प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 840
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ قَالَ أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ عَنْ مَنْصُورٍ وَحُصَيْنٍ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ حُذَيْفَةَ قَالَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا قَامَ مِنْ اللَّيْلِ يَشُوصُ فَاهُ
हमें बताया है [मुहम्मद बिन कसीर] ने कहा, हमें [सुफ़यान] ने [मंसूर] से और [हुशैन] ने [अबू वईल] से [हुदज़िफ़ा] से बताया है कि उन्होंने कहा, "जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शाम की नमाज़ के लिए उठते थे, तो वह अपना मुँह रगड़ते थे।"