प्रतिनिधि हदीस
इमाम अहमद : 12792
حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ الْمُغِيرَةِ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسٍ قَالَ دَخَلَ عَلَيْنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا وَأُمِّي وَخَالَتِي فَقَالَ قُومُوا أُصَلِّي بِكُمْ فِي غَيْرِ حِينِ صَلَاةٍ قَالَ فَقَالَ رَجُلٌ مِنْ الْقَوْمِ لِثَابِتٍ أَيْنَ جَعَلَ أَنَسًا مِنْهُ قَالَ عَلَى يَمِينِهِ وَالنِّسْوَةَ خَلْفَهُ
हमें [हम्मद बिन खोलिद] ने बताया है कि [सुलेमान बिन अल-मुगीरा] ने [त्साबित] से [अनस] कहा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमसे मिले, जब मैं, मेरी माँ और मेरी चाची थीं। फिर कहा, खड़े हो जाओ, मैं तुम्हें नमाज़ के समय (सुन्नत की नमाज़) के बाहर नमाज़ पढ़ाऊँगा। तो एक आदमी ने साबित से पूछा, पैगंबर ने अनस को कहाँ रखा?? उसने कहा, उसके दाईं ओर, औरतें उसके पीछे थीं।