प्रतिनिधि हदीस
इमाम अबू दाऊद : 154
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ أَنَّهُ سَمِعَ عُرْوَةَيَقُولُ دَخَلْتُ عَلَى مَرْوَانَ بْنِ الْحَكَمِ فَذَكَرْنَا مَا يَكُونُ مِنْهُ الْوُضُوءُ فَقَالَ مَرْوَانُ وَمِنْ مَسِّ الذَّكَرِ فَقَالَ عُرْوَةُ مَا عَلِمْتُ ذَلِكَ فَقَالَ مَرْوَانُ أَخْبَرَتْنِي بُسْرَةُ بِنْتُ صَفْوَانَ أَنَّهَا سَمِعَتْ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ مَسَّ ذَكَرَهُ فَلْيَتَوَضَّأْ
हमें [अब्दुल्ला बिन मसलमा] ने [मलिक] से [अब्दुल्ला बिन अबू बक्र] बताया है कि उन्होंने एक बार [उरवाह] को कहते सुना; एक बार मेरा सामना [मरवान बिन अल हकम] से हुआ, तो हमने एक ऐसी बात का ज़िक्र किया जिसके लिए वज़ू करना ज़रूरी था। तब मरवान ने कहा; और प्राइवेट पार्ट को छूने के लिए। तो उरवाह ने कहा; मुझे इसके बारे में पता नहीं था। उसके बाद मरवान ने कहा; [बुसरा बिन्त शफ़वान] ने मुझे बताया है कि उन्होंने एक बार पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना: "जो कोई अपने प्राइवेट पार्ट को छूता है, उसे वज़ू करना चाहिए।"