प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 337
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ قَالَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ عَنْ صَالِحِ بْنِ كَيْسَانَ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ قَالَتْفَرَضَ اللَّهُ الصَّلَاةَ حِينَ فَرَضَهَا رَكْعَتَيْنِ رَكْعَتَيْنِ فِي الْحَضَرِ وَالسَّفَرِ فَأُقِرَّتْ صَلَاةُ السَّفَرِ وَزِيدَ فِي صَلَاةِ الْحَضَرِ
हमसे वर्णित है कि [अब्दुल्ला बिन यूसुफ] ने कहा, [मलिक] ने हमें [सालेह बिन कैसन] से [उरवाह बिन अज़ ज़ुबैर] से [आयशा] से बताया, जो मोमिनों की माँ हैं, उन्होंने कहा, "अल्लाह ने नमाज़ को अनिवार्य किया है, और इसकी पहली अनिवार्य नमाज़ दो रकाअत है, चाहे घर पर हो या यात्रा में। फिर यह प्रावधान यात्रा की नमाज़ के लिए किया गया, और इसे फिर घर की नमाज़ के लिए जोड़ दिया गया।"