प्रतिनिधि हदीस
इमाम मलिक : 87
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُقُبْلَةُ الرَّجُلِ امْرَأَتَهُ وَجَسُّهَا بِيَدِهِ مِنْ الْمُلَامَسَةِ فَمَنْ قَبَّلَ امْرَأَتَهُ أَوْ جَسَّهَا بِيَدِهِ فَعَلَيْهِ الْوُضُوءُ
याह्या ने मुझे मलिक [इब्न शिहाब] से [सलीम बिन अब्दुल्ला] से उनके पिता - [अब्दुल्ला बिन उमर] से बताया - उन्होंने एक बार कहा था; "अपनी पत्नी को चूमना और छूना संभोग का हिस्सा है। जो कोई भी अपनी पत्नी को चूमता है या उसे छूता है, उसके लिए वजू करना ज़रूरी है।"