प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 5832
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ وَاللَّهِ إِنِّي لَأَسْتَغْفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ فِي الْيَوْمِ أَكْثَرَ مِنْ سَبْعِينَ مَرَّةً
हमें [अबू अल यमन] ने बताया है, हमें [स्यू'एब] ने [अज़ ज़ुहरी] से बताया है, उन्होंने कहा; मुझे [अबू सलमा बिन अब्दुर्रहमान] ने बताया है, उन्होंने कहा; [अबू हुरैरा] ने कहा; मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को यह कहते सुना: "अल्लाह की कसम, मैं सच में एक दिन में सत्तर से ज़्यादा बार अल्लाह से इस्तगफ़ार (माफ़ी मांगना) और तौबा करता हूँ।"