प्रतिनिधि हदीस
इमाम अहमद : 4528
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ تَوْبَةَ الْعَنْبَرِيِّ عَنْ مُوَرِّقٍ الْعِجْلِيِّ قَالَ قُلْتُ لِابْنِ عُمَرَ أَتُصَلِّي الضُّحَى قَالَ لَا قُلْتُ فَصَلَّاهَا عُمَرُ قَالَ لَا قُلْتُ صَلَّاهَا أَبُو بَكْرٍ قَالَ لَا قُلْتُ أَصَلَّاهَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا إِخَالُهُ
हमें बताया है [वाकी] ने हमें [स्यूबा] से [तौबा अल अंबारी] से [मुवर्रिक अल इजली] से बताया है, उन्होंने कहा; मैंने [इब्न उमर] से पूछा, "क्या आपने डलहा की नमाज़ पढ़ी?" उन्होंने जवाब दिया, "नहीं।" मैंने फिर पूछा, "क्या उमर ने की?" उन्होंने जवाब दिया, "नहीं।" मैंने फिर पूछा, "क्या अबू बकर ने की?" उन्होंने जवाब दिया, "नहीं।" मैंने फिर पूछा, "क्या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने की?" उन्होंने जवाब दिया, "मैं अंदाज़ा नहीं लगा सकता।"