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Rasulullah membaca surat al-kafirun dan al-ikhlas dalam shalat maghrib
Imam Ibnu Majah : 825حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ بُدَيْلٍ حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقْرَأُ فِي الْمَغْرِبِ قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ وَقُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ
हमरा सब के कहलक अछि [अहमद बिन बुदैल] कहलक अछि, हमरा सब के कहलक अछि [हफश बिन गियात्स] कहलक अछि, हमरा सब के [उबैदुल्लाह] के [नाफी’] स [इब्न उमर] स कहलक अछि ओ कहलनि, 'शाम के नमाज में नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमेशा पढ़ैत छलाह; 'QUL YAA AYUHAA Al KAAFIRUUNA -कहो: 'हे अहाँ जे काफिर करैत छी-, आ QUL HUWA ALLAHU AHAD -कहू: 'ओ अल्लाह, एकमात्र आ एकमात्र-। ' .