हदीस
Bertaubat dan beristighfar tujuh puluh kali sampai seratus kali setiap hari
Imam Tirmidzi : 3182حَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ{ وَاسْتَغْفِرْ لِذَنْبِكَ وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ }فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي لَأَسْتَغْفِرُ اللَّهَ فِي الْيَوْمِ سَبْعِينَ مَرَّةًقَالَ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَيُرْوَى عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَيْضًا عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنِّي لَأَسْتَغْفِرُ اللَّهَ فِي الْيَوْمِ مِائَةَ مَرَّةٍ وَقَدْ رُوِيَ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي لَأَسْتَغْفِرُ اللَّهَ فِي الْيَوْمِ مِائَةَ مَرَّةٍ وَرَوَاهُ مُحَمَّدُ بْنُ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ
हमनी के बतवले बाड़े [अब्दु बिन हुमैद] हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुरज्जाक] हमनी के [मा'मर] से [अज जुहरी] से [अबू सलामाह] से [अबू हुरैरा] रडियाल्लाहु 'अनहू से बतवले बाड़े: 'आ अपना पाप खातिर माफी मांगीं अवुरी मुसलमान, पुरुष अवुरी महिला के -पाप- खाती'। -मुहम्मद: 19- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सलाम कहले कि, 'वास्तव में हम दिन में सत्तर बेर अल्लाह से माफी मांगेनी'। अबू ईसा कहले कि, इ हदीस सच्चे बा। अबू हुरैरा से भी इ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम से भी रिवायत बा, उ कहले कि, 'वास्तव में हम दिन में सौ बेर अल्लाह से माफी मांगेनी'। नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सलाम से एगो अउरी सनाद के माध्यम से रिवायत बा कि, 'वास्तव में हम दिन में सौ बेर अल्लाह से माफी मांगेनी'। [मुहम्मद बिन अमरू] भी [अबू हुरैरा] से [अबू सलामाह] से बतवले बाड़े।