प्रतिनिधि हदीस
इमाम मुस्लिम : 4491
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ الْمُغِيرَةِ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسٍ قَالَ انْطَلَقَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى أُمِّ أَيْمَنَ فَانْطَلَقْتُ مَعَهُ فَنَاوَلَتْهُ إِنَاءً فِيهِ شَرَابٌ قَالَ فَلَا أَدْرِي أَصَادَفَتْهُ صَائِمًا أَوْ لَمْ يُرِدْهُ فَجَعَلَتْ تَصْخَبُ عَلَيْهِ وَتَذَمَّرُ عَلَيْهِ
हमें [अबू कुरैब मुहम्मद बिन अल अ'ला] ने बताया है; हमें [अबू उसामा] ने [सुलेमान बिन अल मुगीरा] से [त्साबित] से [अनस] से बताया है उन्होंने कहा: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार उम्म आइमान के घर गए, और मैं उनके साथ गया। फिर उम्म आइमान ने उन्हें एक बर्तन दिया जिसमें पीने का पानी था। उन्होंने कहा; मुझे नहीं पता कि उम्म आइमान ने उन्हें यह तब दिया जब वह उपवास कर रहे थे या क्या वह इसे नहीं चाहते थे। फिर उम्म आइमान बड़बड़ाईं और गुस्सा हो गईं।