हदीस
Tafsir An-Nashr (110);1 - pertolongan Allah dan kemenangan
Imam Muslim : 5349حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَهَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ قَالَ عَبْدٌ أَخْبَرَنَا و قَالَ الْآخَرَانِ حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ عَوْنٍ أَخْبَرَنَا أَبُو عُمَيْسٍ عَنْ عَبْدِ الْمَجِيدِ بْنِ سُهَيْلٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ قَالَ قَالَ لِي ابْنُ عَبَّاسٍ تَعْلَمُ وَقَالَ هَارُونُ تَدْرِي آخِرَ سُورَةٍ نَزَلَتْ مِنْ الْقُرْآنِ نَزَلَتْ جَمِيعًا قُلْتُ نَعَمْ إِذَا جَاءَ نَصْرُ اللَّهِ وَالْفَتْحُ قَالَ صَدَقْتَ وَفِي رِوَايَةِ ابْنِ أَبِي شَيْبَةَ تَعْلَمُ أَيُّ سُورَةٍ وَلَمْ يَقُلْ آخِرَ و حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا أَبُو عُمَيْسٍ بِهَذَا الْإِسْنَادِ مِثْلَهُ وَقَالَ آخِرَ سُورَةٍ وَقَالَ عَبْدِ الْمَجِيدِ وَلَمْ يَقُلْ ابْنِ سُهَيْلٍ
हमनी के बतवले बाड़े [अबू बकर बिन अबू स्याइबा], [हारून बिन अब्दुल्लाह] अवुरी [अब्दु बिन हुमैद], कहले बाड़े कि अब्दु: हमनी के बतवले बाड़े, जबकि कुछ लोग कहले बाड़े: हमनी के बतवले बाड़े [जफर बिन आऊन] हमनी के [अबू उमैस] से [अब्दुलमजीद बिन सुहैल] से [उबैदल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह] से कहले बाड़े: हमरा से कहले बाड़े [इब्न अब्बास]: रउआ जानत बानी -जबकि हारून अपना इतिहास में कहले रहले: का रउआ कुरान के आखिरी अक्षर समझत बानी जवन उतारल गईल रहे? हम जवाब देनी- हँ, 'अगर अल्लाह के मदद आ जीत आ गइल बा'। -अन नसर: 1- इब्न अब्बास कहले: रउआ सही कहत बानी। आ इब्न अबी स्याइबा के इतिहास में कहल गइल बा कि: रउरा त जानते बानी कि ई कवन अक्षर ह, एह में नइखे लिखल कि: अंत। हमनी के बतवले बाड़े [इशाक बिन इब्राहिम] हमनी के बतवले बाड़े [अबू मुअवियाह] हमनी के [अबू उमैस] के एह इसनाद के संगे अयीसने मतन के संगे बतवले बाड़े अवुरी उ कहले बाड़े कि: सूरह के अंत। अब्दुलमजीद कहले कि इब्न सुहैल अयीसन ना कहले।