प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 2866
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْتُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَمَا فِي بَيْتِي مِنْ شَيْءٍ يَأْكُلُهُ ذُو كَبِدٍ إِلَّا شَطْرُ شَعِيرٍ فِي رَفٍّ لِي فَأَكَلْتُ مِنْهُ حَتَّى طَالَ عَلَيَّ فَكِلْتُهُ فَفَنِيَ
हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन अबी सय्यबा] ने हमें बताया है [अबू उसामा] ने हमें [अपने पिता] से [ऐस्याह रदिअल्लाहु अन्हु] से बताया है; "(जब) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मौत हुई तो मेरे घर में कुछ भी ऐसा नहीं था जिसे ज़िंदा जानवर (इंसान या जानवर) खा सकें, सिवाय थोड़े से गेहूं के जो मेरे खाने की शेल्फ पर था, तो मैंने उसमें से कुछ खा लिया, जब तक कि कुछ समय बाद मैंने उसे तौला और वह खराब (इस्तेमाल हो गया) हो गया।"