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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Darimi (الامام الدارمي) - 3469 Hadith

Hadith

Imam Darimi : 101

أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَوْنٍ عَنْ خَالِدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ عَامِرٍ عَنْ ابْنِ مَسْعُودٍ وَحُذَيْفَةَ أَنَّهُمَا كَانَا جَالِسَيْنِ فَجَاءَ رَجُلٌ فَسَأَلَهُمَا عَنْ شَيْءٍ فَقَالَ ابْنُ مَسْعُودٍ لِحُذَيْفَةَ لِأَيِّ شَيْءٍ تَرَى يَسْأَلُونِي عَنْ هَذَا قَالَ يَعْلَمُونَهُ ثُمَّ يَتْرُكُونَهُ فَأَقْبَلَ إِلَيْهِ ابْنُ مَسْعُودٍ فَقَالَ مَا سَأَلْتُمُونَا عَنْ شَيْءٍ مِنْ كِتَابِ اللَّهِ تَعَالَى نَعْلَمُهُ أَخْبَرْنَاكُمْ بِهِ أَوْ سُنَّةٍ مِنْ نَبِيِّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَخْبَرْنَاكُمْ بِهِ وَلَا طَاقَةَ لَنَا بِمَا أَحْدَثْتُمْ

[अमर इब्न औन] हमरा सब के [खालिद इब्न अब्दुल्लाह] स [अथो`] स [अमीर] स [इब्न मसूद] स आ [हुदयफाह] स जानकारी देने छथि, ओ सब एक संग बैसल छलाह आ कियो हुनका सब लग आबि कए किछु पूछलथि। इब्न मसूद खुद्जयफा स पूछलखिन: 'अहाँ के की लगैत अछि जे ओ सब एहि बारे मे कोन उद्देश्य स पूछि रहल छथि?' ओ जबाब देलखिन- ओ सभ तऽ बुझल छल मुदा तखन छोड़ि देलक। तकर बाद इब्न मसूद हुनका लग आबि कहलनि: 'अहाँ हमरा सभ सँ कोनो बात - कोनो बात - जे अल्लाह केर किताब आ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केर सुन्नत मे अछि आ हम सभ जनैत छी, हम अहाँ केँ सूचित करब, मुदा अहाँ जे आविष्कार करैत छी ताहि पर हमरा सभक कोनो अधिकार नहि अछि - बिद'आह - '।

Hadith

Imam Darimi : 102

أَخْبَرَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا الْمَسْعُودِيُّ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ مَيْسَرَةَ عَنْ النَّزَّالِ بْنِ سَبْرَةَ قَالَ مَا خَطَبَ عَبْدُ اللَّهِ خُطْبَةً بِالْكُوفَةِ إِلَّا شَهِدْتُهَا فَسَمِعْتُهُ يَوْمًا وَسُئِلَ عَنْ رَجُلٍ يُطَلِّقُ امْرَأَتَهُ ثَمَانِيَةً وَأَشْبَاهِ ذَلِكَ قَالَ هُوَ كَمَا قَالَ ثُمَّ قَالَ إِنَّ اللَّهَ أَنْزَلَ كِتَابَهُ وَبَيَّنَ بَيَانَهُ فَمَنْ أَتَى الْأَمْرَ مِنْ قِبَلِ وَجْهِهِ فَقَدْ بُيِّنَ لَهُ وَمَنْ خَالَفَ فَوَاللَّهِ مَا نُطِيقُ خِلَافَكُمْ

हमरा सब के रिपोर्ट भेल अछि [अबू नुअइम] हमरा सब के [अब्दुल मलिक बिन मैसारह] स [अब्दुल मलिक बिन मैसारह] स [अब्दुल मलिक बिन सबराह] स [अल मसौदी] के कहने छथि जे ओ कहलनि: ई [अब्दुल्लाह] नहि छलाह जे कुफा शहर में एकोटा प्रवचन देलनि जाबत हम ओहि में नै गेल रही। एक दिन हम हुनका उपदेश दैत सुनलहुँ आ हुनका सँ एहन व्यक्तिक विषय मे पूछल गेल जे हुनकर पत्नी सँ आठ बेर तलाक द' देने छल वा एहने किछु, त' ओ उत्तर देलनि: 'ओ जे कहलनि से खसि पड़ल', तखन ओ कहलनि: 'अल्लाह अपन किताब उतारि क' बुझेलनि, जे कियो हुनका सँ जे किछु भेटैत अछि, ताहि हिसाबे किछु करैत अछि, सचमुच ओकरा बुझाओल गेल अछि, मुदा जे एकर उल्लंघन करत, अल्लाह केर कसम हम सभ अहाँक गलत काज केँ स्वीकार करबा मे असमर्थ छी'।

Hadith

Imam Darimi : 103

أَخْبَرَنَا أَبُو الْوَلِيدِ الطَّيَالِسِيُّ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ أَخْبَرَنِي عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ مَيْسَرَةَ قَالَ سَمِعْتُ النَّزَّالَ بْنَ سَبْرَةَ قَالَ شَهِدْتُ عَبْدَ اللَّهِ وَأَتَاهُ رَجُلٌ وَامْرَأَةٌ فِي تَحْرِيمٍ فَقَالَ إِنَّ اللَّهَ قَدْ بَيَّنَ فَمَنْ أَتَى الْأَمْرَ مِنْ قِبَلِ وَجْهِهِ فَقَدْ بُيِّنَ وَمَنْ خَالَفَ فَوَاللَّهِ مَا نُطِيقُ خِلَافَكُمْ

हमरा सब के रिपोर्ट भेल अछि [अबू अल वालिद अथ थयालित्सी] हमरा सब के [स्यूबाह] के कहने छथि ओ कहलनि: हमरा [अब्दुल मलिक बिन मैसाराह] के रिपोर्ट केने छथि ओ कहलनि: हम सुनने छी जे [एक नज्जल बिन सबराह] कहैत छथि: हम एक बेर [अब्दुल्लाह] के गवाह बनेलहुं जखन एकटा आदमी आ एकटा महिला हुनका लग -पुछय लेल- अपन रिश्ता के मनाही के बारे में आयल छल, तखन ओ जवाब देलखिन: 'अल्लाह नीचा पठा देलखिन।' हुनक पोथी, जे कियो ओकर अनुरूप किछु करैत अछि । हुनकऽ नियम, सचमुच ओकरा साफ करी देलऽ गेलऽ छै, लेकिन जे भी एकरऽ उल्लंघन करै छै, अल्लाह के कसम हम्में तोरऽ विचलन के बोझ नै उठाय सकै छियै' ।

Hadith

Imam Darimi : 104

أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا حَفْصٌ عَنْ أَشْعَثَ عَنْ ابْنِ سِيرِينَ أَنَّهُ كَانَ لَا يَقُولُ بِرَأْيِهِ إِلَّا شَيْئًا سَمِعَهُ

हमरा सब के ई खबर आबी गेलऽ छै कि [अब्दुल्लाह बिन सईद] न॑ [इब्न सिरिन] स॑ [`अशअत] स॑ हमरा [हफश] क॑ कहल॑ छै कि हुनी कहियो अपनऽ विचार नै कहलकै सिवाय कुछ सुनलऽ बात के’ ।

Hadith

Imam Darimi : 105

أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَثَّامٌ عَنْ الْأَعْمَشِ قَالَ مَا سَمِعْتُ إِبْرَاهِيمَ يَقُولُ بِرَأْيِهِ فِي شَيْءٍ قَطُّ

हमरा सब के ई खबर आबी गेलऽ छै कि [अब्दुल्लाह बिन सईद] न॑ हमरा सब क॑ [‘अत्सम] क॑ [अल अ’मासी] स॑ कहल॑ छै कि हुनी कहलकै: ‘हम॑ कहियो [इब्राहिम] क॑ खाली अपनऽ दिमाग स॑ कुछ जवाब नै सुनल॑ छियै’ ।

Hadith

Imam Darimi : 106

أَخْبَرَنَا أَبُو النُّعْمَانِ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ قَتَادَةَ قَالَ مَا قُلْتُ بِرَأْيِي مُنْذُ ثَلَاثُونَ سَنَةً قَالَ أَبُو هِلَالٍ مُنْذُ أَرْبَعِينَ سَنَةً

हमरा सब के कहलक अछि [अबू अन नु'मान] हमरा सब के [कतादह] स [अबू अवानाह] के कहने छथि ओ कहलनि: 'तीस साल पहिने के बाद स हमरा सब के अपन विचार के संग कहियो कोनो राय नै आयल अछि। [अबू हिलाल] कहलनि: ‘चालीस वर्षक बादो’।

Hadith

Imam Darimi : 107

حَدَّثَنَا مَخْلَدُ بْنُ مَالِكٍ حَدَّثَنَا حَكَّامُ بْنُ سَلْمٍ عَنْ أَبِي خَيْثَمَةَ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ رُفَيْعٍ قَالَ سُئِلَ عَطَاءٌ عَنْ شَيْءٍ قَالَ لَا أَدْرِي قَالَ قِيلَ لَهُ أَلَا تَقُولُ فِيهَا بِرَأْيِكَ قَالَ إِنِّي أَسْتَحْيِي مِنْ اللَّهِ أَنْ يُدَانَ فِي الْأَرْضِ بِرَأْيِي

हमरा सब के कहलक अछि [मखलाद बिन मलिक] हमरा सब के [हक्कम बिन सलम] के [अबू खैतसामाह] स [अब्दुल अजीज बिन रुफाई'] स कहलक अछि ओ कहलनि: ['अथो`] स कोनो बात पूछल गेल छल, फेर ओ जवाब देलक: 'हमरा नहि पता' तखन कियो कहलक: 'अहाँ अपन विचार स एकर जवाब किएक नहि दैत छी -बस-? ', ओ जवाब देलनि: 'हमरा अल्लाह सँ लाज होइत अछि जे ओ हमर विचार केँ पृथ्वी पर मार्गदर्शक बना देलनि''..

Hadith

Imam Darimi : 108

أَخْبَرَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ أَبَانَ أَخْبَرَنِي حَاتِمٌ هُوَ ابْنُ إِسْمَعِيلَ عَنْ عِيسَى عَنْ الشَّعْبِيِّ قَالَ جَاءَهُ رَجُلٌ يَسْأَلُهُ عَنْ شَيْءٍ فَقَالَ كَانَ ابْنُ مَسْعُودٍ يَقُولُ فِيهِ كَذَا وَكَذَا قَالَ أَخْبِرْنِي أَنْتَ بِرَأْيِكَ فَقَالَ أَلَا تَعْجَبُونَ مِنْ هَذَا أَخْبَرْتُهُ عَنْ ابْنِ مَسْعُودٍ وَيَسْأَلُنِي عَنْ رَأْيِي وَدِينِي عِنْدِي آثَرُ مِنْ ذَلِكَ وَاللَّهِ لَأَنْ أَتَعَنَّى بِعَنِيَّةٍ أَحَبُّ إِلَيَّ مِنْ أَنْ أُخْبِرَكَ بِرَأْيِي

हमरा सभ केँ [इस्माइल बिन आबान] केँ सूचित केने छथि ओ कहलनि: हमरा [हातिम इब्नु इस्माइल] केँ सूचित केने छथि, [ईसा] सँ [अस स्या'बी] सँ ओ कहलनि: 'कियो हुनका लग आबि किछु पूछलनि, तखन ओ कहलनि: इब्न मसूद एहि मामला मे एना-एना कहलनि, ओ कहलनि: 'अपन विचार सँ एकटा व्याख्या करू', तखन ओ कहलनि: 'की अहाँ एहि घटना सँ आश्चर्यचकित नहि छी?, हम इब्न केँ संप्रेषित केलहुँ मसौद के विचार मुदा ओ ओकर बदला मे हमर विचार स -व्याख्या- पूछलखिन। भले ही हमरा लेल हमर धर्म अतसर -मित्रक विचार- हो। अल्लाह के कसम, हम गोबर स ढकल छी आ ऊंट के पेशाब हमरा स बेसी नीक अछि, जखन कि अहाँ सब के अपन विचार कहब।"

Hadith

Imam Darimi : 109

أَخْبَرَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ أَبَانَ حَدَّثَنَا حَاتِمٌ هُوَ ابْنُ إِسْمَعِيلَ عَنْ عِيسَى عَنْ الشَّعْبِيِّ قَالَ إِيَّاكُمْ وَالْمُقَايَسَةَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَئِنْ أَخَذْتُمْ بِالْمُقَايَسَةِ لَتُحِلُّنَّ الْحَرَامَ وَلَتُحَرِّمُنَّ الْحَلَالَ وَلَكِنْ مَا بَلَغَكُمْ عَنْ مَنْ حَفِظَ مِنْ أَصْحَابِ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَاعْمَلُوا بِهِ

हमरा सब के सूचित केने छथि [इस्माइल बिन आबान] हमरा सब के [हतिम] के [ईसा] स [अस स्या'बी] स संबंधित केने छथि ओ कहलनि: 'केवल मस्तिष्क - अनुपात - पर भरोसा क क़ियास करबा स सावधान रहू, जिनकर हाथ मे हमर आत्मा अछि, अगर अहाँ सब करब तखन अहाँ सब जे वर्जित अछि ओकरा वैध बना देब आ जे जायज अछि ओकरा मना करब, मुदा जे खबर अहाँ तक ओहि स पहुंचल अछि मुहम्मद शल्लल्लाहु 'अलैहि वसल्लम के साथी जो धर्म के जानकार हैं, कर करें' |

Hadith

Imam Darimi : 110

أَخْبَرَنَا سَعِيدُ بْنُ عَامِرٍ عَنْ ابْنِ عَوْنٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ عَنْ عَلْقَمَةَ قَالَ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى عَبْدِ اللَّهِ فَقَالَ إِنَّهُ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ الْبَارِحَةَ ثَمَانِيًا قَالَ بِكَلَامٍ وَاحِدٍ قَالَ بِكَلَامٍ وَاحِدٍ قَالَ فَيُرِيدُونَ أَنْ يُبِينُوا مِنْكَ امْرَأَتَكَ قَالَ نَعَمْ قَالَ وَجَاءَهُ رَجُلٌ فَقَالَ إِنَّهُ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ مِائَةَ طَلْقَةٍ قَالَ بِكَلَامٍ وَاحِدٍ قَالَ بِكَلَامٍ وَاحِدٍ قَالَ فَيُرِيدُونَ أَنْ يُبِينُوا مِنْكَ امْرَأَتَكَ قَالَ نَعَمْ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ مَنْ طَلَّقَ كَمَا أَمَرَهُ اللَّهُ فَقَدْ بَيَّنَ اللَّهُ الطَّلَاقَ وَمَنْ لَبَّسَ عَلَى نَفْسِهِ وَكَّلْنَا بِهِ لَبْسَهُ وَاللَّهِ لَا تُلَبِّسُونَ عَلَى أَنْفُسِكُمْ وَنَتَحَمَّلُهُ نَحْنُ هُوَ كَمَا تَقُولُونَ

हमरा सब [सैद बिन अमीर] के [इब्न औन] स [अलकामाह] स [मुहम्मद बिन सिरिन] स रिपोर्ट केने छथि ओ कहलनि: अब्दुल्ला स कियो भेंट केलथि, ओ अपन शिकायत पहुंचेलथि जे काल्हि राति मे हुनकर पत्नी स आठ बेर तलाक भ गेल छल। ओ -अब्दुल्लाह- पुछलखिन: 'एक शब्द सँ? ', व्यक्ति उत्तर देलक: 'एक शब्दक संग'। अब्दुल्ला पुछलकै: तखन ओ सभ चाहैत अछि जे अहाँ -मेन्थलक- बा`अपन पत्नी मे'?, ओ उत्तर देलनि: 'हँ, ठीके'। तखन -'अलकामा- फेर कहलक: 'आ एक बेर कियो अब्दुल्लाक ओतय गेल आ कहलक जे ओ अपन पत्नी सँ सौ बेर तलाक द' देने अछि'। अब्दुल्ला पुछलकै: 'एक शब्द सँ? ', ओ उत्तर देलनि: 'हँ, एक शब्द सँ'। तखन अब्दुल्ला पुछलखिन: 'तखन ओ सभ चाहैत छथि जे अहाँ -मेन्थलक- बा`क पत्नी मे? ', ओ उत्तर देलनि: 'हँ, से त' ठीके'। अतः [अब्दुल्लाह] कहलनि: ‘जे कियो अपन पत्नी के ओहि तरहे तलाक दैत अछि जेना अल्लाह बुझा देने छथि, अल्लाह सचमुच तलाक के व्याख्या केने छथि। मुदा जे कियो अपना बारे मे कोनो बेधड़क काज करैत अछि - एहन लापरवाह जेकर कोनो व्याख्या नहि होइत छैक - हम ओकर लापरवाही वा बेपरवाहपन ओकरा पर छोड़ि दैत छी, अल्लाह केर कसम, स्वयं कहियो बेधड़क काज नहि करू, जाहि सँ हम सभ थकित महसूस करी जेना अहाँ हमरा केँ व्यक्त केने छी।''

Hadith

Imam Darimi : 111

أَخْبَرَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ الْقَاسِمِ قَالَ لَأَنْ يَعِيشَ الرَّجُلُ جَاهِلًا بَعْدَ أَنْ يَعْلَمَ حَقَّ اللَّهِ عَلَيْهِ خَيْرٌ لَهُ مِنْ أَنْ يَقُولَ مَا لَا يَعْلَمُ

हमरा सब क॑ रिपोर्ट करलऽ गेलऽ छै [सुलेमान बिन हर्ब] न॑ हमरा सब क॑ [हम्मद बिन जैद] क॑ [यह्या बिन सईद] स॑ [अल कासिम] स॑ बतैन॑ छै कि हुनी कहलकै कि आदमी ओकरा प॑ अल्लाह केरऽ अधिकार जानला के बाद अज्ञानता म॑ रह॑ छै, ओकरा लेली ई बेहतर छै कि वू जे नै जान॑ छै, ओकरा कहै स॑ अच्छा छै’ ।

Hadith

Imam Darimi : 112

أَخْبَرَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ أَيُّوبَ قَالَ سَمِعْتُ الْقَاسِمَ يُسْأَلُ قَالَ إِنَّا وَاللَّهِ مَا نَعْلَمُ كُلَّ مَا تَسْأَلُونَ عَنْهُ وَلَوْ عَلِمْنَا مَا كَتَمْنَاكُمْ وَلَا حَلَّ لَنَا أَنْ نَكْتُمَكُمْ

हमरा सब के कहलक अछि [सुलेमान बिन हर्ब] हमरा सब के [हम्मद बिन जैद] के [अय्यूब] स कहलक अछि जे हम [अल कासिम] स पूछल गेल सुनने छी -एक बात-, ताहि लेल ओ कहलनि: 'अल्लाह के कसम हमरा सब के ओ सब किछु नहि पता अछि जे अहाँ पूछि रहल छी, आ जौं हमरा सब के पक्का पता रहैत त हम सब एकरा नै नुका देब, आ हमरा सब के लेल ई ठीक नै अछि जे हम सब एकरा अहाँ स नुकाबी'।

Hadith

Imam Darimi : 113

أَخْبَرَنَا سَعِيدُ بْنُ عَامِرٍ عَنْ ابْنِ عَوْنٍ قَالَ سُئِلَ الْقَاسِمُ عَنْ شَيْءٍ قَدْ سَمَّاهُ فَقَالَ مَا أَضْطَرُّ إِلَى مَشُورَةٍ وَمَا أَنَا مِنْ ذَا فِي شَيْءٍ

[सैद बिन अमीर] हमरा सब के [इब्न औन] स रिपोर्ट केलनि जे ओ कहलनि: 'एक बेर [अल कासिम] स कोनो एहन बात पूछल गेल छल जे ओ बतेलथि, ताहि लेल ओ जवाब देलथि: 'हमरा परामर्श करबाक जरूरत नहि अछि, आ हम एकरा कोनो दिक्कत नहि मानैत छी।'

Hadith

Imam Darimi : 114

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ عَنْ سُفْيَانَ بْنِ عُيَيْنَةَ عَنْ يَحْيَى قَالَ قُلْتُ لِلْقَاسِمِ مَا أَشَدَّ عَلَيَّ أَنْ تُسْأَلَ عَنْ الشَّيْءِ لَا يَكُونُ عِنْدَكَ وَقَدْ كَانَ أَبُوكَ إِمَامًا قَالَ إِنَّ أَشَدَّ مِنْ ذَلِكَ عِنْدَ اللَّهِ وَعِنْدَ مَنْ عَقَلَ عَنْ اللَّهِ أَنْ أُفْتِيَ بِغَيْرِ عِلْمٍ أَوْ أَرْوِيَ عَنْ غَيْرِ ثِقَةٍ

हमरा सब [मुहम्मद बिन कथिर] के [सुफयान बिन उयैनह] स [याह्या] स रिपोर्ट केलाक बाद ओ कहलनि: 'हम [अल कासिम] स कहलियनि: 'हमरा लेल कतेक कठिन होयत जौं अहाँ स कोनो बात पूछल जायत आ अहाँ के ई बात नहि बुझल होयत जखन कि अहाँक पिता इमाम छलाह? '। ओ कहलनि: 'अल्लाह आ अल्लाह के बुझनिहार के नजरि में एहि स भारी की अछि जे हम बिना कोनो ज्ञान के आधार के फतवा दैत छी या हम ओहि व्यक्ति स - हदीस - रिवायत करैत छी जेकरा पर विश्वास नै अछि''।

Hadith

Imam Darimi : 115

أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَوْنٍ أَخْبَرَنَا هُشَيْمٌ عَنْ الْعَوَّامِ عَنْ الْمُسَيَّبِ بْنِ رَافِعٍ قَالَ كَانُوا إِذَا نَزَلَتْ بِهِمْ قَضِيَّةٌ لَيْسَ فِيهَا مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَثَرٌ اجْتَمَعُوا لَهَا وَأَجْمَعُوا فَالْحَقُّ فِيمَا رَأَوْا فَالْحَقُّ فِيمَا رَأَوْا أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ أَخْبَرَنَا يَزِيدُ عَنْ الْعَوَّامِ بِهَذَا

हमरा सब के रिपोर्ट कयल गेल अछि [अमर बिन औन] हमरा सब के [हुसैम] के [अल अववाम] स [अल मुसैयब बिन रफी’ स रिपोर्ट केने छथि] ओ कहलनि: 'पहिने ओ सब - साथी सब के - अगर हुनका सब के अपना संग कोनो समस्या भेट गेल छल जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वस्ल्लम स कोनो अत्सार नै छल, त ओ सब तुरंत एहि पर चर्चा करय लेल जमा भ गेलाह, तखन ओ सब की पर सहमत भ गेलाह कोन तरहक सत्य पर दुनू गोटे मिलिकय सहमत छलाह, एतेक धरि जे कोन तरहक सत्य पर दुनू गोटे सहमत छलाह। संग मे'। [अब्दुल्लाह] हमरा सब के रिपोर्ट केलनि, [यजीद] हमरा सब के रिपोर्ट केलनि, [अल अव्वाम] स, एहने संपादकीय के संग।

Hadith

Imam Darimi : 116

أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ حَسَّانَ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُبَارَكِ قَالَا حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ الْحِمْصِيُّ أَنَّ وَهْبَ بْنَ عَمْرٍو الْجُمَحِيَّ حَدَّثَهُ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَعْجَلُوا بِالْبَلِيَّةِ قَبْلَ نُزُولِهَا فَإِنَّكُمْ إِنْ لَا تَعْجَلُوهَا قَبْلَ نُزُولِهَا لَا يَنْفَكُّ الْمُسْلِمُونَ وَفِيهِمْ إِذَا هِيَ نَزَلَتْ مَنْ إِذَا قَالَ وُفِّقَ وَسُدِّدَ وَإِنَّكُمْ إِنْ تَعْجَلُوهَا تَخْتَلِفْ بِكُمْ الْأَهْوَاءُ فَتَأْخُذُوا هَكَذَا وَهَكَذَا وَأَشَارَ بَيْنَ يَدَيْهِ وَعَنْ يَمِينِهِ وَعَنْ شِمَالِهِ

हमरा सभकेँ [याह्या बिन हसन] आ [मुहम्मद बिन अल मुबारक] कहलक अछि: हमरा सभकेँ [याह्या बिन हमजाह] हमरा सभकेँ [अबू सलामा अल हिमशी] कहि देने अछि जे [वहब बिन अमर अल जुमाही] हुनका कहने छथि: ‘नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: ‘ओह होबासँ पहिने मुसीबत माँगबामे जल्दबाजी नहि करू, कारण जँ अहाँ परीक्षा माँगय मे जल्दबाजी नहि करू, मुसलमान मे बँटवारा नहि होयत, आ जँ कोनो आपदा आबि जायत त' किछु एहनो छथि जे जँ बजताह त' मार्गदर्शन देल जायत आ सही बाट पर मार्गदर्शन कयल जायत, दोसर दिस, जँ अहाँ परीक्षा मँगबाक जल्दी मे छी त' अहाँक इच्छा अलग-अलग होयत. तखन अहाँ सभ मे सँ प्रत्येक फल्लाँ-फल्लाह मनोवृत्ति लैत छी'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओहि समय सामने, दाहिना आ बामा के बीच इशारा करैत | -एकर अर्थ होइत छैक; हुनकर मनोवृत्ति ओतबे अराजक छल जतेक ओ अव्यवस्थित दिशा देखबैत छलाह-.

Hadith

Imam Darimi : 117

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُبَارَكِ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو سَلَمَةَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سُئِلَ عَنْ الْأَمْرِ يَحْدُثُ لَيْسَ فِي كِتَابٍ وَلَا سُنَّةٍ فَقَالَ يَنْظُرُ فِيهِ الْعَابِدُونَ مِنْ الْمُؤْمِنِينَ

हमरा सब क॑ ई रिपोर्ट करलऽ गेलऽ छै [मुहम्मद बिन अल मुबारक] न॑ हमरा [याह्या बिन हमजाह] क॑ बतैन॑ छै कि हुनी कहलकै: हमरा [अबू सलामाह] क॑ बतैलकै: 'जब॑ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ कुछ ऐसनऽ बात के बारे म॑ पूछलऽ गेलै जे होतै लेकिन किताब -कुरान- आरू सुन्नत म॑ नै छै, त॑ हुनी जवाब देलकै: '-ईमानदारऽ के बीच स॑ इबादत विशेषज्ञऽ क॑ ई मामला प॑ चर्चा करै के चाही'' ।

Hadith

Imam Darimi : 118

أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ مُعَاذٍ عَنْ ابْنِ عَوْنٍ قَالَ قَالَ الْقَاسِمُ إِنَّكُمْ لَتَسْأَلُونَا عَنْ أَشْيَاءَ مَا كُنَّا نَسْأَلُ عَنْهَا وَتُنَقِّرُونَ عَنْ أَشْيَاءَ مَا كُنَّا نُنَقِّرُ عَنْهَا وَتَسْأَلُونَ عَنْ أَشْيَاءَ مَا أَدْرِي مَا هِيَ وَلَوْ عَلِمْنَاهَا مَا حَلَّ لَنَا أَنْ نَكْتُمَكُمُوهَا

हमरा सब के रिपोर्ट भेल अछि [अहमद बिन अब्दुल्लाह] हमरा सब के [मुअदज बिन मुअदज] [इब्न औन] स कहने छथि ओ कहलनि: [अल कासिम] कहलनि: ‘अहाँ किछु एहन बात के बारे में पूछैत छी जे हम सब पहिने नहि पूछने रही, आ अहाँ सब एहन चीज के खोजैत छी जे हम सब पहिने नहि तकने रही, आ अहाँ किछु एहन बात के बारे में पूछैत छी जे हम स्वयं नहि जनैत छी, जौं हमरा सब के पता रहैत तखन हमरा सब के नुकाब उचित नहि होयत हुनकर।

Hadith

Imam Darimi : 119

أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنِي اللَّيْثُ حَدَّثَنِي يَزِيدُ هُوَ ابْنُ أَبِي حَبِيبٍ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْأَشَجِّ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَ إِنَّهُ سَيَأْتِي نَاسٌ يُجَادِلُونَكُمْ بِشُبُهَاتِ الْقُرْآنِ فَخُذُوهُمْ بِالسُّنَنِ فَإِنَّ أَصْحَابَ السُّنَنِ أَعْلَمُ بِكِتَابِ اللَّهِ

हमरा सब के रिपोर्ट भेल अछि [अब्दुल्लाह बिन सालिह] हमरा कहने छथि [अल लैट्स] हमरा [यजीद बिन अबू हबीब] के [उमर बिन अल `अस्यज] स कहने छथि जे [उमर बिन खट्ठाब] कहलनि: 'ओतय लोक आओत जे कुरान के मुतस्याबीह आयत स अहाँ सब स बहस करत।' त हुनका सब स सुन्नत स निपटू। सचमुच सुन्नत के पालन करय वाला लोक कुरान के सामग्री के बेसी नीक सं जनैत छथिन्ह.

Hadith

Imam Darimi : 120

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُيَيْنَةَ حَدَّثَنَا عَلِيٌّ هُوَ ابْنُ مُسْهِرٍ عَنْ هِشَامٍ هُوَ ابْنُ عُرْوَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ نَوْفَلٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ قَالَ مَا زَالَ أَمْرُ بَنِي إِسْرَائِيلَ مُعْتَدِلًا لَيْسَ فِيهِ شَيْءٌ حَتَّى نَشَأَ فِيهِمْ الْمُوَلَّدُونَ أَبْنَاءُ سَبَايَا الْأُمَمِ أَبْنَاءُ النِّسَاءِ الَّتِي سَبَتْ بَنُو إِسْرَائِيلَ مِنْ غَيْرِهِمْ فَقَالُوا فِيهِمْ بِالرَّأْيِ فَأَضَلُّوهُمْ

हमरा सब के रिपोर्ट भेल अछि [मुहम्मद बिन उयैनह] हमरा सब के [अली इब्न मुशीर] स, [हिस्यम इब्न उर्वाह] स, [मुहम्मद बिन अब्दुर रहमान बिन नौफल] स ['उरवाह बिन अज जुबैर] स कहलक अछि: 'शुरुआत में इजरायल के संतान के स्थिति सामान्य छल आ कोनो समस्या नै छल -ओ सब एखनो धार्मिक शिक्षा के पालन करैत छल-, जाबत तक... समय जखन बंदी महिलाक संतान उर्फ बंदी महिलाक संतानक जन्म होइत छल | इस्राएल केरऽ संतान द्वारा -अपनऽ शत्रु- स॑ कैद करलऽ गेलऽ छेलै, तखनिये वू अपनऽ-अपनऽ काम -अपनऽ धर्म- के बारे म॑ अपनऽ मात्र बुद्धि स॑ प्रचार करलकै, जेकरा स॑ ओकरा -इस्राएल केरऽ दोसरऽ संतान- के गुमराह करी देलकै ।'