प्रतिनिधि हदीस
इमाम अबू दाऊद : 999
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ سُفْيَانَ حَدَّثَنَا حَبِيبُ بْنُ أَبِي ثَابِتٍ عَنْ طَاوُسٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ صَلَّى فِي كُسُوفِ الشَّمْسِ فَقَرَأَ ثُمَّ رَكَعَ ثُمَّ قَرَأَ ثُمَّ رَكَعَ ثُمَّ قَرَأَ ثُمَّ رَكَعَ ثُمَّ قَرَأَ ثُمَّ رَكَعَ ثُمَّ سَجَدَ وَالْأُخْرَى مِثْلُهَا
हमें बताया है [मुसद्दद] ने हमें बताया है [याह्या] ने [सुफयान] से हमें बताया है [हबीब बिन अबू साबित] ने [थावस] से [इब्न अब्बास] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कि उन्होंने ग्रहण की प्रार्थना की, फिर उन्होंने (अल फ़ातिहा और अल कुरान) पढ़ा, फिर रुकू किया, फिर पढ़ा, फिर रुकू किया, फिर पढ़ा, फिर रुकू किया, फिर पढ़ा, फिर रुकू किया, फिर सजदा किया। उन्होंने अगली रकाअत (दूसरी रकाअत) में भी ऐसा ही किया।