प्रतिनिधि हदीस
पढ़ना: सुब्हानल्लाह वबिहम्दिही 100 बार
इमाम बुखारी : 5926حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ سُمَيٍّ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ قَالَ سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ فِي يَوْمٍ مِائَةَ مَرَّةٍ حُطَّتْ خَطَايَاهُ وَإِنْ كَانَتْ مِثْلَ زَبَدِ الْبَحْرِ
हमें [अब्दुल्ला बिन मसलमा] ने [मलिक] से [सुमाय] से [अबू शालीह] से [अबू हुरैरा] रदिअल्लाहु अन्हु से बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई दिन में सौ बार 'सुभानल्लाह वबिहम्दिहि, अल्लाह की महिमा है और सभी प्रशंसा उसी के लिए है' कहता है, उसकी गलतियाँ माफ़ कर दी जाएंगी भले ही वे समुद्र में झाग के समान हों।"