प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 842
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ هُوَ ابْنُ هُرْمُزَ الْأَعْرَجُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقْرَأُ فِي الْجُمُعَةِ فِي صَلَاةِ الْفَجْرِ الم تَنْزِيلُ السَّجْدَةَ وَهَلْ أَتَى عَلَى الْإِنْسَانِ حِينٌ مِنْ الدَّهْرِ
हमें [अबू नुआईम] ने वर्णित किया है, हमें [सुफ़यान] ने [साद बिन इब्राहीम] से ['अब्दुर्रहमान] से वर्णित किया है - अर्थात् इब्न हुरमुज अल अरज से [अबू हुरैरा] रदलिल्लाहु अन्हु ने कहा, "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फज्र की प्रार्थना में पढ़ा: "अलिफ लाम मिइम तंज़ील (सूरह अस सजदा), और 'हाल अता अलाल इंसानी हिनुम मिनद दहरी (सूरह अल इंसान)।"