हदीस
Subhanallah adada khalqihi 3x, subhanallah ridha nafsihi 3x, subhanallah ziinata arsyihi 3x, subhanallah midaada kalimatihi 3x
Imam Muslim : 4905حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ وَعَمْرٌو النَّاقِدُ وَابْنُ أَبِي عُمَرَ وَاللَّفْظُ لِابْنِ أَبِي عُمَرَ قَالُوا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ مَوْلَى آلِ طَلْحَةَ عَنْ كُرَيْبٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ جُوَيْرِيَةَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَرَجَ مِنْ عِنْدِهَا بُكْرَةً حِينَ صَلَّى الصُّبْحَ وَهِيَ فِي مَسْجِدِهَا ثُمَّ رَجَعَ بَعْدَ أَنْ أَضْحَى وَهِيَ جَالِسَةٌ فَقَالَ مَا زِلْتِ عَلَى الْحَالِ الَّتِي فَارَقْتُكِ عَلَيْهَا قَالَتْ نَعَمْ قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَقَدْ قُلْتُ بَعْدَكِ أَرْبَعَ كَلِمَاتٍ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ لَوْ وُزِنَتْ بِمَا قُلْتِ مُنْذُ الْيَوْمِ لَوَزَنَتْهُنَّ سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ عَدَدَ خَلْقِهِ وَرِضَا نَفْسِهِ وَزِنَةَ عَرْشِهِ وَمِدَادَ كَلِمَاتِهِ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَأَبُو كُرَيْبٍ وَإِسْحَقُ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ بِشْرٍ عَنْ مِسْعَرٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي رِشْدِينَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ جُوَيْرِيَةَ قَالَتْ مَرَّ بِهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ صَلَّى صَلَاةَ الْغَدَاةِ أَوْ بَعْدَ مَا صَلَّى الْغَدَاةَ فَذَكَرَ نَحْوَهُ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ سُبْحَانَ اللَّهِ عَدَدَ خَلْقِهِ سُبْحَانَ اللَّهِ رِضَا نَفْسِهِ سُبْحَانَ اللَّهِ زِنَةَ عَرْشِهِ سُبْحَانَ اللَّهِ مِدَادَ كَلِمَاتِهِ
हमनी के [कुतैबा बिन सईद] आ [अमरू अन नकिद] आ [इब्न अबू उमर] के बतावल गइल बा -आ ई लफह इब्न अबू उमर के ह- ऊ लोग कहल; हमनी के [सुफयान] से [मुहम्मद बिन अब्दुररहमान] - गुलाम - से तलहा परिवार के [कुरैब] से [इब्न अब्बास] से [जुवैरीया] से बतवले बाड़े कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फजर नमाज के बाद सबेरे जुवैरियम के घर से निकल गईले अवुरी उ अपना नमाज के जगह प रहले। एकरा कुछ समय बाद ही रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भोर के बाद - धुहा के समय - वापस आ गईले, जबकि जुवैरीया अभी भी अपना नमाज के जगह प बईठल रहले। एकरा बाद अल्लाह के रसूलुल्लाह उनुका के सलाम कईले: 'हे जुवैर्याह, का आप अभी तक अपना नमाज के जगह से नईखी हटले?' जुवैरिया जवाब दिहले; 'हॅंं। हम अभी भी इहाँ बानी, अपना मूल जगह प, हे अल्लाह के रसूलुल्लाह'। तब रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'बाहर अइला के बाद हम चार गो श्रृंखला के शब्द कहले बानी - तीन बेर - जवना वाक्य के तुलना अगर रउआ दिन भर पढ़ल चीज से कइल जाव त निश्चित रूप से तुलनीय होई, जवना के नाम बा 'सुभानल्लूही वाबिहमदीही, 'आदा खोलकीहि वारिधू नफसीहि वजीनाता 'अर्सिहि वामिदादा कालिमातिही'। महिमा अल्लाह के होखे उनकर सब तारीफ के साथे जेतना गिनल जाला। उनकर प्राणी, उनकर प्रसन्नता के अनुसार, उनकर सिंहासन के अनुसार आ जेतना उनकर बात के स्याही के अनुसार'। हमनी के [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] आ [अबू कुरैब] आ [इशाक] से [मुहम्मद बिन बिसीर] से [मिसार] से [मुहम्मद बिन अब्दुररहमान] से [अबू रिसिडीन] से [इब्न अब्बास] से [जुवैरीया] से कहले कि; कि एक बेर अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा लगे से गुजर गईले जब उ भोर के नमाज पूरा क लेले रहले। -तब उहो अइसने शब्दावली कहले। हालांकि, उ वाक्य के इस्तेमाल कईले; 'महिमा अल्लाह के ओतने होखे जतना कि उनकर प्राणी के।' अल्लाह के महिमा उनके मर्जी के हिसाब से होखे। अल्लाह के महिमा उनुका गद्दी के महानता के मुताबिक होखे। अल्लाह के महिमा ओतने होखे जतना कि उनकर पांचवा व्याख्या'।