हदीस
Sunnah membaca Doa Iftitah - 1: ALLAAHU AKBAR KABIIRAA WAL HAMDU LILLAAHI KATSIRAA …
Imam Tirmidzi : 375حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ حَبِيبِ بْنِ الشَّهِيدِ الْبَصْرِيُّ وَعَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ قَالَا حَدَّثَنَا عَتَّابُ بْنُ بَشِيرٍ عَنْ خُصَيْفٍ عَنْ مُجَاهِدٍ وَعِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَجَاءَ الْفُقَرَاءُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ الْأَغْنِيَاءَ يُصَلُّونَ كَمَا نُصَلِّي وَيَصُومُونَ كَمَا نَصُومُ وَلَهُمْ أَمْوَالٌ يُعْتِقُونَ وَيَتَصَدَّقُونَ قَالَ فَإِذَا صَلَّيْتُمْ فَقُولُوا سُبْحَانَ اللَّهِ ثَلَاثًا وَثَلَاثِينَ مَرَّةً وَالْحَمْدُ لِلَّهِ ثَلَاثًا وَثَلَاثِينَ مَرَّةً وَاللَّهُ أَكْبَرُ أَرْبَعًا وَثَلَاثِينَ مَرَّةً وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ عَشْرَ مَرَّاتٍ فَإِنَّكُمْ تُدْرِكُونَ بِهِ مَنْ سَبَقَكُمْ وَلَا يَسْبِقُكُمْ مَنْ بَعْدَكُمْقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ كَعْبِ بْنِ عُجْرَةَ وَأَنَسٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَزَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ وَأَبِي الدَّرْدَاءِ وَابْنِ عُمَرَ وَأَبِي ذَرٍّ قَالَ أَبُو عِيسَى وَحَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ وَفِي الْبَاب أَيْضًا عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَالْمُغِيرَةِ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ خَصْلَتَانِ لَا يُحْصِيهِمَا رَجُلٌ مُسْلِمٌ إِلَّا دَخَلَ الْجَنَّةَ يُسَبِّحُ اللَّهَ فِي دُبُرِ كُلِّ صَلَاةٍ عَشْرًا وَيَحْمَدُهُ عَشْرًا وَيُكَبِّرُهُ عَشْرًا وَيُسَبِّحُ اللَّهَ عِنْدَ مَنَامِهِ ثَلَاثًا وَثَلَاثِينَ وَيَحْمَدُهُ ثَلَاثًا وَثَلَاثِينَ وَيُكَبِّرُهُ أَرْبَعًا وَثَلَاثِينَ
हमनी के बतावल गईल बा कि [इशाक बिन इब्राहिम बिन हबीब बिन असी स्याहिद अल बशरी] अवुरी [अली बिन हुजर] दुनो कहले कि; हमनी के [‘अत्ताब बिन बसिर] [खुशाइफ] से [मुजाहिद] से अवुरी [इकरीमा] [इब्न अब्बास] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; 'गरीब लोग अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आके कहलस; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अमीर लोग हमनी के नमाज आ रोजा के तरह नमाज पढ़ेला आ रोजा करेला, आ ओह लोग के लगे धन बा जवना के इस्तेमाल ऊ लोग गुलाम मुक्त करे आ दक्षिणा दे सकेले!' उ कहले कि, 'अगर रउआ प्रार्थना करीं त कह दीं; सुभानअल्लाह तेतीस बेर, अलहमदुलिल्लाह तेतीस बेर, अल्लाहु अकबर चौंतीस बेर आ ला इलाहा इल्लाह दस बेर। रउरा अपना से पहिले के लोग से आगे निकल पाईब अवुरी ओकरा बाद के लोग से आगे ना बढ़ब'। ऊ कहले कि; 'एह अध्याय में काअब बिन उजरा, अनस, अब्दुल्लाह बिन अमरू, जैद बिन थाबीत, अबू दरदा`, इब्नू उमर आ अबू द्जार से भी रिवायत बा'। अबू ईसा कहले कि; 'इब्न अब्बास के हदीस हसन घरीब के डिग्री में बा।' आ एह अध्याय में अबू हुरैरा आ अल मुगिरा से एगो इतिहास भी बा। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से रिवायत बा कि ऊ कहले बाड़न कि दू गो बात, मुसलमान के गिनती तब तक ना होला जबले ऊ स्वर्ग में ना घुस जाव; हर नमाज के बाद दस बार अल्लाह के महिमामंडन करीं, दस बेर अल्लाह -तहमद- के स्तुति करीं आ दस बेर तकबीर करीं। आ सुते से पहिले तेतीस बेर, तहमीद तेतीस बेर आ चौंतीस बेर तकबीर के नमाज पढ़ीं'.
हदीस :
Imam Ahmad : 4399, 5464, 6665, 7670, 12076, 15816, 16139, 16140, 16159, 16181, 17571, 18322, 18349, 18596, 20510, 21155, 21995, 22020, 22058, 22078
Imam Muslim : 943, 3985, 4861
Imam Abu Dawud : 651, 708
Imam Tirmidzi : 375, 3441, 3456, 3516, 3521
Imam Nasa'i : 875, 876, 915, 1336
Imam Ibnu Majah : 799, 3797, 3801, 3803
Imam Darimi : 652