प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 882
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ بُكَيْرٍ قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ عُقَيْلٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ قَالَ أَخْبَرَنِي سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ أَخْبَرَهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا قُلْتَ لِصَاحِبِكَ يَوْمَ الْجُمُعَةِ أَنْصِتْ وَالْإِمَامُ يَخْطُبُ فَقَدْ لَغَوْتَ
हमसे कहा है [याह्या बिन बुकैर] ने, हमसे कहा है [अल लैत्स] ने [उकैल] से [इब्न शिहाब] ने कहा, मुझसे कहा है [सईद बिन अल मुसय्यब] कि [अबू हुरैरा] ने उनसे बताया, कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "यदि तुम शुक्रवार को अपने दोस्त से कहते हो 'चुप रहो', भले ही इमाम उपदेश दे रहे हों, तो वास्तव में तुम व्यर्थ कर रहे हो (पुरस्कार नहीं पा रहे हो)।