प्रतिनिधि हदीस
इमाम अबू दाऊद : 468
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ يُوسُفَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِي سَهْلٍ يَعْنِي عُثْمَانَ بْنَ حَكِيمٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي عَمْرَةَ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ صَلَّى الْعِشَاءَ فِي جَمَاعَةٍ كَانَ كَقِيَامِ نِصْفِ لَيْلَةٍ وَمَنْ صَلَّى الْعِشَاءَ وَالْفَجْرَ فِي جَمَاعَةٍ كَانَ كَقِيَامِ لَيْلَةٍ
उन्होंने कहा, "अहमद बिन हंबल ने हमें बताया है, इसहाक बिन यूसुफ ने हमें बताया है, सुफियान ने हमें बताया है, अबू सहल यानी उस्मान बिन हकीम ने हमें बताया है, अब्दुर्रहमान बिन अबू अमराह ने हमें बताया है, उस्मान बिन अफ्फान ने कहा है; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई भी जमात के साथ इशा की नमाज़ पढ़ता है, वह आधी रात की इबादत करने जैसा है और जो कोई भी जमात के साथ इशा और फज्र की नमाज़ पढ़ता है, तो वह पूरी रात की इबादत करने जैसा है।"