहूँ हर बियफे के होला." तब काब तोराह पढ़लस। तब उ कहले कि, "रसूलुल्लाह (स.अ.व.) सही कहतारे, उ दिन हर जुमवार के होखेला।" तब हम बाहर निकलनी आ [बसराह बिन अबू बसरा अल घिफारी] से मिलनी, त उ कहले: "तू कहाँ के हउअ?" हम जवाब देनी: "गुरु से।" उ कहले कि, "जदी हम आपके गुरु से आवे से पहिले मिलले रहती त तू एकरा में ना आईल रहती।" हम पूछनी: "अइसन काहे बा?" उ बतवले कि, 'हम एक बेर रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के कहत सुनले रहनी कि 'तीन मस्जिद, यानी भव्य मस्जिद, हमार मस्जिद अवुरी बैतुल मकदीस मस्जिद के छोड़ के कवनो गाड़ी यात्रा खाती तैयार नईखे'। हम अब्दुल्ला बिन सलाम से भी मिलनी, हम कहनी कि हम गुरु से निकल के काआब से मिलनी, फिर उ अवुरी हम उहाँ एक दिन रहनी, अवुरी हम उनुका के रसूलुल्लाह शलाल्लाहु अलैहि व सल्लम के हदीस बतवनी, जबकि उ हमरा के तौराह बतवले, फिर हम उनुका से कहनी कि रसुलुल्लाह शलाल्लाहु अलैहि व सल्लम एक बेर कहले रहले कि: 'सूरज के उगला के सबसे निमन दिन शुक्रवार ह।' ओह दिन आदम भविष्यवक्ता के रचना भइल, ओह दिन उनुका के नीचे भेजल गइल, ओह दिन उनकर पश्चाताप स्वीकार कइल गइल, ओह दिन ऊ मर गइलन आ ओह दिन प्रलय भइल. धरती के सभ जानवर शुक्रवार के सबेरे तब तक इष्टतम सुनवाई के स्थिति में रहेले, जब तक कि इंसान के छोड़ के सूरज ना उगेला। जुमरा के एगो समय होला जब कवनो मुसलमान अपना नमाज में दुआ ना करेला आ अल्लाह से कुछुओ माँगेला सिवाय एह बात के कि अल्लाह ओकरा के कर दीहें. क'ब तब कहले, 'समय हर साल एक दिन होखेला।' [अब्दुल्लाह बिन सलाम] तब कहले कि कब झूठ बोलले बाड़े, त हम कहनी कि काब तौराह पढ़ले बाड़े अवुरी फेर कहले कि, 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सही कहतारे, उ दिन हर जुमवार के होखेला।' तब अब्दुल्ला बिन सलाम कहले, 'काब सही कहतारे, अवुरी हम ओ समय के बारे में बहुत बढ़िया से जानतानी!' हम पूछनी कि हे भाई, एकरा बारे में बताईं? उ जवाब देले कि, 'उ समय शुक्रवार के अंतिम घंटा ह, सूर्यास्त से पहिले।' तब हम उनकर खंडन करत पूछनी कि का रउवा अल्लाह के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के इ कहत ना सुननी कि कवनो मुसलमान अपना नमाज में ओह समय दुआ ना करेला? का उ समय अभी भी नमाज के दौरान ना रहे? ' उ पूछ के जवाब देले कि, 'का रउआ भी नबी सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम के इ कहत ना सुनले बानी कि जे भी नमाज करी अवुरी ओकरा बाद नमाज के इंतजार करे खाती बईठ जाई, तब तक ओकरा के हमेशा नमाज के स्थिति में गिनल जाई, जब तक कि अगिला नमाज के समय ना आई?' 'हम 'हँ' के जवाब देले रहनी।' ऊ कहले, 'तब त इहो अईसने बा'।

हदीस :


Imam Nasa'i : 1413
Imam Malik : 222
Imam Darimi : 1523