हदीस
Membaca SUBHANALLAH 100x, ALHAMDULILLAH 100x, ALLAHU AKBAR 100x, LAILLAHA ILLALLAH 100x
Imam Ahmad : 26125حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو مَعْشَرٍ عَنْ مُسْلِمِ بْنِ أَبِي مَرْيَمَ عَنْ صَالِحٍ مَوْلَى وَجْزَةَ عَنْ أُمِّ هَانِئٍ بِنْتِ أَبِي طَالِبٍ قَالَتْ جِئْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي امْرَأَةٌ قَدْ ثَقُلْتُ فَعَلِّمْنِي شَيْئًا أَقُولُهُ وَأَنَا جَالِسَةٌ قَالَ قُولِي اللَّهُ أَكْبَرُ مِائَةَ مَرَّةٍ فَإِنَّهُ خَيْرٌ لَكِ مِنْ مِائَةِ بَدَنَةٍ مُجَلَّلَةٍ مُتَقَبَّلَةٍ وَقُولِي الْحَمْدُ لِلَّهِ مِائَةَ مَرَّةٍ فَإِنَّهُ خَيْرٌ لَكِ مِنْ مِائَةِ فَرَسٍ مُسْرَجَةٍ مُلْجَمَةٍ حَمَلْتِيهَا فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَقُولِي سُبْحَانَ اللَّهِ مِائَةَ مَرَّةٍ هُوَ خَيْرٌ لَكِ مِنْ مِائَةِ رَقَبَةٍ مِنْ وَلَدِ إِسْمَاعِيلَ تُعْتِقِينَهُنَّ وَقُولِي لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ مِائَةَ مَرَّةٍ لَا تَذَرُ ذَنْبًا وَلَا يَسْبِقُهُ الْعَمَلُ
हमनी के बतवले बाड़े [यूनुस बिन मुहम्मद] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [अबू मा'स्यार] से [मुस्लिम बिन अबू मरियम] से [सालिह] से वजज़ा के पूर्व गुलाम, [उम्मू हानी' बिंत अबू तालिब] से उ कहले कि, 'हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिले आईल रहनी तब हम उनुका से पूछनी कि, 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हम एगो बुढ़िया हई, त हमरा के सिखाईं।' कुछ अइसन जवना के हम बइठ के पढ़ सकीलें'. तब नबी जवाब दिहले: 'अल्लाह अकबर - अल्लाह सबसे बड़ बाड़े - सौ गुना पढ़ीं, अवुरी इ आपके खाती जूता से पूरा सौ ऊंट के चढ़ावे अवुरी स्वीकार होखे से निमन बा।' आ अलहमदुलिल्लाह के सौ बेर पढ़ीं, वाकई में रउरा खातिर ई सौ घोड़ा से बढ़िया बा जवना के रउरा अल्लाह के राह पर ले जाए खातिर काठी आ रस्सी लगा दिहले बानी. सुबहनाल्लाह - अल्लाह के महिमा - सौ बेर पढ़ीं, आ तोहरा खातिर ई बेहतर बा कि इस्माइल के वंशज से सौ गुलाम के इन्फाक करीं आ रउरा सभे के मुक्त कर लीं. आ पढ़ीं ला इलाहा इल्लाल्लाह - अल्लाह के अलावा कवनो इबादत के लायक देवता नइखे - सौ बेर, आ अब रउरा पाप के त्याग ना करब आ दोसरा कर्म के बराबरी ना होखब'.