हदीस
Tata cara shalat tasbih
Imam Tirmidzi : 443حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ مُوسَى أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ أَخْبَرَنَا عِكْرِمَةُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنِي إِسْحَقُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍأَنَّ أُمَّ سُلَيْمٍ غَدَتْ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ عَلِّمْنِي كَلِمَاتٍ أَقُولُهُنَّ فِي صَلَاتِي فَقَالَ كَبِّرِي اللَّهَ عَشْرًا وَسَبِّحِي اللَّهَ عَشْرًا وَاحْمَدِيهِ عَشْرًا ثُمَّ سَلِي مَا شِئْتِ يَقُولُ نَعَمْ نَعَمْقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَالْفَضْلِ بْنِ عَبَّاسٍ وَأَبِي رَافِعٍ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَنَسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غَيْرُ حَدِيثٍ فِي صَلَاةِ التَّسْبِيحِ وَلَا يَصِحُّ مِنْهُ كَبِيرُ شَيْءٍ وَقَدْ رَأَى ابْنُ الْمُبَارَكِ وَغَيْرُ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ صَلَاةَ التَّسْبِيحِ وَذَكَرُوا الْفَضْلَ فِيهِ حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ حَدَّثَنَا أَبُو وَهْبٍ قَالَ سَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الْمُبَارَكِ عَنْ الصَّلَاةِ الَّتِي يُسَبَّحُ فِيهَا فَقَالَ يُكَبِّرُ ثُمَّ يَقُولُ سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَى جَدُّكَ وَلَا إِلَهَ غَيْرُكَ ثُمَّ يَقُولُ خَمْسَ عَشْرَةَ مَرَّةً سُبْحَانَ اللَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْبَرُ ثُمَّ يَتَعَوَّذُ وَيَقْرَأُ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ وَفَاتِحَةَ الْكِتَابِ وَسُورَةً ثُمَّ يَقُولُ عَشْرَ مَرَّاتٍ سُبْحَانَ اللَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْبَرُ ثُمَّ يَرْكَعُ فَيَقُولُهَا عَشْرًا ثُمَّ يَرْفَعُ رَأْسَهُ مِنْ الرُّكُوعِ فَيَقُولُهَا عَشْرًا ثُمَّ يَسْجُدُ فَيَقُولُهَا عَشْرًا ثُمَّ يَرْفَعُ رَأْسَهُ فَيَقُولُهَا عَشْرًا ثُمَّ يَسْجُدُ الثَّانِيَةَ فَيَقُولُهَا عَشْرًا يُصَلِّي أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ عَلَى هَذَا فَذَلِكَ خَمْسٌ وَسَبْعُونَ تَسْبِيحَةً فِي كُلِّ رَكْعَةٍ يَبْدَأُ فِي كُلِّ رَكْعَةٍ بِخَمْسَ عَشْرَةَ تَسْبِيحَةً ثُمَّ يَقْرَأُ ثُمَّ يُسَبِّحُ عَشْرًا فَإِنْ صَلَّى لَيْلًا فَأَحَبُّ إِلَيَّ أَنْ يُسَلِّمَ فِي الرَّكْعَتَيْنِ وَإِنْ صَلَّى نَهَارًا فَإِنْ شَاءَ سَلَّمَ وَإِنْ شَاءَ لَمْ يُسَلِّمْ قَالَ أَبُو وَهْبٍ وَأَخْبَرَنِي عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي رِزْمَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّهُ قَالَ يَبْدَأُ فِي الرُّكُوعِ بِسُبْحَانَ رَبِيَ الْعَظِيمِ وَفِي السُّجُودِ بِسُبْحَانَ رَبِيَ الْأَعْلَى ثَلَاثًا ثُمَّ يُسَبِّحُ التَّسْبِيحَاتِ قَالَ أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ وَحَدَّثَنَا وَهْبُ بْنُ زَمْعَةَ قَالَ أَخْبَرَنِي عَبْدُ الْعَزِيزِ وَهُوَ ابْنُ أَبِي رِزْمَةَ قَالَ قُلْتُ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْمُبَارَكِ إِنْ سَهَا فِيهَا يُسَبِّحُ فِي سَجْدَتَيْ السَّهْوِ عَشْرًا عَشْرًا قَالَ لَا إِنَّمَا هِيَ ثَلَاثُ مِائَةِ تَسْبِيحَةٍ
हमनी के बतवले बाड़े [अहमद बिन मुहम्मद बिन मूसा] हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुल्लाह बिन मुबारक] हमनी के बतवले बाड़े [‘इकरीमा बिन अम्मर] हमरा के [इशक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू थल्हाह] [अनास बिन मलिक] से बतवले बाड़े कि उम्म सुलैम नबी सल्लाहु अलैहि वसल्लम से सबेरे-सबेरे मुलाकात कईले अवुरी कहले कि, हमरा के कुछ वाक्य सिखाईं जवन हम साल में कहतानी हमार दुआ, त उ कहले: 'अल्लाह से दस बेर तकबीर कहऽ, दस बेर अल्लाह के महिमामंडन करीं आ दस बेर तहमदला -अल हमदुलिल्लाह कह के- बनाईं, फिर -अल्लाह से- पूछीं कि रउआ का चाहत बानी, निश्चित रूप से उ जवाब दिहे: हँ, हँ, -हम राउर निहोरा पूरा करब-'। -रवीर- कहले, एह अध्याय में -इब्न अब्बास, अब्दुल्लाह बिन अमरू, अल फद्दल बिन अब्बास आ अबू रफी' से -पेंट- भी बा। अबू ईसा कहले कि, "अनस के हदीस एगो हसन गरीब हदीस ह, जवन कि नबी (स.अ.व.) से रिवायत बा, सिवाय तस्बीह के नमाज से जुड़ल ए हदीस के, जवना में से अधिकांश सच्चे नईखे।" इब्न मुबारक आ अउरी कई गो विद्वान लोग तस्बीह नमाज के अस्तित्व के तर्क दिहल, आ ई लोग एकर गुण के भी जिक्र कइल। अहमद बिन अब्दाह के जानकारी देले बाड़े हमनी के अबू वहब के जानकारी देले बाड़े उ कहले, हम अब्दुल्ला बिन अल मुबारक से तसबीह के नमाज के बारे में पूछनी जवना में तसबीह के पाठ भी शामिल बा, उ जवाब देले, उ कहले कि तकबीर फिर पढ़लस सुभानका अल्लाहुम्मा वा बिहमदीका वा तबारकासमुका वा ताअला जदुका वला इलाहा घैरुका तब उ सुभानल्लाह वलहमदुलिल्लाह वा लाईलाहा इल्लाह वल्लाहु अकबर पन्द्रह बेर पढ़ले, फेर तअवूदज कहले आ बिस्मिल्लाह पढ़ले ओकरा बाद अल फतिहा आ अउरी चिट्ठी पढ़ले, फेर सुभानल्लाह वल्हमदुलिल्लाह वा लईलाहा इल्लाह वल्लाहु अकबर के दस बेर पढ़ले, फेर बोव कइले आ दस बेर वाक्य पढ़ल, फेर झुकला से माथा उठा के दस बेर वाक्य पढ़ल, फेर दस बेर वाक्य पढ़ के सजदा कइल. बेर, फेर दस बेर वाक्य पढ़ के आपन माथा उठवले, फेर दूसर बेर वाक्य के दस बेर पढ़ के सजदा करेला त चार रकाअत ले अइसन करेला, हर रकाअत में पचहत्तर बेर तसबीह पढ़ेला, हर रकात में तसबीह पन्द्रह बेर पढ़ेला, फेर अल फतेहह आ ओकरा बाद के चिट्ठी पढ़ेला आ दस बेर तसबीह पढ़ेला गुना - दस गुना। अगर उ रात के नमाज करेले त जवन चीज़ जादा पसंद बा उ बा हर दु रकाअत में सलाम। अगर ऊ दिन में नमाज पढ़ेला त ऊ नमस्कार कर सकेला - दूसरका रकाअत में - भा ना. अबू वहब कहले, उ हमरा के अब्दुल्लाह से अब्दुल अजीज बिन अबू रिजमाह से कहले रहले कि उ कहले रहले कि, प्रणाम करत समय सुभाना रब्बियाल अज़ीमी पढ़ के शुरुआत करे के चाही, ओसही सजदा करे के समय सुभाना रब्बियाल अ’ला तीन बेर पढ़ के शुरू करे के चाही, ओकरा बाद कई बेर तसबीह पढ़े के चाही। अहमद बिन अब्दाह कहले, उ हमनी के वहब बिन ज़म'आ कहले, उ कहले, उ हमरा से कहले 'अब्दुल अजीज, उ इब्न अबू जिरमा हवे, उ कहले, हम अब्दुल्ला बिन मुबारक से पूछनी, अगर केहु भूला जाला - जब तस्बीह के नमाज करेला - त का ओकरा दुनो सहवी सजदा के दौरान दस बेर - दस बेर तस्बीह पढ़े के पड़ेला? उ जवाब देले, ना, सिर्फ - तसबीह के नमाज के दौरान जवन तसबीह पढ़ल जाला - उ तीन सौ बेर रहे।