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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
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इमाम मलिक (الامام مالك) - 1594 हदीस

रसूलुल्लाह शालल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ईशा की नमाज़ में वॉट-टिन वाज़ायतुन पढ़ा

इमाम मलिक : 161

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ عَدِيِّ بْنِ ثَابِتٍ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ أَنَّهُ قَالَصَلَّيْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْعِشَاءَ فَقَرَأَ فِيهَا بِالتِّينِ وَالزَّيْتُونِ

मलिक ने मुझे बताया है कि [याह्या बिन सईद] से ['अदी बिन साबित अल अंसारी] से [अल बर्रा बिन 'अजीब] ने कहा; "मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ इशा की नमाज़ पढ़ी, उन्होंने पढ़ा: वत्तिइन वज़्ज़ैतुन (अंजीर के लिए और जैतून के लिए)।"

रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रेशम, सोना पहनने और रुकूकिंग के दौरान कुरान पढ़ने पर रोक लगा दी है।

इमाम मलिक : 162

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ حُنَيْنٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ لُبْسِ الْقَسِّيِّ وَعَنْ تَخَتُّمِ الذَّهَبِ وَعَنْ قِرَاءَةِ الْقُرْآنِ فِي الرُّكُوعِ

याह्या ने मुझे मलिक से [नफी] से [इब्राहिम बिन अब्दुल्लाह बिन हुनैन] से [अपने पिता] से [अली बिन अबू थलीब] से बताया कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रेशम पहनने, सोने की अंगूठी पहनने और रुकू करते हुए कुरान पढ़ने से मना किया है।

रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अन्य लोगों को परेशान करने के उद्देश्य से नमाज के दौरान जोर-जोर से पढ़ने पर रोक लगा दी है।

इमाम मलिक : 163

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ الْحَارِثِ التَّيْمِيِّ عَنْ أَبِي حَازِمٍ التَّمَّارِ عَنْ الْبَيَاضِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَرَجَ عَلَى النَّاسِ وَهُمْ يُصَلُّونَ وَقَدْ عَلَتْ أَصْوَاتُهُمْ بِالْقِرَاءَةِ فَقَالَ إِنَّ الْمُصَلِّيَ يُنَاجِي رَبَّهُ فَلْيَنْظُرْ بِمَا يُنَاجِيهِ بِهِ وَلَا يَجْهَرْ بَعْضُكُمْ عَلَى بَعْضٍ بِالْقُرْآنِ

मुझे मलिक से, याह्या बिन सईद से, मुहम्मद बिन इब्राहिम बिन अल हारिस अत तैमी से, अबू हज़म अत तम्मार से, अल बयादली से बताया गया है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) लोगों से मिले जब वे नमाज़ पढ़ रहे थे। वे ज़ोर से पढ़ रहे थे, तो उन्होंने कहा: "सच में, जो नमाज़ पढ़ता है वह अपने रब को पुकार रहा है, तो देखो वह क्या फुसफुसाता है। तुम में से कुछ लोग दूसरों पर ज़ोर से न पढ़ें!"

प्रार्थना की शुरुआत में बासमला न पढ़ें

इमाम मलिक : 164

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّهُ قَالَقُمْتُ وَرَاءَ أَبِي بَكْرٍ وَعُمَرَ وَعُثْمَانَ فَكُلُّهُمْ كَانَ لَا يَقْرَأُ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ إِذَا افْتَتَحَ الصَّلَاةَ

मुझे मलिक (हुमैद अत ताविल) से [अनस बिन मलिक] ने बताया कि उन्होंने कहा; "मैंने एक बार [अबू बक्र], [उमर] और [उथमान] के पीछे नमाज़ पढ़ी, वे सभी नमाज़ शुरू करते समय बिस्मिल्लाहि अर-रहमान अर-रहीम नहीं पढ़ रहे थे।"

उमर बिन खत्ताब ने अबू जाहम के घर पर कुरान पढ़ा

इमाम मलिक : 165

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَمِّهِ أَبِي سُهَيْلِ بْنِ مَالِكٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ قَالَكُنَّا نَسْمَعُ قِرَاءَةَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ عِنْدَ دَارِ أَبِي جَهْمٍ بِالْبَلَاطِ

मलिक ने मुझे अपने चाचा [अबू सुहैल बिन मलिक] से [अपने पिता] से बताया था; "मैंने बलात में अबू जहम के घर पर [उमर बिन खत्ताब] की रीडिंग सुनी।"

अब्दुल्ला बिन उमर ने सामूहिक प्रार्थना के दौरान छूटी हुई रकअत को जोर से पढ़ा

इमाम मलिक : 166

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ إِذَا فَاتَهُ شَيْءٌ مِنْ الصَّلَاةِ مَعَ الْإِمَامِ فِيمَا جَهَرَ فِيهِ الْإِمَامُ بِالْقِرَاءَةِ أَنَّهُ إِذَا سَلَّمَ الْإِمَامُ قَامَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ فَقَرَأَ لِنَفْسِهِ فِيمَا يَقْضِي وَجَهَرَ

मुझे मलिक (नफी) से बताया गया है कि अगर अब्दुल्लाह बिन उमर इमाम से कुछ रकात में पीछे रह जाते हैं, तो जब इमाम उन्हें सलाम करते हैं, तो वह खड़े हो जाते हैं और बाकी रकात खुद भी थोड़ी ज़ोर से पढ़कर पढ़ते हैं।

नफ़ी बिन जुबैर ने प्रार्थना के दौरान पढ़ने में सुधार का संकेत दिया

इमाम मलिक : 167

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَزِيدَ بْنِ رُومَانَ أَنَّهُ قَالَ كُنْتُ أَؤُصَلِّ إِلَى جَانِبِ نَافِعِ بْنِ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍفَيَغْمِزُنِي فَأَفْتَحُ عَلَيْهِ وَنَحْنُ نُصَلِّي

मलिक ने मुझे बताया कि [यज़ीद बिन रुमान] ने कहा; "मैंने [नफ़ी बिन जुबैर बिन मुथिम] के बगल में नमाज़ पढ़ी। उन्होंने मुझे इशारा किया (ताकि मैं उनकी रीडिंग ठीक करूँ)। मैंने भी उनकी रीडिंग ठीक की, हालाँकि हम नमाज़ पढ़ रहे थे।"

अबू बकर सुबह की प्रार्थना में सूरह अल-बकराह पढ़ते हैं

इमाम मलिक : 168

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ الصِّدِّيقَصَلَّى الصُّبْحَ فَقَرَأَ فِيهَا سُورَةَ الْبَقَرَةِ فِي الرَّكْعَتَيْنِ كِلْتَيْهِمَا

याह्या ने मुझे मलिक हिशाम इब्न उरवाह के पिता से बताया कि अबू बक्र अस-सिद्दीक ने सुबह की नमाज़ पढ़ी और दो रकात में सूरह अल-बक़रा पढ़ी।

उमर बिन खत्ताब ने सुबह की प्रार्थना में यूसुफ और अल-हज्ज को पत्र पढ़ा

इमाम मलिक : 169

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ سَمِعَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَامِرِ بْنِ رَبِيعَةَ يَقُولُصَلَّيْنَا وَرَاءَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ الصُّبْحَ فَقَرَأَ فِيهَا بِسُورَةِ يُوسُفَ وَسُورَةِ الْحَجِّ قِرَاءَةً بَطِيئَةً فَقُلْتُ وَاللَّهِ إِذًا لَقَدْ كَانَ يَقُومُ حِينَ يَطْلُعُ الْفَجْرُ قَالَ أَجَلْ

मलिक ने मुझे [हिस्याम बिन उरवाह] से [अपने पिता] से बताया कि उसने [अब्दुल्ला बिन 'अमीर बिन रबी'आ] को यह कहते सुना; "हमने सुबह [उमर बिन खत्ताब] के पीछे नमाज़ पढ़ी। उसने सूरह यूसुफ़ और सूरह अल हज धीरे-धीरे पढ़ी।" मैंने कहा; "अल्लाह की कसम, फिर वह तब तक नमाज़ पढ़ता रहा जब तक सुबह नहीं हो गई।" अब्दुल्ला बिन 'अमीर ने जवाब दिया; "सही।"

उतसमान बिन अफ्फान ने सुबह की प्रार्थना में यूसुफ का पत्र दोहराया

इमाम मलिक : 170

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ وَرَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ أَنَّ الْفُرَافِصَةَ بْنَ عُمَيْرٍ الْحَنَفِيَّ قَالَمَا أَخَذْتُ سُورَةَ يُوسُفَ إِلَّا مِنْ قِرَاءَةِ عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ إِيَّاهَا فِي الصُّبْحِ مِنْ كَثْرَةِ مَا كَانَ يُرَدِّدُهَا لَنَا

मुझे मलिक (याह्या बिन सईद) और रबीआ बिन अबू अब्दुर्रहमान (अल कासिम बिन मुहम्मद) ने बताया कि फुरफिशाह बिन उमैर अल हनफी ने कहा, "मैंने सूरह यूसुफ को उस्मान बिन अफ्फान के सुबह की नमाज़ में पढ़े जाने के अलावा याद नहीं किया, क्योंकि वह इसे बार-बार दोहराते थे।"

अब्दुल्लाह बिन उमर ने सुबह की नमाज़ में 10 सूरत अल-मुफ़श्शाल पढ़ी

इमाम मलिक : 171

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ يَقْرَأُ فِي الصُّبْحِ فِي السَّفَرِ بِالْعَشْرِ السُّوَرِ الْأُوَلِ مِنْ الْمُفَصَّلِ فِي كُلِّ رَكْعَةٍ بِأُمِّ الْقُرْآنِ وَسُورَةٍ

मलिक (नफी) ने मुझे बताया कि सुबह की नमाज़ के लिए जाते समय, अब्दुल्लाह बिन उमर ने मुफ़श्शाल के पहले दस अध्याय पढ़े। और हर रकअत में उन्होंने फ़ातिहा और एक अध्याय पढ़ा।

उबे बिन काब को रसूलल्लाह शल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सूरह अल-फातिहा के बारे में सिखाया था

इमाम मलिक : 172

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَعْقُوبَ أَنَّ أَبَا سَعِيدٍ مَوْلَى عَامِرِ بْنِ كُرَيْزٍ أَخْبَرَهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَادَى أُبَيَّ بْنَ كَعْبٍ وَهُوَ يُصَلِّي فَلَمَّا فَرَغَ مِنْ صَلَاتِهِ لَحِقَهُ فَوَضَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدَهُ عَلَى يَدِهِ وَهُوَ يُرِيدُ أَنْ يَخْرُجَ مِنْ بَابِ الْمَسْجِدِ فَقَالَ إِنِّي لَأَرْجُو أَنْ لَا تَخْرُجَ مِنْ الْمَسْجِدِ حَتَّى تَعْلَمَ سُورَةً مَا أَنْزَلَ اللَّهُ فِي التَّوْرَاةِ وَلَا فِي الْإِنْجِيلِ وَلَا فِي الْقُرْآنِ مِثْلَهَا قَالَ أُبَيٌّ فَجَعَلْتُ أُبْطِئُ فِي الْمَشْيِ رَجَاءَ ذَلِكَ ثُمَّ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ السُّورَةَ الَّتِي وَعَدْتَنِي قَالَ كَيْفَ تَقْرَأُ إِذَا افْتَتَحْتَ الصَّلَاةَ قَالَ فَقَرَأْتُ الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ حَتَّى أَتَيْتُ عَلَى آخِرِهَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هِيَ هَذِهِ السُّورَةُ وَهِيَ السَّبْعُ الْمَثَانِي وَالْقُرْآنُ الْعَظِيمُ الَّذِي أُعْطِيتُ

याह्या ने मुझे मलिक [अल अला बिन अब्दुर्रहमान बिन याकूब] से बताया कि [अबू सईद], जो अमीर बिन कुरैज़ का पूर्व गुलाम था, ने उसे सूचित किया कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने उबै बिन काब को बुलाया जो नमाज़ पढ़ रहा था। जब उसने नमाज़ पढ़ ली, तो वह उसके पीछे गया। जब वह मस्जिद के दरवाजे से बाहर निकलने वाला था, तो उसने उबै बिन काब का हाथ पकड़ लिया। उसने कहा: "मुझे उम्मीद है कि तुम अभी बाहर नहीं आओगे, जब तक कि तुम कोई ऐसा पत्र न सुन लो जो अल्लाह ने तौरात, बाइबिल या कुरान में इसके जैसा न भेजा हो।" उबै बिन काब ने कहा; "मैंने इसकी उम्मीद में अपना चलना धीमा कर दिया। फिर मैंने पूछा; "अल्लाह के रसूल, वह पत्र कहाँ है जिसका आपने मुझसे वादा किया था?" अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन अंत तक।" रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "यह वह अक्षर है जो अस सबु अल मत्सानी और महान कुरान है जो मुझे दिया गया था।"

प्रार्थना में अल-फातिहा पढ़ना

इमाम मलिक : 173

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي نُعَيْمٍ وَهْبِ بْنِ كَيْسَانَ أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِيَقُولُ مَنْ صَلَّى رَكْعَةً لَمْ يَقْرَأْ فِيهَا بِأُمِّ الْقُرْآنِ فَلَمْ يُصَلِّ إِلَّا وَرَاءَ الْإِمَامِ

मलिक ने मुझे [अबू नुआइम वहाब बिन कैसन] से बताया कि उन्होंने [जाबिर बिन अब्दुल्ला] को यह कहते सुना; "जो कोई उम्मुल कुरान (अल फातिहा) पढ़े बिना एक रकअत नमाज़ पढ़े, तो उसे इमाम के पीछे के अलावा नमाज़ नहीं पढ़नी चाहिए।"

अल-फातिहा पढ़ने के फायदे

इमाम मलिक : 174

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَعْقُوبَ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا السَّائِبِ مَوْلَى هِشَامِ بْنِ زُهْرَةَ يَقُولُ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ صَلَّى صَلَاةً لَمْ يَقْرَأْ فِيهَا بِأُمِّ الْقُرْآنِ فَهِيَ خِدَاجٌ هِيَ خِدَاجٌ هِيَ خِدَاجٌ غَيْرُ تَمَامٍ قَالَ فَقُلْتُ يَا أَبَا هُرَيْرَةَ إِنِّي أَحْيَانًا أَكُونُ وَرَاءَ الْإِمَامِ قَالَ فَغَمَزَ ذِرَاعِي ثُمَّ قَالَ اقْرَأْ بِهَا فِي نَفْسِكَ يَا فَارِسِيُّ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ قَالَ اللَّهُ تَبَارَكَ وَتَعَالَى قَسَمْتُ الصَّلَاةَ بَيْنِي وَبَيْنَ عَبْدِي نِصْفَيْنِ فَنِصْفُهَا لِي وَنِصْفُهَا لِعَبْدِي وَلِعَبْدِي مَا سَأَلَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اقْرَءُوا يَقُولُ الْعَبْدُ{ الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ }يَقُولُ اللَّهُ تَبَارَكَ وَتَعَالَى حَمِدَنِي عَبْدِي وَيَقُولُ الْعَبْدُ{ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ }يَقُولُ اللَّهُ أَثْنَى عَلَيَّ عَبْدِي وَيَقُولُ الْعَبْدُ{ مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ }يَقُولُ اللَّهُ مَجَّدَنِي عَبْدِي يَقُولُ الْعَبْدُ{ إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ }فَهَذِهِ الْآيَةُ بَيْنِي وَبَيْنَ عَبْدِي وَلِعَبْدِي مَا سَأَلَ يَقُولُ الْعَبْدُ{ اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ }فَهَؤُلَاءِ لِعَبْدِي وَلِعَبْدِي مَا سَأَلَ

याह्या ने मुझे मालिक [अल 'अला बिन अब्दुर्रहमान बिन याकूब] से वर्णित किया कि उसने हिशाम बिन ज़ुहरा के पूर्व दास [अबू अस सईद] को यह कहते हुए सुना; मैंने [अबू हुरैरा] को कहते सुना, "मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कहते सुना: "जो कोई नमाज़ पढ़ता है लेकिन उसमें उम्मुल कुरान (अल फातिहा) नहीं पढ़ता, तो उसकी नमाज़ में कमी है, उसकी नमाज़ में कमी है, उसकी नमाज़ काफ़ी नहीं है और अधूरी है।" अबू अस सायब ने कहा, "फिर मैंने कहा, "ऐ अबू हुरैरा, मैं कभी-कभी इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ता हूँ," अबू अस सायब ने कहा, "अबू हुरैरा ने तुरंत मेरा हाथ पकड़ा और कहा, "इसे अपने दिल में पढ़ो, ऐ फ़ारसी लोगों," क्योंकि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कहते सुना था: "अल्लाह तबारक व तआला ने कहा, 'मैं अपने और अपने सेवक के बीच दो हिस्सों में बाँटता हूँ, आधा मेरे लिए और दूसरा आधा मेरे सेवक के लिए, और मेरे सेवक के लिए जो वह माँगता है।' रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "पढ़ो: ALHAMDU LILLAHI RABBIL 'AALAMIIN. अल्लाह तबारक व तआला ने कहा; 'मेरे बंदे ने मेरी तारीफ़ की है'. अगर कोई बंदा पढ़े; AR-RAHMAANIR RAHIIM. अल्लाह तबारक व तआला ने कहा; 'मेरे बंदे ने मेरी तारीफ़ की है.' अगर कोई बंदा पढ़े; MALIKI YAUMIDDIIN. अल्लाह कहते हैं; 'मेरे बंदे ने मेरी तारीफ़ की है'. यह आयत मेरे और मेरे बंदे के बीच है, और उसके लिए वही है जो वह मांगता है. अगर कोई बंदा कहे, 'IHDINAS SHIRAATHAL MUSTAQIIM, SHIRAATHAL LADZIINA AN'AMTA 'ALAIHIM GHAIRIL MAGHDLUUBI 'ALAIHIM WALAD DLAALLIIN', यह मेरे बंदे के लिए है और उसके लिए वही है जो वह मांगता है.'

उरवाह बिन अज़-ज़ुबैर उन प्रार्थनाओं में पुजारी के पीछे पढ़ते हैं जिन्हें ज़ोर से नहीं पढ़ा जाता

इमाम मलिक : 175

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ كَانَ يَقْرَأُ خَلْفَ الْإِمَامِ فِيمَا لَا يَجْهَرُ فِيهِ الْإِمَامُ بِالْقِرَاءَةِ

मुझे मालिक [हिशाम बिन उरवाह] से [उनके पिता] से वर्णित किया गया है, कि वह नमाज़ में इमाम के पीछे पढ़ते थे, जिसकी तिलावत इमाम द्वारा ज़ोर से नहीं पढ़ी जाती थी।"

अल-कासिम बिन मुहम्मद नमाज़ के दौरान इमाम के पीछे पढ़ते हैं, जिसे ज़ोर से नहीं पढ़ा जाता

इमाम मलिक : 176

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ وَعَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍكَانَ يَقْرَأُ خَلْفَ الْإِمَامِ فِيمَا لَا يَجْهَرُ فِيهِ الْإِمَامُ بِالْقِرَاءَةِ

मुझे मलिक [याह्या बिन सईद] से [रबीआ बिन अबू अब्दुर्रहमान] से रिवायत है कि [अल कासिम बिन मुहम्मद] उन नमाज़ों में इमाम के पीछे तिलावत करते थे, जिनमें इमाम ज़ोर से तिलावत नहीं करते थे।

नफी बिन जुबैर उन नमाज़ों में इमाम के पीछे पढ़ते हैं जिन्हें ज़ोर से नहीं पढ़ा जाता

इमाम मलिक : 177

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَزِيدَ بْنِ رُومَانَ أَنَّ نَافِعَ بْنَ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍكَانَ يَقْرَأُ خَلْفَ الْإِمَامِ فِيمَا لَا يَجْهَرُ فِيهِ بِالْقِرَاءَةِقَالَ مَالِك وَذَلِكَ أَحَبُّ مَا سَمِعْتُ إِلَيَّ فِي ذَلِكَ

मलिक ने मुझे [यज़ीद बिन रुमान] से बताया कि [नफ़ी बिन जुबैर बिन मुस्तिम], उन्होंने इमाम के पीछे पढ़ा, जो इमाम ने नहीं पढ़ा।" मलिक ने कहा; "मैंने जो सुना है, उसमें मुझे यही सबसे ज़्यादा पसंद है।"

अब्दुल्लाह बिन उमर ने इमाम के पीछे पढ़ने के बारे में सवालों के जवाब दिए

इमाम मलिक : 178

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ إِذَا سُئِلَ هَلْ يَقْرَأُ أَحَدٌ خَلْفَ الْإِمَامِ قَالَ إِذَا صَلَّى أَحَدُكُمْ خَلْفَ الْإِمَامِ فَحَسْبُهُ قِرَاءَةُ الْإِمَامِ وَإِذَا صَلَّى وَحْدَهُ فَلْيَقْرَأْقَالَ وَكَانَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ لَا يَقْرَأُ خَلْفَ الْإِمَامِ

मुझे याह्या ने मलिक से [नफी'] बताया है कि [अब्दुल्ला बिन उमर] से जब पूछा गया, "क्या कोई इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ता है?" तो उन्होंने जवाब दिया, "अगर तुम में से कोई इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ता है, तो इमाम का पढ़ना उसके लिए काफ़ी है। अगर वह अकेले नमाज़ पढ़ता है, तो उसे पढ़ने दो।" नफी' ने कहा; "अब्दुल्ला बिन उमर ने इमाम के पीछे (अल फ़ातिहा) नहीं पढ़ी।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने लोगों को सामूहिक प्रार्थना के दौरान कुरान पढ़ने की सलाह दी

इमाम मलिक : 179

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ ابْنِ أُكَيْمَةَ اللَّيْثِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ انْصَرَفَ مِنْ صَلَاةٍ جَهَرَ فِيهَا بِالْقِرَاءَةِ فَقَالَ هَلْ قَرَأَ مَعِي مِنْكُمْ أَحَدٌ آنِفًا فَقَالَ رَجُلٌ نَعَمْ أَنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي أَقُولُ مَا لِي أُنَازَعُ الْقُرْآنَ فَانْتَهَى النَّاسُ عَنْ الْقِرَاءَةِ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِيمَا جَهَرَ فِيهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالْقِرَاءَةِ حِينَ سَمِعُوا ذَلِكَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

मुझे याह्या ने मलिक से [इब्नु शिहाब] से [इब्नु उकैमा अल लैतसी] से [अबू हुरैरा] से बताया है कि जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नमाज़ खत्म की तो उन्होंने उसे ज़ोर से पढ़ा। उन्होंने कहा: "क्या तुम में से किसी ने मेरे साथ पढ़ा?" एक आदमी था जिसने जवाब दिया, "मैं हूँ, अल्लाह के रसूल!" अबू हुरैरा ने कहा, "रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मैंने कहा (हैरानी हुई) कि कुरान पढ़ते समय मैं परेशान क्यों हो रहा था!'

पुजारी के साथ आमीन कहना

इमाम मलिक : 180

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ وَأَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّهُمَا أَخْبَرَاهُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا أَمَّنَ الْإِمَامُ فَأَمِّنُوا فَإِنَّهُ مَنْ وَافَقَ تَأْمِينُهُ تَأْمِينَ الْمَلَائِكَةِ غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ آمِينَ

याह्या ने मुझे मलिक से [इब्न शिहाब] से [सईद बिन मुसय्यब] और [अबू सलमा बिन अब्दुर्रहमान] दोनों ने [अबू हुरैरा] से बताया कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जब इमाम AAMIIN पढ़ें, तो AAMIIN कहें। जो कोई भी फ़रिश्ते के AAMIN के साथ AAMIIN पढ़ता है, उसके पिछले गुनाह ज़रूर माफ़ कर दिए जाएँगे।" इब्न शिहाब ने कहा, "रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम AAMIIN पढ़ें।"