प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 5842
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ سَمِعْتُ سُلَيْمَانَ بْنَ أَبِي مُسْلِمٍ عَنْ طَاوُسٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا قَامَ مِنْ اللَّيْلِ يَتَهَجَّدُ قَالَ اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ نُورُ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ وَلَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ قَيِّمُ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ وَلَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ الْحَقُّ وَوَعْدُكَ حَقٌّ وَقَوْلُكَ حَقٌّ وَلِقَاؤُكَ حَقٌّ وَالْجَنَّةُ حَقٌّ وَالنَّارُ حَقٌّ وَالسَّاعَةُ حَقٌّ وَالنَّبِيُّونَ حَقٌّ وَمُحَمَّدٌ حَقٌّ اللَّهُمَّ لَكَ أَسْلَمْتُ وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَإِلَيْكَ أَنَبْتُ وَبِكَ خَاصَمْتُ وَإِلَيْكَ حَاكَمْتُ فَاغْفِرْ لِي مَا قَدَّمْتُ وَمَا أَخَّرْتُ وَمَا أَسْرَرْتُ وَمَا أَعْلَنْتُ أَنْتَ الْمُقَدِّمُ وَأَنْتَ الْمُؤَخِّرُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ أَوْ لَا إِلَهَ غَيْرُكَ
हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन मुहम्मद] ने हमें बताया है [सुफ़यान] मैंने [सुलेमान बिन अबू मुस्लिम] [थावस] से [इब्न अब्बास] से सुना कि; "जब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रात को तहज्जुद से जागना चाहते थे, तो उन्होंने पढ़ा: "ALAAHUMA LAKAL HAMDU, ANTA NUURUSSAMAWAATI वाल अर्ध वामन फ़िइहिन्ना, वालकल हम्दू ANTA QAYYIMUSSAWAATI वाल अर्ध वामन फ़िइहिन्ना, वालकल हम्दू ANTAL HAQQU, WAWA'DUKA HAQQ, WAQAULUKA HAQQ, WALIQAA'UKA HAQQ, WALJANNATU HAQQ, WANNAARU HAQQ, WASSAA'ATU HAQQ, WANNABIYUUN HAQQ, WAMUHAMMADUN HAQQ. अल्लाहुम्मा लका असलमतु वाबिका आमंतु वाइलैका तवक्कलतु, वाइलैका अनाबतु, वाबिका ख़ाशमतु, वाइलैका हाकमतु, फ़हग़फ़रली मा क़द्दामतु वमा अख़ख़ारतु, वमा असरार्तु वमा अ'लंतु, अंतल मुकद्दिम वा अंतल मु'अकिर ला-इलाहा इल्ला अंता -या- ला इलाहा इल्ला ग़ैरुका (ओ अल्लाह, सारी तारीफ़ सिर्फ़ तेरी है, तू आसमानों और धरती और उनके बीच की हर चीज़ का नूर है, सारी तारीफ़ सिर्फ़ तेरी है, तू आसमानों और धरती और उनमें रहने वाले हर इंसान का रखवाला है, तू सच है और तेरा वादा सच है, तेरा कलाम सच है, तुझसे मिलना सच है, तेरा जन्नत सच है, तेरा जहन्नम सच है, फिर से जी उठना सच है, नबी सच हैं और मुहम्मद सच हैं। हे अल्लाह, मैं तुझको सरेंडर करता हूँ, तुझ पर ईमान लाता हूँ, तुझ पर भरोसा करता हूँ, तुझ पर भरोसा करता हूँ, तेरी वजह से मैं दुश्मन हूँ, और तुझसे इंसाफ़ मांगता हूँ, तो जो मैंने किया और जो नहीं किया, जो मैंने छिपकर किया और जो मैंने खुलेआम किया, मुझे माफ़ कर दो। तू ही पहला है और तू ही आख़िर है, तेरे सिवा कोई इबादत नहीं और तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।