Hadith Representative
Rasulullah memindahkan posisi makmum yang berada di samping kiri, di pindahkan ke samping kanan, ketika shalat malam
Imam Bukhari : 1123حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ عَنْ مَخْرَمَةَ بْنِ سُلَيْمَانَ عَنْ كُرَيْبٍ مَوْلَى ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّهُ أَخْبَرَهُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاأَنَّهُ بَاتَ عِنْدَ مَيْمُونَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا وَهِيَ خَالَتُهُ قَالَ فَاضْطَجَعْتُ عَلَى عَرْضِ الْوِسَادَةِ وَاضْطَجَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَهْلُهُ فِي طُولِهَا فَنَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى انْتَصَفَ اللَّيْلُ أَوْ قَبْلَهُ بِقَلِيلٍ أَوْ بَعْدَهُ بِقَلِيلٍ ثُمَّ اسْتَيْقَظَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَجَلَسَ فَمَسَحَ النَّوْمَ عَنْ وَجْهِهِ بِيَدِهِ ثُمَّ قَرَأَ الْعَشْرَ آيَاتٍ خَوَاتِيمَ سُورَةِ آلِ عِمْرَانَ ثُمَّ قَامَ إِلَى شَنٍّ مُعَلَّقَةٍ فَتَوَضَّأَ مِنْهَا فَأَحْسَنَ وُضُوءَهُ ثُمَّ قَامَ يُصَلِّي قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا فَقُمْتُ فَصَنَعْتُ مِثْلَ مَا صَنَعَ ثُمَّ ذَهَبْتُ فَقُمْتُ إِلَى جَنْبِهِ فَوَضَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدَهُ الْيُمْنَى عَلَى رَأْسِي وَأَخَذَ بِأُذُنِي الْيُمْنَى يَفْتِلُهَا بِيَدِهِ فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ أَوْتَرَ ثُمَّ اضْطَجَعَ حَتَّى جَاءَهُ الْمُؤَذِّنُ فَقَامَ فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ خَفِيفَتَيْنِ ثُمَّ خَرَجَ فَصَلَّى الصُّبْحَ
हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुल्लाह बिन यूसुफ] हमरा सब के [मलिक] के [मखरामह बिन सुलेमान] स [कुरैब] सहाय इब्न अब्बास रदलियाल्लाहु अनहु स कहलक अछि जे ओ [अब्दुल्लाह बिन अब्बास रदलियाल्लाहु अनहुमा] स रिपोर्ट केने छथि जे ओ मैमुनाह उम्मूल मुमिनिन रदलियाल्लाहु अनहा के घर पर राति बितेने छलाह, ओ छलीह | ओकर मौसी, ओ कहलनि: 'त हम तकियाक चौड़ा कात पड़ल रही, जखन कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ हुनकर परिवार नमहर कात मे छलाह, तखन अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आधा राति केर कनि-कनि बाद धरि सुतल रहलाह, ओ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उठि गेलाह आ बैसल-बैसल ओ अपन चेहरा पर नींदक अवशिष्ट भाग केँ हाथ सँ पोछि लेलनि। तखन सूरह अली इमरान के अंतिम दस आयत पढ़ू। तखन ओ वजूदक स्थान पर ठाढ़ भ' गेलाह, फेर जतेक संभव भ' सकल वजूद केलनि, फेर नमाज पढ़लनि। कहलक, इब्न अब्बास रडियाल्लाहु अनहु, 'त हम उठलहुँ आ हम ओहिना केलहुँ जेना ओ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केलनि। तखन हम हुनका लग जा कए हुनका बगल मे ठाढ़ भ’ गेलहुँ। तेँ ओ हमर माथ पर अपन दहिना हाथ राखि हमर कान केँ ताबत धरि पकड़ि लेलक जाबत धरि ओ हमरा अपन दहिना दिस नहि हटि गेल। तखन दू रकाअत, फेर दू रकाअत, फेर दू रकाअत, फेर दू रकाअत, फेर वितर - विषम - फेर लेट गेलाह जाबत मुअज्जिन हुनका लग नहि आबि गेलाह - नमाजक आह्वान दैत -। तेँ ओ दू रकाआ हल्लुक नमाज केलनि आ फेर फजरक नमाज करय लेल निकलि गेलाह |
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 1746, 2133, 2163, 2211, 2288, 2471, 3004, 3009, 3073, 3153, 3187, 3216, 3260, 3280, 3299, 3310, 12644, 13104, 14262
Imam Bukhari : 114, 177, 656, 658, 686, 937, 1123, 4204, 5464
Imam Muslim : 1055, 1056, 1276, 1281, 1282, 1285
Imam Abu Dawud : 516, 1151
Imam Tirmidzi : 215
Imam Nasa'i : 438, 797, 833
Imam Ibnu Majah : 963, 965
Imam Darimi : 639