प्रतिनिधि हदीस
इमाम नसाई : 973
أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْحَارِثِ عَنْ الضَّحَّاكِ بْنِ عُثْمَانَ عَنْ بُكَيْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْأَشَجِّ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَمَا صَلَّيْتُ وَرَاءَ أَحَدٍ أَشْبَهَ صَلَاةً بِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ فُلَانٍ فَصَلَّيْنَا وَرَاءَ ذَلِكَ الْإِنْسَانِ وَكَانَ يُطِيلُ الْأُولَيَيْنِ مِنْ الظُّهْرِ وَيُخَفِّفُ فِي الْأُخْرَيَيْنِ وَيُخَفِّفُ فِي الْعَصْرِ وَيَقْرَأُ فِي الْمَغْرِبِ بِقِصَارِ الْمُفَصَّلِ وَيَقْرَأُ فِي الْعِشَاءِ بِالشَّمْسِ وَضُحَاهَا وَأَشْبَاهِهَا وَيَقْرَأُ فِي الصُّبْحِ بِسُورَتَيْنِ طَوِيلَتَيْنِ
[उबैदुल्लाह बिन सईद] ने हमें बताया है कि उन्होंने कहा; [अब्दुल्लाह बिन अल हारिथ] ने हमें [अदल दलाहक बिन उस्मान] से [बुकैर बिन अब्दुल्लाह बिन अल असयाज] से [सुलेमान बिन यासर] से [अबू हुरैरा] से बताया है जिन्होंने कहा; "मैंने कभी किसी इमाम के पीछे नमाज़ नहीं पढ़ी जो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की नमाज़ से ज़्यादा मिलती-जुलती हो, जितना कि फलां के पीछे नमाज़ पढ़ना। हमने उनके पीछे नमाज़ पढ़ी और उन्होंने ज़ुहर की नमाज़ की पहली दो रकात लंबी कीं और आखिरी दो रकात छोटी कीं। उन्होंने अस्र की नमाज़ भी छोटी की और मग़रिब की नमाज़ में एक छोटी सूरह पढ़ी। ईशा की नमाज़ में उन्होंने सूरह वासीसमसी वदलुहाहा (क़स. अश-शम्सी) और उससे मिलती-जुलती कुछ पढ़ी, जबकि सुबह की नमाज़ में उन्होंने दो लंबी सूरह पढ़ीं।"