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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- सौ रकात की नमाज़ बैठकर, सूर्योदय तक ज़िक्र करना उसके लिए सौ नेकियां लिखी जाएंगी और सौ गलतियां मिटाई जाएंगी, पढ़कर: ला इलाहा इल्लाल्लाहु वहदहु ला शरीकलह लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु व हु व अला कुल्लि शयइन क़दीर 100 बार

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प्रतिनिधि हदीस
उसके लिए सौ नेकियां लिखी जाएंगी और सौ गलतियां मिटाई जाएंगी, पढ़कर: ला इलाहा इल्लाल्लाहु वहदहु ला शरीकलह लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु व हु व अला कुल्लि शयइन क़दीर 100 बार
इमाम बुखारी : 5924

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ سُمَيٍّ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ فِي يَوْمٍ مِائَةَ مَرَّةٍ كَانَتْ لَهُ عَدْلَ عَشْرِ رِقَابٍ وَكُتِبَ لَهُ مِائَةُ حَسَنَةٍ وَمُحِيَتْ عَنْهُ مِائَةُ سَيِّئَةٍ وَكَانَتْ لَهُ حِرْزًا مِنْ الشَّيْطَانِ يَوْمَهُ ذَلِكَ حَتَّى يُمْسِيَ وَلَمْ يَأْتِ أَحَدٌ بِأَفْضَلَ مِمَّا جَاءَ إِلَّا رَجُلٌ عَمِلَ أَكْثَرَ مِنْهُ

हमें [अब्दुल्ला बिन मसलमा] ने [मलिक] से [सुमाय] से [अबू शालीह] से [अबू हुरैरा] रदलिअल्लाहु अन्हु से बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहु ला शरीका लाहु, लहुल मुल्कु वा लहुल हम्दु वा हुवा अला कुलि स्याइन कादिर पढ़ता है, अल्लाह के अलावा कोई ईश्वर (पूजा करने का अधिकार नहीं है), एकमात्र और एकमात्र, उसका कोई भागीदार नहीं है। उसी के लिए राज्य है और उसी के लिए सारी प्रशंसा है और वह हर चीज़ पर दिन में सौ बार प्रभुत्व रखता है, इसलिए उसके लिए दस गुलामों को मुक्त करने जैसा पुरस्कार होगा, उसे सौ हसना (अच्छे कर्म) सौंपे जाएंगे और उसे सौ बुरे कर्मों से दूर रखा जाएगा और उसके लिए उस दिन शैतान (के प्रलोभनों) से सुरक्षा होगी शाम और उससे बेहतर कोई इंसान नहीं है। जो इंसान यह नमाज़ पढ़ता है, उसके कर्म उससे बेहतर हैं, सिवाय उसके जो इससे ज़्यादा प्रैक्टिस करता है।"

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 7666, 8362, 8518, 21619, 22465, 26219
इमाम बुखारी : 3050, 5924
इमाम मुस्लिम : 4857, 4859
इमाम तिर्मिदज़ी : 3390, 3457
इमाम इब्नु माजा : 3788, 3857
इमाम मलिक : 437