हदीस
Tata cara shalat kusuf (gerhana matahari) shalat gerhana dan penjelasan tentang gerhana
Imam Bukhari : 1002حَدَّثَنَا أَبُو مَعْمَرٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ قَالَ حَدَّثَنَا يُونُسُ عَنْ الْحَسَنِ عَنْ أَبِي بَكْرَةَ قَالَخَسَفَتْ الشَّمْسُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَخَرَجَ يَجُرُّ رِدَاءَهُ حَتَّى انْتَهَى إِلَى الْمَسْجِدِ وَثَابَ النَّاسُ إِلَيْهِ فَصَلَّى بِهِمْ رَكْعَتَيْنِ فَانْجَلَتْ الشَّمْسُ فَقَالَ إِنَّ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ آيَتَانِ مِنْ آيَاتِ اللَّهِ وَإِنَّهُمَا لَا يَخْسِفَانِ لِمَوْتِ أَحَدٍ وَإِذَا كَانَ ذَاكَ فَصَلُّوا وَادْعُوا حَتَّى يُكْشَفَ مَا بِكُمْوَذَاكَ أَنَّ ابْنًا لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَاتَ يُقَالُ لَهُ إِبْرَاهِيمُ فَقَالَ النَّاسُ فِي ذَاكَ
हमनी के बतावल गईल बा [अबू मा'मर] कहले, हमनी के बतावल गईल बा [अब्दुल वारित्स] कहले, हमनी के [यूनुस] के [अल हसन] से [अबू बकरह] से बतावल गईल बा, 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय सूर्यग्रहण भईल रहे ओकरा बाद उ मस्जिद में पहुंचे तक आपन शाल लुढ़क के बाहर निकलले।' त लोग उनुका चारो ओर जमा हो गईले। फेर दू रकाअत नमाज के अगुवाई ओह लोग के साथे कइलन जबले कि फेर से सूरज ना लउकल. तब उ कहले कि सूरज अवुरी चंद्रमा अल्लाह के महानता के दुगो निशानी ह अवुरी केहु के मौत के चलते दुनो में से कवनो में ग्रहण ना होई। अगर ग्रहण लाग जाव त जबले रउरा खातिर ग्रहण खतम ना हो जाव तबले खूब प्रार्थना आ प्रार्थना करीं.' एह घटना के चिंता बा कि कब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बेटा, जेकर नाम इब्राहिम रहे, के मौत हो गईल, जवना के बाद लोग चर्चा कईले।
हदीस :
Imam Ahmad : 2576, 3202, 5617, 5724, 6195, 13897, 16481, 17441, 17472, 17508, 19496, 19696, 22522, 23333, 23432, 24148, 24184, 25752
Imam Bukhari : 982, 983, 984, 985, 986, 988, 989, 990, 993, 997, 998, 1000, 1002, 2962, 2963, 2964, 2965, 4798, 5339
Imam Muslim : 1499, 1500, 1504, 1508, 1512, 1516, 1517, 1521, 1522
Imam Abu Dawud : 995, 996, 1006
Imam Nasa'i : 1442, 1444, 1445, 1446, 1453, 1455, 1457, 1461, 1465, 1466, 1468, 1469, 1470, 1473, 1474, 1476, 1480, 1483, 1485
Imam Ibnu Majah : 1251, 1252, 1253
Imam Malik : 398, 399
Imam Darimi : 1484, 1487