हदीस
Al-Qalam (pena)
Imam Abu Dawud : 4078حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ مُسَافِرٍ الْهُذَلِيُّ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَسَّانَ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ رَبَاحٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ أَبِي عَبْلَةَ عَنْ أَبِي حَفْصَةَ قَالَ قَالَ عُبَادَةُ بْنُ الصَّامِتِ لِابْنِهِ يَا بُنَيَّ إِنَّكَ لَنْ تَجِدَ طَعْمَ حَقِيقَةِ الْإِيمَانِ حَتَّى تَعْلَمَ أَنَّ مَا أَصَابَكَ لَمْ يَكُنْ لِيُخْطِئَكَ وَمَا أَخْطَأَكَ لَمْ يَكُنْ لِيُصِيبَكَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ أَوَّلَ مَا خَلَقَ اللَّهُ الْقَلَمَ فَقَالَ لَهُ اكْتُبْ قَالَ رَبِّ وَمَاذَا أَكْتُبُ قَالَ اكْتُبْ مَقَادِيرَ كُلِّ شَيْءٍ حَتَّى تَقُومَ السَّاعَةُ يَا بُنَيَّ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ مَاتَ عَلَى غَيْرِ هَذَا فَلَيْسَ مِنِّي
हमनी के बतवले बा [जाफर बिन मुसाफिर अल हुदजाली] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [याह्या बिन हसन] कहले बाड़े, हमनी के [अल वलीद बिन रबाह] से [इब्राहिम बिन अबू अबला] से [अबू हफशाह] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; [उबादा बिन ऐश शमीत] अपना बेटा से कहले, 'हे बेटा, सचमुच रउआ इमान के स्वादिष्टता के स्वाद तब तक ना चख पइब जब तक कि रउआ ई ना समझ पइब कि जवन राउर हिस्सा होखे के किस्मत में लिखल बा, उ रउआ से ना गुजरी, आ जवन राउर हिस्सा ना होखे के किस्मत में लिखल बा, उ रउआ ना मिली। एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले रहनी कि अल्लाह सबसे पहिले कलम बनवले रहले, ओकरा बाद अल्लाह उनुका से कहले रहले कि लिखीं! कलम जवाब दिहलस, 'हे रब्ब, हम का लिखीं?' अल्लाह जवाब दिहले: 'कयामत के दिन तक जवन किस्मत होई, उ सभ किस्मत लिखीं'। हे बेटा, हम एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले रहनी कि जे भी बिना अईसन विश्वास के मर जाला उ हमरा समूह के ना ह।