प्रतिनिधि हदीस
वुज़ू के बाद सुन्नत नमाज़, दो रकात
इमाम बुखारी : 155حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْأُوَيْسِيُّ قَالَ حَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّ عَطَاءَ بْنَ يَزِيدَ أَخْبَرَهُ أَنَّ حُمْرَانَ مَوْلَى عُثْمَانَ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ رَأَى عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَدَعَا بِإِنَاءٍ فَأَفْرَغَ عَلَى كَفَّيْهِ ثَلَاثَ مِرَارٍ فَغَسَلَهُمَا ثُمَّ أَدْخَلَ يَمِينَهُ فِي الْإِنَاءِ فَمَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا وَيَدَيْهِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ ثَلَاثَ مِرَارٍ ثُمَّ مَسَحَ بِرَأْسِهِ ثُمَّ غَسَلَ رِجْلَيْهِ ثَلَاثَ مِرَارٍ إِلَى الْكَعْبَيْنِ ثُمَّ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ تَوَضَّأَ نَحْوَ وُضُوئِي هَذَا ثُمَّ صَلَّى رَكْعَتَيْنِ لَا يُحَدِّثُ فِيهِمَا نَفْسَهُ غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِوَعَنْ إِبْرَاهِيمَ قَالَ قَالَ صَالِحُ بْنُ كَيْسَانَ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ وَلَكِنْ عُرْوَةُ يُحَدِّثُ عَنْ حُمْرَانَ فَلَمَّا تَوَضَّأَ عُثْمَانُ قَالَ أَلَا أُحَدِّثُكُمْ حَدِيثًا لَوْلَا آيَةٌ مَا حَدَّثْتُكُمُوهُ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَتَوَضَّأُ رَجُلٌ يُحْسِنُ وُضُوءَهُ وَيُصَلِّي الصَّلَاةَ إِلَّا غُفِرَ لَهُ مَا بَيْنَهُ وَبَيْنَ الصَّلَاةِ حَتَّى يُصَلِّيَهَا قَالَ عُرْوَةُ الْآيَةَ{ إِنَّ الَّذِينَ يَكْتُمُونَ مَا أَنْزَلْنَا مِنْ الْبَيِّنَاتِ }
हमसे वर्णित है कि [अब्दुल अज़ीज़ बिन अब्दुल्लाह अल उवैसी] ने कहा, [इब्राहिम बिन साद] ने मुझे [शिहाब] से बताया कि [अता' बिन यज़ीद] ने उन्हें बताया कि [हुमरान] जो उस्मान की पूर्व पुत्री थी, ने उन्हें बताया कि उसने [उथमान बिन अफ़्फ़ान] को एक बर्तन (पानी से भरा) लाने के लिए कहते देखा था। फिर उसने इसे तीन बार अपनी हथेलियों पर डाला और दोनों को धोया, फिर उसने अपना दाहिना हाथ बर्तन में डाला और अपना मुँह धोया और पानी अपनी नाक में डाला, फिर अपना चेहरा तीन बार धोया, फिर अपने दोनों हाथों को कोहनियों तक तीन बार धोया, फिर अपना सिर मूँदा, फिर अपने दोनों पैरों को टखनों तक तीन बार धोया। उसके बाद उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "जो कोई इस तरह वुज़ू करे, फिर दो रकअत नमाज़ पढ़े और उनके बीच बात न करे, उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाएँगे।" और [इब्राहिम] ने कहा, [सालिह बिन कैसन] ने कहा, [इब्न शिहाब] ने कहा। लेकिन [उरवाह] ने [हुमरान] से रिवायत किया, "जब [उथमान] ने वुज़ू किया, तो उन्होंने कहा, "क्या मैं तुम्हें एक हदीस बताऊँ, जो अगर एक आयत न होती, तो मैं उसे न बताता? मैंने पैगंबर (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को कहते सुना: "ऐसा कोई आदमी नहीं है जो वुज़ू करे और फिर नमाज़ पढ़े, सिवाय इसके कि उसके वुज़ू और नमाज़ के बीच जो कुछ भी है वह माफ़ कर दिया जाएगा जब तक कि नमाज़ पूरी न हो जाए।" 'उरवाह ने कहा, "जिस आयत पर बात हो रही है वह है: '(बेशक, जो लोग छिपाते हैं जो हमने ज़ाहिर किया है...)' (क़ुरआन अल-फ़ित्र: 104) बक़रह: 159).
समर्थक हदीस :
इमाम अहमद : 116, 377, 393, 395, 429, 448, 452, 453, 458, 462, 485, 13291, 16439, 16676, 16723, 16752, 16806, 16807, 21208, 22490, 22594, 25556, 26225, 26266
इमाम बुखारी : 155, 159, 1798, 5953
इमाम मुस्लिम : 331, 332, 333, 334, 335, 340, 341
इमाम तिर्मिदज़ी : 50, 548
इमाम नसाई : 144, 146, 148, 151, 846, 847
इमाम इब्नु माजा : 277, 281, 462, 463, 766
इमाम मलिक : 54, 58
इमाम दरिमी : 690, 710, 711