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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Shalat Wajib dan Sunnah Rukun dan Gerakan shalat beserta bacaannya Doa sujud - 7: ALLAHUMMA INNI A'UUDZU BIRIDHAKA MIN SAKHATIKA WA BIMU'AFAATIKA MIN 'UQUUBATIKA ...

हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Doa sujud - 7: ALLAHUMMA INNI A'UUDZU BIRIDHAKA MIN SAKHATIKA WA BIMU'AFAATIKA MIN 'UQUUBATIKA ...
Imam Tirmidzi : 3415

حَدَّثَنَا الْأَنْصَارِيُّ حَدَّثَنَا مَعْنٌ حَدَّثَنَا مَالِكٌ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ أَنَّ عَائِشَةَ قَالَتْكُنْتُ نَائِمَةً إِلَى جَنْبِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَفَقَدْتُهُ مِنْ اللَّيْلِ فَلَمَسْتُهُ فَوَقَعَتْ يَدِي عَلَى قَدَمَيْهِ وَهُوَ سَاجِدٌ وَهُوَ يَقُولُ أَعُوذُ بِرِضَاكَ مِنْ سَخَطِكَ وَبِمُعَافَاتِكَ مِنْ عُقُوبَتِكَ لَا أُحْصِي ثَنَاءً عَلَيْكَ أَنْتَ كَمَا أَثْنَيْتَ عَلَى نَفْسِكَقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رُوِيَ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ عَنْ عَائِشَةَ حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ بِهَذَا الْإِسْنَادِ نَحْوَهُ وَزَادَ فِيهِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْكَ لَا أُحْصِي ثَنَاءً عَلَيْكَ

हमनी के बतवले बाड़े [अल अंसारी] हमनी के बतवले बाड़े [मा'न] हमनी के [मलिक] से [याह्या बिन सईद] से [मुहम्मद बिन इब्राहिम अत तैमी] से बतवले बाड़े कि [ऐसियाह] कहले बाड़े; हम एक बेर रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु वअलैहि वसल्लम के बगल में सुतल रहनी फिर रात में उनुका के गंवा देनी, फेर टटोलनी अवुरी सजदा करत घरी हमार हाथ उनुका गोड़ के तलवा के छू गईल अवुरी कहनी: 'अऊउद्ज़ू बिरीधाका मिन सखथिका वा बिमु'आफातिका मिन उकुबतिक, ला उहशी तनआ-अन अलाईक, अंत कामा अतस्नैत 'आला नफसिक' -हम तोहरा क्रोध से तोहरा प्रसन्नता में शरण लेत बानी, आ तोहरा सजा से तोहरा माफी में, हम तोहार स्तुति के गिनती नइखीं कर सकत। तूँ ओइसने बाड़ऽ जइसे तू अपना के देत बाड़ऽ-। अबू ईसा कहले कि; इ हदीस हसन के सच्चे हदीस ह। आ एकरा के ऐसिया से एक से अधिका तरीका से बखान कइल गइल बा. हमनी के बतवले बा [कुतैबा] हमनी के [अल लैट्स] [याह्या बिन सईद] से एह सनाद के संगे अयीसने बतवले बाड़े। आ ऊ एकरा में अउरी कुछ जोड़ दिहलन; वा अ'उद्ज़ू बीका मिंका ला उहशी त्साना-एन 'आला 'अलाईक -आ हम तोहरा यातना से तोहरा से शरण लेत बानी, तोहार स्तुति के गिनती नइखीं कर सकत-।

हदीस :

Imam Ahmad : 712, 911, 1228, 23176, 24475
Imam Muslim : 751
Imam Abu Dawud : 745, 1215
Imam Tirmidzi : 3415, 3489
Imam Nasa'i : 169, 1088, 1118, 1727, 5439
Imam Ibnu Majah : 1169, 3831
Imam Malik : 448