Imam Darimi : 141
أَخْبَرَنَا يُوسُفُ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا أَزْهَرُ عَنْ ابْنِ عَوْنٍ عَنْ ابْنِ سِيرِينَ قَالَ مَا دَامَ عَلَى الْأَثَرِ فَهُوَ عَلَى الطَّرِيقِ
हमरा सब के ई खबर आबी गेलऽ छै कि [यूसुफ बिन मूसा] न॑ [इब्न ‘आउन] स॑ [इब्न सिरीन] स॑ हमरा [अजहर] स॑ संबंध बनैल॑ छै, वू कहलकै; 'जखन धरि व्यक्ति अत्सरक रेल पर रहत ता धरि एकर मतलब अछि जे ओ सही बाट पर अछि' ।
Imam Darimi : 142
أَخْبَرَنَا أَبُو الْمُغِيرَةِ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْعُودٍ تَعَلَّمُوا الْعِلْمَ قَبْلَ أَنْ يُقْبَضَ وَقَبْضُهُ أَنْ يَذْهَبَ أَهْلُهُ أَلَا وَإِيَّاكُمْ وَالتَّنَطُّعَ وَالتَّعَمُّقَ وَالْبِدَعَ وَعَلَيْكُمْ بِالْعَتِيقِ
हमरा सब के कहलक अछि [अबू अल मुगिराह] हमरा सब के [अल `औजाई] के [याह्या बिन अबू कत्सिर] स [अबू किलाबाह] स कहलक अछि ओ कहलनि; [अब्दुल्लाह बिन मसूद] रडियाल्लाहु अनहु कहलनि; ' निरस्त होबय सँ पहिने ज्ञान सीखू। आ, विद्वान लोकनिक हत्याक तरीका सँ ज्ञान निरस्त भ' गेल छल | तेँ बिदअह, मिश्रित जीभ आ प्रायः बात बनाबय के रवैया छोड़ि दियौक आ सीमा सँ बाहर जा धरि समस्या जटिल नहि भ' जाय। आ, कोनो प्राचीन वस्तु केँ मजबूती सँ पकड़ू, अर्थात सुन्नत आ असर -मित्रक कहावत-' |
Imam Darimi : 143
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ وَأَبُو النُّعْمَانِ عَنْ حَمَّادِ بْنِ زَيْدٍ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ قَالَ قَالَ ابْنُ مَسْعُودٍ عَلَيْكُمْ بِالْعِلْمِ قَبْلَ أَنْ يُقْبَضَ وَقَبْضُهُ أَنْ يُذْهَبَ بِأَصْحَابِهِ عَلَيْكُمْ بِالْعِلْمِ فَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَا يَدْرِي مَتَى يُفْتَقَرُ إِلَيْهِ أَوْ يُفْتَقَرُ إِلَى مَا عِنْدَهُ إِنَّكُمْ سَتَجِدُونَ أَقْوَامًا يَزْعُمُونَ أَنَّهُمْ يَدْعُونَكُمْ إِلَى كِتَابِ اللَّهِ وَقَدْ نَبَذُوهُ وَرَاءَ ظُهُورِهِمْ فَعَلَيْكُمْ بِالْعِلْمِ وَإِيَّاكُمْ وَالتَّبَدُّعَ وَإِيَّاكُمْ وَالتَّنَطُّعَ وَإِيَّاكُمْ وَالتَّعَمُّقَ وَعَلَيْكُمْ بِالْعَتِيقِ
[सुलेमान बिन हरब] आ [अबू अन नु’मान] हमरा सब के [हमद बिन जैद] स [अयूब] स [अबू किलाबाह] स रिपोर्ट केने छथि ओ कहलनि; [इब्न मसूद] एक बेर कहने छलाह; 'अहाँ केँ ज्ञान छीनबा सँ पहिने सीखबाक चाही।' आ, विद्वानक मृत्युसँ ज्ञान छीन लैत अछि । अहाँ सभ केँ ज्ञान केँ प्रावधानक रूप मे करबाक चाही, कारण अहाँ सभ मे सँ कियो कहियो नहि जनैत अछि जे ओकरा कखन एकर आवश्यकता पड़तैक। सचमुच, अहाँ के एकटा एहन समुदाय भेटत जे अहाँ के कुरान में आमंत्रित करबाक दावा करैत अछि, मुदा ओ सब कुरान के अपन पीठ पाछू राखि देने अछि - कुरान के छोड़ि क -। तेँ अपना सभ केँ ज्ञान सँ सुसज्जित करू। नवीनता छोड़ू, जीह स बहस करब आ मनोवृत्ति अक्सरहां सीमा के भरपाई आ पार करब जा धरि समस्या जटिल नहि भ जायत। आ, सुन्नत आ अत्सर केँ मजबूती सँ पकड़ू'।
Imam Darimi : 144
أَخْبَرَنَا أَبُو النُّعْمَانِ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ حَازِمٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ أَنَّ رَجُلًا يُقَالُ لَهُ صَبِيغٌ قَدِمَ الْمَدِينَةَ فَجَعَلَ يَسْأَلُ عَنْ مُتَشَابِهِ الْقُرْآنِ فَأَرْسَلَ إِلَيْهِ عُمَرُ وَقَدْ أَعَدَّ لَهُ عَرَاجِينَ النَّخْلِ فَقَالَ مَنْ أَنْتَ قَالَ أَنَا عَبْدُ اللَّهِ صَبِيغٌ فَأَخَذَ عُمَرُ عُرْجُونًا مِنْ تِلْكَ الْعَرَاجِينِ فَضَرَبَهُ وَقَالَ أَنَا عَبْدُ اللَّهِ عُمَرُ فَجَعَلَ لَهُ ضَرْبًا حَتَّى دَمِيَ رَأْسُهُ فَقَالَ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ حَسْبُكَ قَدْ ذَهَبَ الَّذِي كُنْتُ أَجِدُ فِي رَأْسِي
हमरा सब के कहलक अछि [अबू अन नु'मान] हमरा सब के बता देने अछि [हम्मद बिन जैद] हमरा सब के [सुलेमान बिन यासर] स [यजीद बिन हाजिम] के कहने अछि: 'शबिग नाम के एकटा व्यक्ति छल जे मदीना शहर के दौरा करय लेल आयल छल, ओ कुरान में मुतस्याबिह आयत के बारे में पूछलक, तखन उमर रदलियाल्लाहु अनहू ओकरा फोन करय लेल -कियो- भेजने छल, आ ओ एकटा तैयार केने छल ताड़क डारि, तखन ओ पुछलनि: 'अहाँ के छी? ' ओ जवाब देलनि : 'हम अब्दुल्ला शबिग छी' तखन [उमर] रडियाल्लाहु 'अन्हू खजूरक तना ल' क' ओकरा मारि देलनि आ कहलनि: 'हम उमर नामक अल्लाहक सेवक छी'. उमर ओकरा ताबत धरि मारैत रहल जाबत धरि शबिगक माथसँ खून नहि निकलि गेलैक। तकर बाद शबिग बजलाह : 'हे अमीरुल मु`मिनिन, काफी। जे मूलतः हमर माथ मे छल - मुतस्याबिह श्लोकक प्रश्न - ओ गायब भ' गेल अछि ।
Imam Darimi : 145
أَخْبَرَنَا أَبُو الْوَلِيدِ الطَّيَالِسِيُّ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ وَيَزِيدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ عَنْ الْقَاسِمِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ تَلَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ { هُوَ الَّذِي أَنْزَلَ عَلَيْكَ الْكِتَابَ مِنْهُ آيَاتٌ مُحْكَمَاتٌ هُنَّ أُمُّ الْكِتَابِ وَأُخَرُ مُتَشَابِهَاتٌ } فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا رَأَيْتُمْ الَّذِينَ يَتَّبِعُونَ مَا تَشَابَهَ مِنْهُ فَاحْذَرُوهُمْ
हमरा सब के कहलक अछि [अबू अल वलीद अत थयालिसी] हमरा सब के [हमद बिन सलामा] आ [यजीद बिन इब्राहिम] के [अब्दुल्लाह बिन अबू अवालकाह] स [अल कासिम] स ['ऐसियाह] रदलियाहु 'अनहा स कहलक अछि; ' रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलै व सल्लम आयत पढ़लनि : 'हुवल्लादजी `अंजाला अलैकल किताबा मिन्हू `आयातुन मुहकामातुन हुन्ना उम्मूल किताबी वा उखारू मुतस्याबिहात' -ओहि छथि जे अहाँ केँ किताब - कुरान - उतारने छथि | एकरऽ सामग्री म॑ मुहकामत केरऽ आयत भी शामिल छै, जे कुरान केरऽ मुख्य सामग्री छै आरू अन्य मुतस्याबिहत आयत - प्र. अली इमरान : 7-, तखन रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'अगर अहाँ के मुताशाबिहत आयत के पालन करय वाला लोक भेटय त हुनका सं सावधान रहू'।
Imam Darimi : 146
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا حَفْصٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ شَقِيقٍ قَالَ سُئِلَ عَبْدُ اللَّهِ عَنْ شَيْءٍ فَقَالَ إِنِّي لَأَكْرَهُ أَنْ أُحِلَّ لَكَ شَيْئًا حَرَّمَهُ اللَّهُ عَلَيْكَ أَوْ أُحَرِّمَ مَا أَحَلَّهُ اللَّهُ لَكَ
हमरा सब क॑ बतैन॑ छै [अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद] न॑ हमरा सब क॑ [हफश] क॑ [अल अ’मासी] स॑ [स्याकिक] स॑ बतैन॑ छै कि हुनी कहलकै: ' [अब्दुल्लाह] स॑ एक बात के बारे म॑ पूछलऽ गेलै, तभिये हुनी कहलकै: 'हमरा सचमुच नफरत छै कि हम्में ऐन्हऽ चीज बनाबै स॑ जेकरा अल्लाह तोरा लेली जायज करी देल॑ छै, या कुछ ऐसनऽ बनाबै स॑ जेकरा अल्लाह सुब्हानल्लाहु व तआला तोरा लेली जायज करी देल॑ छै' ।
Imam Darimi : 147
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ الْفَزَارِيِّ عَنْ ابْنِ عَوْنٍ عَنْ ابْنِ سِيرِينَ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَ لَأَنْ أَرُدَّهُ بِعِيِّهِ أَحَبُّ إِلَيَّ مِنْ أَنْ أَتَكَلَّفَ لَهُ مَا لَا أَعْلَمُ
हमरा सब [मुहम्मद बिन उयैनह] स [अबू इशाक अल फजारी] स [इब्नू औन] स [इब्न सिरिन] स [हुमैद बिन अब्दुर रहमान] स रिपोर्ट केलाक बाद ओ कहला जे हमरा लेल एहन जवाब स जवाब देब जे हमरा नहि पता अछि, हमरा लेल बेसी नीक अछि, नहि कि हमरा लेल एहन जवाब देबा लेल मजबूर करब।
Imam Darimi : 148
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنِي اللَّيْثُ أَخْبَرَنِي ابْنُ عَجْلَانَ عَنْ نَافِعٍ مَوْلَى عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ صَبِيغًا الْعِرَاقِيَّ جَعَلَ يَسْأَلُ عَنْ أَشْيَاءَ مِنْ الْقُرْآنِ فِي أَجْنَادِ الْمُسْلِمِينَ حَتَّى قَدِمَ مِصْرَ فَبَعَثَ بِهِ عَمْرُو بْنُ الْعَاصِ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فَلَمَّا أَتَاهُ الرَّسُولُ بِالْكِتَابِ فَقَرَأَهُ فَقَالَ أَيْنَ الرَّجُلُ قَالَ فِي الرَّحْلِ قَالَ عُمَرُ أَبْصِرْ أَيَكُونُ ذَهَبَ فَتُصِيبَكَ مِنْهُ الْعُقُوبَةُ الْمُوجِعَةُ فَأَتَاهُ بِهِ فَقَالَ عُمَرُ تَسْأَلُ مُحْدَثَةً وَأَرْسَلَ عُمَرُ إِلَى رَطَائِبَ مِنْ جَرِيدٍ فَضَرَبَهُ بِهَا حَتَّى تَرَكَ ظَهْرَهُ دَبِرَةً ثُمَّ تَرَكَهُ حَتَّى بَرَأَ ثُمَّ عَادَ لَهُ ثُمَّ تَرَكَهُ حَتَّى بَرَأَ فَدَعَا بِهِ لِيَعُودَ لَهُ قَالَ فَقَالَ صَبِيغٌ إِنْ كُنْتَ تُرِيدُ قَتْلِي فَاقْتُلْنِي قَتْلًا جَمِيلًا وَإِنْ كُنْتَ تُرِيدُ أَنْ تُدَاوِيَنِي فَقَدْ وَاللَّهِ بَرَأْتُ فَأَذِنَ لَهُ إِلَى أَرْضِهِ وَكَتَبَ إِلَى أَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّ أَنْ لَا يُجَالِسَهُ أَحَدٌ مِنْ الْمُسْلِمِينَ فَاشْتَدَّ ذَلِكَ عَلَى الرَّجُلِ فَكَتَبَ أَبُو مُوسَى إِلَى عُمَرَ أَنْ قَدْ حَسُنَتْ تَوْبَتُهُ فَكَتَبَ عُمَرُ أَنْ ائْذَنْ لِلنَّاسِ بِمُجَالَسَتِهِ
हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुल्लाह बिन सालिह] हमरा कहलक अछि [अल लैट्स] हमरा [नाफी'] -अब्दुल्लाह के पूर्व गुलाम स [इब्नु 'अजलान] कहलक अछि-, -ओ कहलनि-: 'शबिग अल 'इराकी कुरान के संबंध में कतेको बात पूछलनि -अर्थात मुतस्याबीह आयत- मुस्लिम सैनिक सब स ता धरि पूछलनि जाबत ओ मिस्र नै आबि गेलाह, फेर 'अमर बिन अल।' 'एश रदलिअल्लाहु अनहु हुनका सब के उमर बिन खट्ठाब रडियाल्लाहु अनहु के पास पठा देलखिन | जखन दूत अमरू बिन `एश उमर के एकटा चिट्ठी पहुंचेलनि, आ उमर पढ़लनि त ओ कहलनि: 'कौन के शबिग कहल जाइत अछि? ' ओ -दूत- उत्तर देलनि : 'ओ एखनो अपन रुकबाक स्थान पर छथि', उमर रडियाल्लाहु 'अन्हू कहलनि: 'कृपया हुनका पर नजरि राखू, जँ ओ भागि जायत तखन अहाँ केँ तुरन्त कठोर सजा भेटत।' जखन शबिग एलाह त [उमर] बजलाह: ‘अहाँ किछु नव पूछने छी जे बनाओल गेल छल, तखन उमर शबिग केँ खजूरक डारि मे ल’ गेलाह। उमर खजूरक पत्तासँ ओहि आदमीकेँ ताबत धरि मारि देलक जाबत धरि ओकर पीठ घायल नहि भ’ गेलै। घाव ठीक भेला पर उमर फेर मारि देलक, आ जखन ठीक होबय लागल त उमर फेर मारि देलक। जखन ओ ठीक होबय लगलाह त उमर हुनका तुरन्त सामना करय लेल बजौलनि। तखन शबिग कहलनि: 'जँ अहाँ हमरा मारय चाहैत छी त' बस हमरा नीक तरीका सँ मारि दियौक, मुदा जँ अहाँ हमरा संग व्यवहार करय चाहैत छी तखन अल्लाह केर कसम हम ठीक भ' गेलहुँ - कुरान मे मुतस्याबीह आयत पर आओर सवाल नहि करू -. तखन ओ हुनका अपन देश वापस जेबाक अनुमति देलनि आ अबू मूसा अल `अश'री केँ एकटा चिट्ठी पठौलनि जाहि मे लिखल छलनि: 'जाहि सँ मुसलमान मे सँ कियो हुनका दोस्ती करबाक लेल नहि बजबैत हो' | एहि सँ व्यक्ति केँ कष्ट भेलैक, तखन अबू मूसा अल `अश'अरी रदलिअल्लाहु अनहू उमर रदलियाहु अनहु केँ चिट्ठी पठौलनि: 'हुनकर पश्चाताप मे सुधार भ' गेल छैक', तखन उमर रदलियाहु अनहू वापस लिखलनि: 'ओकरा लोकक संग घुलमिलबाक अनुमति दियौक'।
Imam Darimi : 149
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يُونُسَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ قَالَ سَمِعْتُ عَامِرًا يَقُولُ اسْتَفْتَى رَجُلٌ أُبَيَّ بْنَ كَعْبٍ فَقَالَ يَا أَبَا الْمُنْذِرِ مَا تَقُولُ فِي كَذَا وَكَذَا قَالَ يَا بُنَيَّ أَكَانَ الَّذِي سَأَلْتَنِي عَنْهُ قَالَ لَا قَالَ أَمَّا لَا فَأَجِّلْنِي حَتَّى يَكُونَ فَنُعَالِجَ أَنْفُسَنَا حَتَّى نُخْبِرَكَ
हमरा सब के कहलक अछि [अहमद बिन अब्दुल्लाह बिन यूनुस] हमरा सब के कहलक अछि [जुहैर] हमरा सब के कहने अछि [इस्माइल बिन अबू खालिद] ओ कहलनि: 'हम सुनने छी [अमीर] के कहैत अछि: 'कोनो [उब्बय बिन काअब] रडियाल्लाहु अनहू स फतवा मांगने अछि, पूछने अछि: 'हे अबू अल मुंडजीर, अहां के एहि आ एहि बारे में की विचार अछि? '। तखन ओ उत्तर देलनि: ' अहाँ जे पूछलहुँ से भेल अछि? ', ओ उत्तर देलनि: 'एखन धरि नहि भेल अछि'। फेर ओ फेर बजलाह: "जँ एखन धरि नहि भेल अछि त' प्रतीक्षा करू जा धरि ई वास्तव मे नहि भ' जायत, तखन हम सभ प्रयास करब आ अहाँ केँ सूचित करब."
Imam Darimi : 150
أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ حَمَّادٍ أَخْبَرَنَا أَبُو عَوَانَةَ فَأَخْبَرَنَا عَنْ فِرَاسٍ عَنْ عَامِرٍ عَنْ مَسْرُوقٍ قَالَ كُنْتُ أَمْشِي مَعَ أُبَيِّ بْنِ كَعْبٍ فَقَالَ فَتًى مَا تَقُولُ يَا عَمَّاهُ فِي كَذَا وَكَذَا قَالَ يَا ابْنَ أَخِي أَكَانَ هَذَا قَالَ لَا قَالَ فَأَعْفِنَا حَتَّى يَكُونَ
हमरा सब के सूचित केने छथि [याह्या बिन हम्मद] हमरा सब के सूचित केने छथि [अबू अवानाह] हमरा सब के [फिरस] स [अमीर] स [मसरुक] स सूचित केने छथि ओ कहलनि: 'हम एक बेर [उबय बिन का'ब] के संग चलल छलहुं आ फेर एकटा युवक पुछलक: 'हे काका, अहां के एहि मामला पर की विचार अछि? ', ओ उत्तर देलनि: ' से भेल अछि ? ', ओ - युवक - उत्तर देलक: 'एखन धरि नहि भेल अछि', ओ कहलनि: 'तखन प्रतीक्षा करू जा धरि वास्तव मे नहि भ' जायत''.
Imam Darimi : 151
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ قَالَ كَانَ إِبْرَاهِيمُ إِذَا سُئِلَ عَنْ شَيْءٍ لَمْ يُجِبْ فِيهِ إِلَّا جَوَابَ الَّذِي سُئِلَ عَنْهُ
[अब्दुल्लाह बिन सईद] न॑ हमरा [अबू उसामाह] क॑ [अल `अ'माश] स॑ बतैन॑ छै कि हुनी कहलकै: ' [इब्राहिम] स॑ जब॑ कोनो बात के बारे म॑ पूछलऽ जाय छै त॑ वू ओकरऽ जवाब नै दै छै सिवाय बात केरऽ हद तक कि पूछलऽ गेलऽ छै -केवल-' ।
Imam Darimi : 152
أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي أَيُّوبَ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي جَعْفَرٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَجْرَؤُكُمْ عَلَى الْفُتْيَا أَجْرَؤُكُمْ عَلَى النَّارِ
हमरा सब के खबर आबी गेलऽ छै कि [इब्राहिम बिन मूसा] न॑ हमरा सब क॑ [इब्न अल मुबारक] क॑ [सईद बिन अबू अयूब] स॑ [उबैदुल्लाह बिन अबू जाफर] स॑ बतैन॑ छै कि हुनी कहलकै: 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै: 'कौन फतवा जारी करै म॑ सबसें जल्दबाजी करै छै, वू छै जे सबसें जल्दी नरक म॑ जाय छै'' ।
Imam Darimi : 153
أَخْبَرَنَا أَبُو الْمُغِيرَةِ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ عَنْ عَبْدَةَ بْنِ أَبِي لُبَابَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ مَنْ أَحْدَثَ رَأْيًا لَيْسَ فِي كِتَابِ اللَّهِ وَلَمْ تَمْضِ بِهِ سُنَّةٌ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ يَدْرِ عَلَى مَا هُوَ مِنْهُ إِذَا لَقِيَ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ
हमरा सब क॑ रिपोर्ट करलऽ गेलऽ छै [अबू अल मुगिराह] न॑ हमरा सब क॑ [अल `औजाई] क॑ [अब्दाह बिन अबू लुबाबाह] स॑ [इब्न अब्बास] रदलिअल्लाहु अनहु स॑ बतैन॑ छै कि हुनी कहलकै कि जे भी अल्लाह केरऽ किताब आरू अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ रसूलुल्लाह केरऽ सुन्नत के अलावा दोसरऽ राय के आविष्कार करतै, ओकरा पता नै छै कि जब॑ वू अल्लाह स॑ मिलतै त॑ ओकरऽ हालत की होतै भविष्य मे'।
Imam Darimi : 154
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي أَيُّوبَ حَدَّثَنِي بَكْرُ بْنُ عَمْرٍو الْمَعَافِرِيُّ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ مُسْلِمِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أُفْتِيَ بِفُتْيَا مِنْ غَيْرِ ثَبْتٍ فَإِنَّمَا إِثْمُهُ عَلَى مَنْ أَفْتَاهُ
हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुल्लाह बिन यजीद] हमरा सब के कहलक अछि [सैद बिन अबू अय्यूब] हमरा [बकर बिन अमरू अल मुअफीरी] के [अबू उस्मान मुस्लिम बिन यासर] स कहलक अछि, [अबू हुरैरा] स रविअल्लाहु अनहु स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स ओ कहलनि: 'जे कियो बिना कोनो आधार के फतवा देत, ओ पाप - द फतवा के अंजाम देबाक परिणाम - फतवा देबय वाला के वहन होइत छैक' |
Imam Darimi : 155
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَحْمَدَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ أَبِي سِنَانٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ مَنْ أَفْتَى بِفُتْيَا يُعَمَّى عَلَيْهَا فَإِثْمُهَا عَلَيْهِ
हमरा सब के रिपोर्ट भेल अछि [मुहम्मद बिन अहमद] हमरा सब के [सुफयान बिन उयैनह] स [अबू सिनान] स [सैद बिन जुबैर] स [इब्न अब्बास] स अल्लाह स अल्लाह हुनका स प्रसन्न होथि, ओ कहलनि: 'जे कियो एहन फतवा देत जेकर आधार अज्ञात अछि, ओकर पाप ओकरा पर चलि जाइत अछि'।
Imam Darimi : 156
أَخْبَرَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ مَنْصُورٍ حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ الْوَلِيدِ عَنْ وُهَيْبٍ عَنْ هِشَامٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ أَنَّهُ كَانَ لَا يُفْتِي فِي الْفَرْجِ بِشَيْءٍ فِيهِ اخْتِلَافٌ
[अल हुसैन बिन मंसूर] न॑ हमरा सब क॑ [अल हुसैन बिन अल वालिद] क॑ [वहैब] स॑ [हिशाम] स॑ [मुहम्मद बिन सिरिन] स॑ सूचित करल॑ छै कि हुनी कहियो फरजी - जननांग - के मुद्दा प॑ फतवा जारी नै करलकै, जेकरा प॑ अखनी भी मतभेद छै ।
Imam Darimi : 157
أَخْبَرَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ حَدَّثَنَا الصَّلْتُ بْنُ رَاشِدٍ قَالَ سَأَلْتُ طَاوُسًا عَنْ مَسْأَلَةٍ فَقَالَ لِي كَانَ هَذَا قُلْتُ نَعَمْ قَالَ آللَّهِ قُلْتُ آللَّهِ ثُمَّ قَالَ إِنَّ أَصْحَابَنَا أَخْبَرُونَا عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ أَنَّهُ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ لَا تَعْجَلُوا بِالْبَلَاءِ قَبْلَ نُزُولِهِ فَيُذْهَبُ بِكُمْ هَا هُنَا وَهَا هُنَا فَإِنَّكُمْ إِنْ لَمْ تَعْجَلُوا بِالْبَلَاءِ قَبْلَ نُزُولِهِ لَمْ يَنْفَكَّ الْمُسْلِمُونَ أَنْ يَكُونَ فِيهِمْ مَنْ إِذَا سُئِلَ سَدَّدَ وَإِذَا قَالَ وُفِّقَ
हमरा सब के कहलक अछि [मुस्लिम बिन इब्राहिम] हमरा सब के कहलक अछि [हम्मद बिन जैद] हमरा सब के कहलक अछि [जेना कि शाल्त बिन रसीद] ओ कहलनि: 'हम [थाउस] स कोनो समस्या के बारे में पूछलहुं, फेर ओ पूछलनि: 'की समस्या भ गेल अछि? ' हम जवाब देलियनि: 'हँ, हमरा लग अछि', ओ कहलनि: 'अल्लाह सुब्हानल्लाहु व तआला', ओ कहलनि: 'हँ, अल्लाह त'अला'। तखन ओ फेर कहलनि: 'हमर सभक [मित्र] [मुअदज बिन जबल] रडियाल्लाहु अनहु सँ हमरा सभ केँ सूचित केने छथि, जे ओ कहलनि: 'हे लोक सभ, कोनो आपदा आबय सँ पहिने ओकरा अनबा मे जल्दबाजी नहि करू, कारण ई अहाँक अस्तित्व केँ एम्हर-ओम्हर मेटा देत।' आ जँ अहाँ आपदा अनबा मे जल्दबाजी नहि करब तखन मुसलमान मे बँटवारा नहि होयत, एहन लोक सदिखन रहत जे पूछला पर मार्गदर्शन देत, आ जँ कहत त' मार्गदर्शन भेटत -अल्लाह सँ-''।
Imam Darimi : 158
حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْحَكَمِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ سَأَلْتُهُ عَنْ رَجُلٍ أَدْرَكَهُ رَمَضَانَانِ فَقَالَ أَكَانَ أَوْ لَمْ يَكُنْ قَالَ لَمْ يَكُنْ بَعْدُ فَقَالَ اتْرُكْ بَلِيَّتَهُ حَتَّى تَنْزِلَ قَالَ فَدَلَسْنَا لَهُ رَجُلًا فَقَالَ قَدْ كَانَ فَقَالَ يُطْعِمُ عَنْ الْأَوَّلِ مِنْهُمَا ثَلَاثِينَ مِسْكِينًا لِكُلِّ يَوْمٍ مِسْكِينٌ
हमरा सब के कहलक अछि [बिसीर बिन अल हकम] हमरा सब के [अब्दुल अजीज बिन मुहम्मद] स [अमर बिन मैमुन] स [अपन पिता] स [इब्नु अब्बास] रदलियाल्लाहु अनहु स कहलक अछि: 'हम एक बेर हुनका स -इब्नु अब्बास रदलियाल्लाहु अनहु- स कियो एहन व्यक्ति के बारे में पूछने छलहुं जेकरा रमजान के दू महीना भेटल छल, तखन ओ कहलनि: 'की एहन भेल या नहि? ', ओ उत्तर देलनि: 'एखन धरि नहि भेल अछि'। तखन ओ कहलनि: 'जा धरि ई नहि भ' जायत ता धरि छोड़ि दियौक', ओ कहलनि: 'हमरा लोकनि ककरो -प्रस्तुत- करबाक नाटक क' क' एकर चारूकात भ' गेलहुँ, तखन ओ कहलनि: 'पहिने भ' गेल अछि', तखन -इब्नु अब्बास- उत्तर देलनि: 'ओकरा रमदलानक पहिल -महीना धरि- तीस गरीब लोक केँ खुआबय पड़तनि, सभ दिन एक-एकटा गरीब केँ''।
Imam Darimi : 159
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عِمْرَانَ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ سُلَيْمَانَ حَدَّثَنَا الْعُمَرِيُّ عَنْ عُبَيْدِ بْنِ جُرَيْجٍ قَالَ كُنْتُ أَجْلِسُ بِمَكَّةَ إِلَى ابْنِ عُمَرَ يَوْمًا وَإِلَى ابْنِ عَبَّاسٍ يَوْمًا فَمَا يَقُولُ ابْنُ عُمَرَ فِيمَا يُسْأَلُ لَا عِلْمَ لِي أَكْثَرُ مِمَّا يُفْتِي بِهِ
हमरा सब के रिपोर्ट भेल अछि [अब्दुल्लाह बिन इमरान] हमरा सब के बता देने छथि [इशक बिन सुलेमान] हमरा सब के [उबैद बिन जुरैज] स [अल उमारी] कहने छथि ओ कहलनि: 'पहिने जखन हम मक्का में छलहुं त हम सदिखन एक दिन इब्न उमर के विज्ञान के -अध्ययन में बैसल छलहुं आ दोसर दिन इब्न अब्बास के -अध्ययन में। आरू [इब्नु उमर] स॑ जब॑ पूछलऽ गेलै त॑ ई मामला प॑ फतवा दै स॑ बेसी जवाब स॑ बेसी जवाब देलकै: ‘हमरा नै पता छै’’ ।
Imam Darimi : 160
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي وَائِلٍ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ تَعَلَّمُوا فَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَا يَدْرِي مَتَى يُخْتَلُّ إِلَيْهِ
हमरा सब [मुहम्मद बिन यूसुफ] के [सुफयान] स [अल अ'मासी] स [अबू व`इल] स रिपोर्ट केने छथि ओ कहलनि: '[अब्दुल्लाह] कहलनि: 'अहाँ सब के सीखबाक चाही, कियाक त अहाँ सब में स एकटा के पता नै अछि जे ओ कखन विवाद में अछि''।