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Kewajiban menutup aurat bagi wanita yang sudah haid (baligh) dalam shalat
Imam Tirmidzi : 344حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا قَبِيصَةُ عَنْ حَمَّادِ بْنِ سَلَمَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ ابْنِ سِيرِينَ عَنْ صَفِيَّةَ ابْنَةِ الْحَارِثِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تُقْبَلُ صَلَاةُ الْحَائِضِ إِلَّا بِخِمَارٍقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَقَوْلُهُ الْحَائِضِ يَعْنِي الْمَرْأَةَ الْبَالِغَ يَعْنِي إِذَا حَاضَتْ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَائِشَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ وَالْعَمَلُ عَلَيْهِ عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ أَنَّ الْمَرْأَةَ إِذَا أَدْرَكَتْ فَصَلَّتْ وَشَيْءٌ مِنْ شَعْرِهَا مَكْشُوفٌ لَا تَجُوزُ صَلَاتُهَا وَهُوَ قَوْلُ الشَّافِعِيِّ قَالَ لَا تَجُوزُ صَلَاةُ الْمَرْأَةِ وَشَيْءٌ مِنْ جَسَدِهَا مَكْشُوفٌ قَالَ الشَّافِعِيُّ وَقَدْ قِيلَ إِنْ كَانَ ظَهْرُ قَدَمَيْهَا مَكْشُوفًا فَصَلَاتُهَا جَائِزَةٌ
हमरा सभकेँ कहि देने अछि [हन्नाद] कहलनि; हमरा सब के [कबीशाह] के [हम्मद बिन सलामाह] स [कतादाह] स [इब्न सिरिन] स [शफियाह बिंत अल हरिथ] स ['ऐसियाह] स कहलक अछि; 'मासिक धर्म भेल महिलाक लेल नमाज ताबत धरि मान्य नहि अछि जाबत धरि ओ दुपट्टा नहि पहिरने होथि' । ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे अब्दुल्ला बिन अमरू सँ सेहो इतिहास अछि । एम्हर पैगम्बर केरऽ वचन केरऽ अर्थ, 'जै महिला केरऽ मासिक धर्म होय गेलऽ छै, वू वू महिला छै जे यौवन केरऽ उम्र में पहुँची गेलऽ छै आरू ओकरा बाद मासिक धर्म केरऽ अनुभव होय छै' । अबू ईसा कहलनि; ऐश्याहक हदीस हसन प्रामाणिक अछि। वैज्ञानिक सब एहि हदीस के लागू करैत छथि, जे जे महिला मासिक धर्म भ गेल अछि ओ तखन नमाज करैत अछि जखन कि ओकर केश देखाइत अछि मतलब ओकर नमाज अमान्य अछि | ई शफी'ई केरऽ राय छै, हुनी कहलकै, 'स्त्री केरऽ नमाज अगर ओकरऽ शरीर केरऽ कोय अंग दिखाई दै छै त॑ ओकरऽ नमाज अमान्य छै' । इमाम शाफीई स जखन पूछल गेल; जँ ओकर पएरक तलवाक बाहरी भाग देखाइ पड़य तँ की हेतै।' ओ उत्तर देलनि, 'नमाज मान्य अछि'।