प्रतिनिधि हदीस
इमाम मलिक : 169
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ سَمِعَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَامِرِ بْنِ رَبِيعَةَ يَقُولُصَلَّيْنَا وَرَاءَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ الصُّبْحَ فَقَرَأَ فِيهَا بِسُورَةِ يُوسُفَ وَسُورَةِ الْحَجِّ قِرَاءَةً بَطِيئَةً فَقُلْتُ وَاللَّهِ إِذًا لَقَدْ كَانَ يَقُومُ حِينَ يَطْلُعُ الْفَجْرُ قَالَ أَجَلْ
मलिक ने मुझे [हिस्याम बिन उरवाह] से [अपने पिता] से बताया कि उसने [अब्दुल्ला बिन 'अमीर बिन रबी'आ] को यह कहते सुना; "हमने सुबह [उमर बिन खत्ताब] के पीछे नमाज़ पढ़ी। उसने सूरह यूसुफ़ और सूरह अल हज धीरे-धीरे पढ़ी।" मैंने कहा; "अल्लाह की कसम, फिर वह तब तक नमाज़ पढ़ता रहा जब तक सुबह नहीं हो गई।" अब्दुल्ला बिन 'अमीर ने जवाब दिया; "सही।"