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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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कुल हदीस : 1
प्रतिनिधि हदीस
इमाम नसाई : 602

أَخْبَرَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَقَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ قَالَكُنْتُ مَعَ ابْنِ عُمَرَ حَيْثُ أَفَاضَ مِنْ عَرَفَاتٍ فَلَمَّا أَتَى جَمْعًا جَمَعَ بَيْنَ الْمَغْرِبِ وَالْعِشَاءِ فَلَمَّا فَرَغَ قَالَ فَعَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي هَذَا الْمَكَانِ مِثْلَ هَذَا

हमें [याकूब बिन इब्राहीम] ने बताया है, उन्होंने कहा; हमें [हुसैय्यम] ने [इस्माईल बिन अबू खालिद] से बताया है, उन्होंने कहा; हमें [अबू इसहाक] ने [सईद बिन जुबैर] से बताया है, उन्होंने कहा, "मैं [इब्न उमर] के साथ अराफा से निकला, और जामा (मुज़दलिफ़ा) पहुँचकर मग़रिब और इशा की नमाज़ एक साथ पढ़ी। जब उन्होंने नमाज़ पूरी की तो कहा: 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बार इस जगह पर ऐसा ही कुछ किया था।'"

समर्थक हदीस :


इमाम मुस्लिम : 2261
इमाम नसाई : 602, 604