प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 724
حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ قَالَ حَدَّثَنَا مُعْتَمِرٌ عَنْ أَبِيهِ عَنْ بَكْرٍ عَنْ أَبِي رَافِعٍ قَالَ صَلَّيْتُ مَعَ أَبِي هُرَيْرَةَالْعَتَمَةَ فَقَرَأَ إِذَا السَّمَاءُ انْشَقَّتْ فَسَجَدَ فَقُلْتُ لَهُ قَالَ سَجَدْتُ خَلْفَ أَبِي الْقَاسِمِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَا أَزَالُ أَسْجُدُ بِهَا حَتَّى أَلْقَاهُ
हमें बताया है [अबू अन नुमान] ने कहा, हमें बताया है [मुअत्तमिर] ने [अपने पिता] से [बकर] से [अबू रफी] ने कहा, "मैंने [अबू हुरैरा] के साथ 'इशा प्रार्थना की, फिर उन्होंने 'इदज़स समा'उन्स्याक़कत' पढ़ा फिर उन्होंने सजदा किया, फिर मैंने उनसे इसके बारे में पूछा। तो उन्होंने उत्तर दिया, "मैंने एक बार उस आयत में अबू अल काशिम (पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पीछे एक साथ सजदा किया था, और मैं उनसे मिलने तक हमेशा इसमें सजदा करूंगा।"