हदीस
Shalat sunnah setelah dzuhur dua rakaat, akan dibangunkan rumah di surga
Imam Tirmidzi : 379حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ النَّيْسَابُورِيُّ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ سُلَيْمَانَ الرَّازِيُّ حَدَّثَنَا الْمُغِيرَةُ بْنُ زِيَادٍ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ ثَابَرَ عَلَى ثِنْتَيْ عَشْرَةَ رَكْعَةً مِنْ السُّنَّةِ بَنَى اللَّهُ لَهُ بَيْتًا فِي الْجَنَّةِ أَرْبَعِ رَكَعَاتٍ قَبْلَ الظُّهْرِ وَرَكْعَتَيْنِ بَعْدَهَا وَرَكْعَتَيْنِ بَعْدَ الْمَغْرِبِ وَرَكْعَتَيْنِ بَعْدَ الْعِشَاءِ وَرَكْعَتَيْنِ قَبْلَ الْفَجْرِقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَأَبِي مُوسَى وَابْنِ عُمَرَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَائِشَةَ حَدِيثٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ وَمُغِيرَةُ بْنُ زِيَادٍ قَدْ تَكَلَّمَ فِيهِ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ قِبَلِ حِفْظِهِ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन रफी' अन नैसाबुरी] कहले बाड़े; हमनी के बतवले बाड़े [इशहाक बिन सुलेमान अर राजी] कहले बाड़े; हमरा के [अल मुगीरा बिन जियाद] से ['अथा`] से ['ऐस्याह] से बतवले बाड़े उ कहले; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि जे भी सुन्नत के नमाज के बारह रकाअत के पालन करी, ओकरा खातिर अल्लाह स्वर्ग में घर बनाई, यानी कि दुपहरिया के नमाज से पहिले चार रकाअत, दुपहरिया के नमाज के बाद दु रकाअत, मगरीब के बाद दु रकाअत, शाम के नमाज के बाद दु रकाअत अवुरी ओकरा से पहिले दु रकाअत।' भोर हो गइल'. ऊ कहले कि; 'एह अध्याय में उम्म हबीबा, अबू हुरैरा, अबू मूसा आ इब्न उमर से भी रिवायत बा'। अबू ईसा कहले कि; 'ऐस्याह के हदीस एह नजरिया से हसन घरीब ह, जबकि मुगीरा बिन जियाद के चर्चा विद्वान लोग रोट नजरिया से कईले बाड़े'।