इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Shalat Wajib dan Sunnah Rukun dan Gerakan shalat beserta bacaannya Sunnah membaca Doa Iftitah - 6: ALLAAHUMMA LAKAL HAMDU ANTA QAYYIMUS SAMAAWAATI WAL ARDLI WA MAN FII HINNA …

हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Sunnah membaca Doa Iftitah - 6: ALLAAHUMMA LAKAL HAMDU ANTA QAYYIMUS SAMAAWAATI WAL ARDLI WA MAN FII HINNA …
Imam Bukhari : 1053

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ قَالَ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ أَبِي مُسْلِمٍ عَنْ طَاوُسٍ سَمِعَ ابْنَ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا قَامَ مِنْ اللَّيْلِ يَتَهَجَّدُ قَالَ اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ قَيِّمُ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ وَلَكَ الْحَمْدُ لَكَ مُلْكُ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ وَلَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ نُورُ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ وَلَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ مَلِكُ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ وَلَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ الْحَقُّ وَوَعْدُكَ الْحَقُّ وَلِقَاؤُكَ حَقٌّ وَقَوْلُكَ حَقٌّ وَالْجَنَّةُ حَقٌّ وَالنَّارُ حَقٌّ وَالنَّبِيُّونَ حَقٌّ وَمُحَمَّدٌ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَقٌّ وَالسَّاعَةُ حَقٌّ اللَّهُمَّ لَكَ أَسْلَمْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَإِلَيْكَ أَنَبْتُ وَبِكَ خَاصَمْتُ وَإِلَيْكَ حَاكَمْتُ فَاغْفِرْ لِي مَا قَدَّمْتُ وَمَا أَخَّرْتُ وَمَا أَسْرَرْتُ وَمَا أَعْلَنْتُ أَنْتَ الْمُقَدِّمُ وَأَنْتَ الْمُؤَخِّرُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ أَوْ لَا إِلَهَ غَيْرُكَقَالَ سُفْيَانُ وَزَادَ عَبْدُ الْكَرِيمِ أَبُو أُمَيَّةَ وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ قَالَ سُفْيَانُ قَالَ سُلَيْمَانُ بْنُ أَبِي مُسْلِمٍ سَمِعَهُ مِنْ طَاوُسٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमनी से रिवायत भइल बा [अली बिन अब्दुल्लाह] कहले बाड़न, हमनी से रिवायत कइले बाड़न [सुफयान] कहले बाड़न, हमनी के [सुलेमान बिन अबू मुस्लिम] से [थाउस] से रिवायत कइले बाड़न कि ऊ [इब्न अब्बास रदलियाहु अन्हुमा] के कहत सुनले बाड़न; नबी शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब उ रात के नमाज करे खातिर खड़ा भईले त उ नमाज - इस्तीफतह पढ़ के शुरू कईले: अल्लाहुम्मा लक हमदू। अंता काययुमुस समावती वाल अर्धि वा मन फिहिन्ना। वा लकल हमदु लकल मुलकुस समावती वाल अर्धि वा मन फीहिन्ना। वा लकल हमदू अंता नुउरस समावती वाल अर्धि वा मन फीहिन्ना। वा लकल हमदू अंता नुउरस समावती वाल अर्धि वा मन फीहिन्ना। वा लकल हमदू अंता मलिकुस समावती वाल अर्धि । वा लकल हमदू अंतल हक वा वा'दुकल हक वा लिकाओ-उकल हक वा कौलुकल हक वाल जन्नातुल हक वान नारुल हक वान नबीयुना हक वा मुहम्मदून शल्लल्हु वा सलाम हक वास साअतु हक। अल्लाहुम्मा लका असलमतू वा बीका आमंटू वा अलाईका तवक्कल्तु वा इलैका अनाबतु वा बीका खशमतु वा इलाइका हाकमतू, फगफिरली माँ कद्दमतू वा माँ अखखर्तु वा माँ असरतु वा माँ 'अब्दुल्लाह'लंटू अंतल मुकद्दीमु वा अंतल मुअखिरू ला इलाहा इला अंता' आव 'ला इलाहा घोइरुका'। -'हे अल्लाह, तोहरा के सब तारीफ बा। आकाश आ धरती आ ओहमें जवन बा ओकर पोषण करे वाला तू हउअ। आ तोहरा खातिर सब स्तुति बा, तोहरा खातिर आकाश आ धरती आ ओहमें जवन बा ओकर राज्य बा। आ तोहरा के सब स्तुति बा, तू आकाश आ धरती आ ओहमें जवन बा ओकर रोशनी हउअ। आ तोहरा सब के स्तुति बा, तू आकाश आ धरती आ दुनु में जवन बा ओकर राजा हउअ। आ रउरा खातिर सब तारीफ बा, रउरा अल हक हईं - सबसे सच्चा -, आ राउर वादा सही बा - आ रउरा से मुठभेड़ सही बा, राउर वचन साँच बा, स्वर्ग सच्चा बा, नरक साँच बा, आ राउर नबी सच्चा हउवें, मुहम्मद शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम साँच बा आ कियामत के दिन सही बा. हे अल्लाह, हम तोहरा के आत्मसमर्पण कर देनी, तोहरा पर हम विश्वास करेनी, तोहरा पर हम आपन भरोसा रखले बानी, तोहरा पर हम पश्चाताप करेनी -फिर से-, एह तर्क के वजह से कि रउआ हमरा के देले बानी हम केहू से दुश्मनी बा जे -तोहार कानून- के विरोध करेला आ रउआ से हम न्याय करेनी। हमरा के बीतल आ भविष्य के पाप से माफ कर दीं, जवना के हम छिपावेनी भा जवना के हम उजागर करेनी। तू पहिला आ आखिरी हउअ आ तोहरा अलावा कवनो देवता पूजे लायक नइखे भा तोहरा अलावा कवनो देवता नइखे' कहले, [सुफयान]; आ ['अब्दुल करीम अबू उमायाह] के कहनाम बा कि 'वा ला हौला व ला कुववाता इल्ला बिल्लाह' -रउरा के छोड़ के कवनो शक्ति आ मेहनत नइखे-। कहले कि, [सुफयान] [सुलेमान बिन अबू मुस्लिम] से उ एकरा के [थवस] से [इब्न अब्बास रदलिअल्लाहु अनहु] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुनले बाड़े।

हदीस :

Imam Ahmad : 2673, 3196
Imam Bukhari : 1053, 5842, 6837, 6888, 6945
Imam Muslim : 1288
Imam Abu Dawud : 655
Imam Tirmidzi : 3340
Imam Nasa'i : 1601
Imam Ibnu Majah : 1345
Imam Malik : 451
Imam Darimi : 1448