प्रतिनिधि हदीस
इमाम नसाई : 740
أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ وَإِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ عَنْ نَافِعِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ سَهْلِ بْنِ أَبِي حَثْمَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا صَلَّى أَحَدُكُمْ إِلَى سُتْرَةٍ فَلْيَدْنُ مِنْهَا لَا يَقْطَعَ الشَّيْطَانُ عَلَيْهِ صَلَاتَهُ
हमें [अली बिन हुज्र] और [इसहाक बिन मंसूर] बताया गया है कि उन दोनों ने कहा; हमें [सुफ़यान] ने [शफ़वान बिन सुलैमान] से [नफ़ी बिन जुबैर] से [सहल बिन अबू हत्समा] बताया है; उन्होंने कहा; कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अगर तुम में से कोई सुत्रा (बाँटने वाले) की तरफ़ मुँह करके नमाज़ पढ़े तो उसके और पास हो जाओ, ताकि शैतान उसकी नमाज़ में रुकावट न डाले।"