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- Dzikir & Doa Adab berdoa Berdoalah kepada tuhanmu dengan berendah diri dan suara yang lembut. Sesungguhnya allah tidak menyukai orang-orang yang melampaui batas

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Berdoalah kepada tuhanmu dengan berendah diri dan suara yang lembut. Sesungguhnya allah tidak menyukai orang-orang yang melampaui batas
Imam Ahmad : 1402

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ زِيَادِ بْنِ مِخْرَاقٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا عَبَايَةَ عَنْ مَوْلًى لِسَعْدٍ أَنَّ سَعْدًا سَمِعَ ابْنًا لَهُ يَدْعُو وَهُوَ يَقُولُ اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْجَنَّةَ وَنَعِيمَهَا وَإِسْتَبْرَقَهَا وَنَحْوًا مِنْ هَذَا وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ النَّارِ وَسَلَاسِلِهَا وَأَغْلَالِهَا فَقَالَ لَقَدْ سَأَلْتَ اللَّهَ خَيْرًا كَثِيرًا وَتَعَوَّذْتَ بِاللَّهِ مِنْ شَرٍّ كَثِيرٍ وَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّهُ سَيَكُونُ قَوْمٌ يَعْتَدُونَ فِي الدُّعَاءِ وَقَرَأَ هَذِهِ الْآيَةَ { ادْعُوا رَبَّكُمْ تَضَرُّعًا وَخُفْيَةً إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُعْتَدِينَ } وَإِنَّ حَسْبَكَ أَنْ تَقُولَ اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْجَنَّةَ وَمَا قَرَّبَ إِلَيْهَا مِنْ قَوْلٍ أَوْ عَمَلٍ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ النَّارِ وَمَا قَرَّبَ إِلَيْهَا مِنْ قَوْلٍ أَوْ عَمَلٍ

हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुररहमान बिन महदी] हमरा सब के [स्यूबाह] के [जियाद बिन मिहराक] स कहलक अछि; हम [अबू ‘अबयाह] केँ [स’दक पूर्व दास] सँ सुनलहुँ जे स’द अपन बेटाक नमाज सुनने छल; 'अल्लाहुम्मा इन्नी अस`अलुका अल जन्नाता वाना'इमहा वा`इस्तबराकाहा वानहवान मिन हज्जा, वा`अ'उद्जुबिका मिन्नानरी वसालासिलाहा वा अघलालाहा -हे अल्लाह, हम अहाँ स जन्नत आ ओकर सुख, ओकर रेशमी कपड़ा आ एहि तरहक चीज माँगैत छी, आ हम अहाँ स नरक स, ओकर जंजीर स आ... बेड़ी-' तखन [स'द] कहलनि; 'अहाँ अल्लाह सँ बहुत नीक मंगलौं आ बहुत बुराई सँ अल्लाह सँ शरण लेलौं।' सुनलौं जे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहैत छथि : 'नमाज मे दुर्व्यवहार करय वाला लोक होयत'। तखन ओ श्लोक पढ़लनि- नम्रता आ मृदु स्वर मे अपन प्रभु सँ प्रार्थना करू। सचमुच, सीमा के उल्लंघन करय वाला अल्लाह के पसंद नै छैन्ह'। सचमुच, अहाँक लेल ई पढ़ब काफी अछि: 'अल्लाहुम्मा इन्नी अस`अलुकल जन्नाता वामा कर्राबा इलैहा मिन कौलिन औ अमल, वा अ'उदजुबिका मिन्नारी वामा क़ुरबा इलायहा मिन कौलिन औ अमल -हे अल्लाह, हम अहाँ स स्वर्ग आ की एकरा शब्द आ कर्म मे नजदीक अनैत अछि, से मांगैत छी, आ हम शरण लैत छी नरक सँ अहाँ मे आ जे किछु एकरा भलाईक नजदीक अनैत अछि | वचन वा कर्म-'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 1402, 1499