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- Dzikir & Doa Kelanjutan dzikir pagi Membaca: 'ALLAHUMMA 'AFINI FIE BADANII, ALLAHUMMA 'AFINI FIE SAM'II ... 3x

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Membaca: 'ALLAHUMMA 'AFINI FIE BADANII, ALLAHUMMA 'AFINI FIE SAM'II ... 3x
Imam Abu Dawud : 4426

حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ عَبْدِ الْعَظِيمِ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ عَمْرٍو عَنْ عَبْدِ الْجَلِيلِ بْنِ عَطِيَّةَ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مَيْمُونٍ قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي بَكْرَةَ أَنَّهُ قَالَ لِأَبِيهِ يَا أَبَتِ إِنِّي أَسْمَعُكَ تَدْعُو كُلَّ غَدَاةٍ اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي بَدَنِي اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي سَمْعِي اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي بَصَرِي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ تُعِيدُهَا ثَلَاثًا حِينَ تُصْبِحُ وَثَلَاثًا حِينَ تُمْسِي فَقَالَ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدْعُو بِهِنَّ فَأَنَا أُحِبُّ أَنْ أَسْتَنَّ بِسُنَّتِهِ قَالَ عَبَّاسٌ فِيهِ وَتَقُولُ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ الْكُفْرِ وَالْفَقْرِ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ تُعِيدُهَا ثَلَاثًا حِينَ تُصْبِحُ وَثَلَاثًا حِينَ تُمْسِي فَتَدْعُو بِهِنَّ فَأُحِبُّ أَنْ أَسْتَنَّ بِسُنَّتِهِ قَالَ وَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَعَوَاتُ الْمَكْرُوبِ اللَّهُمَّ رَحْمَتَكَ أَرْجُو فَلَا تَكِلْنِي إِلَى نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ وَأَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ وَبَعْضُهُمْ يَزِيدُ عَلَى صَاحِبِهِ

हमरा सब के कहल गेल अछि जे [अल अब्बास बिन अब्दुल अज़हीम] आ [मुहम्मद इब्नुल मुत्सन्ना] दुनू गोटे कहलनि; हमरा सब के [अब्दुल मलिक बिन अमरू] के [अब्दुल जलील बिन अथियाह] स [जफर बिन मैमुन] स कहने छथि ओ कहलनि; हमरा कहने छथि ['अब्दुररहमान बिन अबू बकरह] ओ [अपन पिता] सँ कहलनि, 'हे हमर पिता, भोरे हम अहाँ केँ सदिखन दुआ करैत सुनैत छी: 'अल्लाहुम्मा 'आफिनी फी बदानी अल्लाहुम्मा 'आफिनी फी सम'ई अल्लाहुम्मा 'आफिनी फी बशरी ला इलाहा इल्ला अनता -ओ, अल्लाह हमर शरीर केँ सुधारू, सुधार करू।' हमर सुनवाई, हमर दृष्टि सुधारू, अहाँक अतिरिक्त कोनो देवता नहि छथि-। अहाँ भोर आ साँझ दुनू मे तीन बेर दोहराओल' ओ जवाब देलनि, 'हम एक बेर अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केँ हुनका संग नमाज पढ़ैत सुनने रही, तेँ हम हुनकर सुन्नत केर पालन करबाक इच्छा रखैत छी'। अब्बास हदीस मे कहलनि -अपन रिवायतक संग-; 'आ अहाँ इहो कहैत छी, 'अल्लाहुम्मा इन्नी अ'उद्ज़ू बीका मिनल कुफ्री वाल फकरी अल्लाहुम्मा इन्नी अ'उद्ज़ू बीका मिन 'अज्ज्ज़बिल कबरी ला इलाहा इला अनता -हे अल्लाह, हम अहाँ स कुफर आ गरीबी स शरण लैत छी।' हे अल्लाह, हम कब्र के तड़प स अहाँ स शरण लैत छी, अहाँ के अलावा कोनो ईश्वर इबादत के लायक नै छथि-। अहाँ भोर आ साँझ दुनू बेर तीन बेर धरि दोहराबैत छी, तखन अहाँ एकरा संग नमाज पढ़ैत छी, -अथियाक पिता उत्तर देलनि;- तखन हम हुनकर सुन्नतक पालन करय चाहैत छी'। ओ कहलनि, 'अल्लाह केर रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'किछु दुआ एहन लोकक लेल जे आपदा सँ त्रस्त छथि; 'अल्लाहुम्मा रहमतका अर्जू फला तकिलनी इला नफसी थरफता 'ऐनीन वा अशलीह ली स्या`नी कुल्लाहु ला इलाहा इला अनता -हे अल्लाह, हमर प्रभु, हम अहाँक दया के आशा करैत छी, तेँ हमर काज अपना पर नहि छोड़ू -हमरा सँ मुँह नहि घुमाउ- पलक झपकैत, हमर सब ठीक करू प्रकरण मे, अहाँक अतिरिक्त कोनो भगवान नहि छथि-'., आ किछु कथाकार सेहो छथि जे जे प्रार्थना कहल गेल अछि ताहि मे जोड़ि दैत छथि |

Hadith Corroboration :


Imam Ahmad : 19534
Imam Abu Dawud : 4426