हदीस
Apabila khawatir masuk waktu subuh, maka shalatlah witir satu rakat
Imam Bukhari : 1069حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي سَالِمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَإِنَّ رَجُلًا قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ صَلَاةُ اللَّيْلِ قَالَ مَثْنَى مَثْنَى فَإِذَا خِفْتَ الصُّبْحَ فَأَوْتِرْ بِوَاحِدَةٍ
हमनी के रिवायत बा [अबू अल यमन] कहले बाड़े, हमनी के [स्यूअइब] के जानकारी देले बाड़े [अज जुहरी] से कहले बाड़े, हमरा के [सलीम बिन अब्दुल्लाह] के जानकारी देले बाड़े कि [अब्दुल्लाह बिन उमर रदलिअल्लाहु अनहु] कहले बाड़े; उहाँ एगो व्यक्ति से पूछल गईल कि हे रसूलुल्लाह सल्लाह अलैहि वसल्लम रात के नमाज कईसे कईल जाला? उ शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब दिहले: 'दू दू - रकाअत - आ अगर फजर के समय में प्रवेश करे से डर लागत बा त एक रकाअत से वितर के नमाज करीं'।
हदीस :
Imam Ahmad : 4263, 4331, 4343, 4560, 4616, 4646, 4712, 4714, 4745, 4790, 4841, 4851, 4857, 4912, 4967, 5089, 5142, 5197, 5213, 5226, 5246, 5667, 5736, 5893, 5894, 5900, 5976, 6070, 6150, 16869, 18629, 18630
Imam Bukhari : 452, 453, 936, 938, 940, 1069
Imam Muslim : 1239, 1240, 1241, 1242, 1243, 1251, 1252
Imam Abu Dawud : 1103, 1130, 1211, 1224
Imam Tirmidzi : 401, 423, 429, 543
Imam Nasa'i : 1648, 1649, 1650, 1651, 1652, 1653, 1654, 1655, 1656, 1674, 1675, 1676, 1677
Imam Ibnu Majah : 1164, 1165, 1308, 1309, 1310, 1312, 1315
Imam Malik : 247
Imam Darimi : 1422, 1423, 1537