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Rasulullah bangun di waktu subuh dalam keadaan tidak memiliki air. Allah ta’ala kemudian menurunkan ayat tayamum
Imam Nasa'i : 308أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ عَنْ مَالِكٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْخَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي بَعْضِ أَسْفَارِهِ حَتَّى إِذَا كُنَّا بِالْبَيْدَاءِ أَوْ ذَاتِ الْجَيْشِ انْقَطَعَ عِقْدٌ لِي فَأَقَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى الْتِمَاسِهِ وَأَقَامَ النَّاسُ مَعَهُ وَلَيْسُوا عَلَى مَاءٍ وَلَيْسَ مَعَهُمْ مَاءٌ فَأَتَى النَّاسُ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالُوا أَلَا تَرَى مَا صَنَعَتْ عَائِشَةُ أَقَامَتْ بِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَبِالنَّاسِ وَلَيْسُوا عَلَى مَاءٍ وَلَيْسَ مَعَهُمْ مَاءٌ فَجَاءَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاضِعٌ رَأْسَهُ عَلَى فَخِذِي قَدْ نَامَ فَقَالَ حَبَسْتِ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالنَّاسَ وَلَيْسُوا عَلَى مَاءٍ وَلَيْسَ مَعَهُمْ مَاءٌ قَالَتْ عَائِشَةُ فَعَاتَبَنِي أَبُو بَكْرٍ وَقَالَ مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَقُولَ وَجَعَلَ يَطْعُنُ بِيَدِهِ فِي خَاصِرَتِي فَمَا مَنَعَنِي مِنْ التَّحَرُّكِ إِلَّا مَكَانُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى فَخِذِي فَنَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى أَصْبَحَ عَلَى غَيْرِ مَاءٍ فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ آيَةَ التَّيَمُّمِ فَقَالَ أُسَيْدُ بْنُ حُضَيْرٍ مَا هِيَ بِأَوَّلِ بَرَكَتِكُمْ يَا آلَ أَبِي بَكْرٍ قَالَتْ فَبَعَثْنَا الْبَعِيرَ الَّذِي كُنْتُ عَلَيْهِ فَوَجَدْنَا الْعِقْدَ تَحْتَهُ
हमरा सब के [कुतैबाह] के [मलिक] स [अब्दुररहमान बिन अल कासिम] स [अपन पिता] स [ऐसियाह] रदलियाल्लाहुअनहा स रिपोर्ट केने छथि ओ कहलनि; 'हम एक बेर रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग हुनकर यात्रा के किछु हिस्सा में छलहुं, आ जखन हम सब अल बैदा पहुंचलहुं - या द्ज़ातुलजैसी में - त हमर हार हेरा गेल छल, तें रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम एकरा तकबा लेल रुकि गेलाह आ हुनकर संगी सब सेहो हुनका संग चलि गेलाह. हुनका सब लग पानि नहि छल आ ने पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम। साथी सब अबू बकर रदलियाल्हुअनहु के पास आबि कहलखिन, 'ऐस्याह जे केलनि से नहि देखलियैक?! ओ रुकि गेल - हिरासत मे लेलक - रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ ओकर साथी सभ केँ, भले ओ सभ एहन जगह पर नहि छल जतय पानि छलैक आ ओकरा सभ लग सेहो पानि नहि छलैक' | अबू बकर रदलियाहुअनहु तखन -हमरा लग- आबि गेलाह आ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमर जाँघ पर माथ राखि लेट गेलाह आ हुनका नींद आबि गेलनि। ओ कहलनि जे, अहाँ अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ मनुक्ख के ओहि ठाम बंद क देलहुं जतय पानि नहि छल आ हुनका सब के सेहो पानि नहि छल? ऐशा कहलक जे अबू बकर हमर आलोचना केलनि आ ओ अल्लाह के इच्छानुसार कहलनि आ ओ हमर कात मे हाथ दबा देलनि। हमरा हिलबा स किछु नहि रोकैत अछि सिवाय रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के स्थिति के जे हमर जाँघ पर छथि ! रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भोर धरि सुति गेलाह, बिना कोनो पानि के। तखन अल्लाह अज्जा व जल्ला तायम्मुम आयत उतारलनि। उसैद बिन हुधैर कहलनि; 'ई अहाँक परिवारक पहिल आशीर्वाद नहि अछि, हे अबू बकरक परिवार!' ऐश्या कहलकै, 'तखन हम सभ जे ऊँट पर सवार छलहुँ, ओकरा जगौलहुँ, आ पता चलल जे हार ओकर नीचाँ छलैक'।