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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Malik (الامام مالك) - 1594 Hadith

Hadith

Imam Malik : 1581

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ أَبِي الْحُبَابِ سَعِيدِ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ تَصَدَّقَ بِصَدَقَةٍ مِنْ كَسْبٍ طَيِّبٍ وَلَا يَقْبَلُ اللَّهُ إِلَّا طَيِّبًا كَانَ إِنَّمَا يَضَعُهَا فِي كَفِّ الرَّحْمَنِ يُرَبِّيهَا كَمَا يُرَبِّي أَحَدُكُمْ فَلُوَّهُ أَوْ فَصِيلَهُ حَتَّى تَكُونَ مِثْلَ الْجَبَلِ

मलिक हमरा [अबू अल हुबाब सईद बिन यासर] स [याह्या बिन सईद] स कहलथि जे अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क रसूलुल्लाह कहला जे जे नीक प्रयास स दान दैत अछि, आ अल्लाह नीक क अलावा किछु नहि स्वीकार करैत अछि। सचमुच, ओ एकरा परमात्माक हथेली मे राखि देने छथि । अल्लाह एकर देखभाल ओहिना करत जेना अहाँ सभ मे सँ कियो अपन बछड़ा वा ऊँटक देखभाल करैत अछि, जाबत धरि ओकर दान पहाड़ जकाँ नहि भ' जायत'।

Hadith

Imam Malik : 1582

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ أَنَّهُ سَمِعَ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ يَقُولُكَانَ أَبُو طَلْحَةَ أَكْثَرَ أَنْصَارِيٍّ بِالْمَدِينَةِ مَالًا مِنْ نَخْلٍ وَكَانَ أَحَبَّ أَمْوَالِهِ إِلَيْهِ بَيْرُحَاءَ وَكَانَتْ مُسْتَقْبِلَةَ الْمَسْجِدِ وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدْخُلُهَا وَيَشْرَبُ مِنْ مَاءٍ فِيهَا طَيِّبٍ قَالَ أَنَسٌ فَلَمَّا أُنْزِلَتْ هَذِهِ الْآيَةُ{ لَنْ تَنَالُوا الْبِرَّ حَتَّى تُنْفِقُوا مِمَّا تُحِبُّونَ }قَامَ أَبُو طَلْحَةَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ اللَّهَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى يَقُولُ{ لَنْ تَنَالُوا الْبِرَّ حَتَّى تُنْفِقُوا مِمَّا تُحِبُّونَ }وَإِنَّ أَحَبَّ أَمْوَالِي إِلَيَّ بَيْرُحَاءَ وَإِنَّهَا صَدَقَةٌ لِلَّهِ أَرْجُو بِرَّهَا وَذُخْرَهَا عِنْدَ اللَّهِ فَضَعْهَا يَا رَسُولَ اللَّهِ حَيْثُ شِئْتَ قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَخْ ذَلِكَ مَالٌ رَابِحٌ ذَلِكَ مَالٌ رَابِحٌ وَقَدْ سَمِعْتُ مَا قُلْتَ فِيهِ وَإِنِّي أَرَى أَنْ تَجْعَلَهَا فِي الْأَقْرَبِينَ فَقَالَ أَبُو طَلْحَةَ أَفْعَلُ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَقَسَمَهَا أَبُو طَلْحَةَ فِي أَقَارِبِهِ وَبَنِي عَمِّهِ

मलिक हमरा [इशक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहा] स कहलनि जे ओ [अनस बिन मलिक] के कहैत सुनने छलाह जे अबू तलहा ओ अंसार छथि जिनका मदीना मे खजूर के रूप मे सबस बेसी धन छनि। हुनका जे खजाना सबसँ बेसी नीक लगैत छन्हि ओ अछि बैरुहा जे मस्जिदक सोझाँ मे अछि । रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एहि मे प्रवेश करैत छलाह आ ओकर साफ पानि मे पीबैत छलाह' | अनस बाजल; 'जखन ई श्लोक प्रकट भेल : '-अहाँ केँ कहियो नीक -परफेक्ट- नहि भेटत जाबत धरि अहाँ जे किछु धन-दौलत अहाँ केँ नीक लगैत अछि ताहि मे सँ किछु खर्च नहि करब-'। -प्रश्न। अली इमरान : 92- अबू तल्हाह रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने ठाढ़ भ गेलाह तखन कहलनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अल्लाह तबराका व त'ला कहलनि: '-अहाँ के कहियो नीक -परफेक्ट- नहि भेटत त अहाँ जे किछु धन-दौलत अहाँ के नीक लगैत अछि ओहि मे सँ किछु द' दैत छी-', सचमुच जे खजाना हमरा सबसँ बेसी नीक लगैत अछि ओ अछि बैरुहा, हम ई बगीचा अल्लाह के लेल देलहुँ, हमरा आशा अछि जे ई नीक होयत आ अल्लाह के संग राखल जायत। हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, एहि धन के अपन इच्छानुसार उपयोग करू'। अनस कहलखिन, 'तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन: 'बड़का...! शुभ निधि अछि, शुभ निधि अछि । अहाँ जे कहलहुँ से सुनने छी। हमरा लगैत अछि जे अहाँकेँ कोनो करीबी रिश्तेदारकेँ देबाक चाही।' अस्तु अबू तल्हा कहलनि जे हे अल्लाह के रसूलुल्लाह हम करब’। तखन काकाक परिवार आ बच्चा सभक बीच बाँटि देलनि'।

Hadith

Imam Malik : 1583

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَعْطُوا السَّائِلَ وَإِنْ جَاءَ عَلَى فَرَسٍ

मलिक हमरा [जैद बिन असलम] स बतौलनि जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन्ह: 'जे माँगैत अछि ओकरा द' दियौक भले ओ घोड़ा पर सवार भ' क' आबि जाय।'

Hadith

Imam Malik : 1584

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُعَاذٍ الْأَشْهَلِيِّ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ جَدَّتِهِ أَنَّهَا قَالَتْقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا نِسَاءَ الْمُؤْمِنَاتِ لَا تَحْقِرَنَّ إِحْدَاكُنَّ أَنْ تُهْدِيَ لِجَارَتِهَا وَلَوْ كُرَاعَ شَاةٍ مُحْرَقًا

हमरा [जैद बिन असलम] स मालिक [‘अमरू बिन मुअदज अल अस्यहाली अल अंसारी] स [हुनकर दादी] स कहलक अछि; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'हे मुसलमान महिला, की अहाँ मे सँ कियो अपन पड़ोसी केँ उपहार देब केँ कम नहि बुझू, भले ओ मात्र भुजल बकरी केर टांग हो'।

Hadith

Imam Malik : 1585

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَزِيدَ اللَّيْثِيِّ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّأَنَّ نَاسًا مِنْ الْأَنْصَارِ سَأَلُوا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَعْطَاهُمْ ثُمَّ سَأَلُوهُ فَأَعْطَاهُمْ حَتَّى نَفِدَ مَا عِنْدَهُ ثُمَّ قَالَ مَا يَكُونُ عِنْدِي مِنْ خَيْرٍ فَلَنْ أَدَّخِرَهُ عَنْكُمْ وَمَنْ يَسْتَعْفِفْ يُعِفَّهُ اللَّهُ وَمَنْ يَسْتَغْنِ يُغْنِهِ اللَّهُ وَمَنْ يَتَصَبَّرْ يُصَبِّرْهُ اللَّهُ وَمَا أُعْطِيَ أَحَدٌ عَطَاءً هُوَ خَيْرٌ وَأَوْسَعُ مِنْ الصَّبْرِ

हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [इब्न शिहाब] स॑ मलिक [अथा बिन यजीद अल लैत्सी] स॑ [अबू सईद अल खुदरी] स॑ कहलकै, ‘किछु अंसार न॑ अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ पूछलकै, तखनिये वू ओकरा सब क॑ देलकै । तखन ओ सभ आओर माँगलनि, तखन ओ बेसी द' देलखिन्ह जाबत धरि हुनका लग सभटा समाप्त नहि भ' गेलनि। तखन ओ कहलनि: 'हमरा लग जे किछु भलाई अछि, हम ओकरा अहाँ सँ नहि राखब।' जे अपन इज्जत के रक्षा करत, अल्लाह ओकर इज्जत के रक्षा जरूर करत। जे कियो पर्याप्तता मांगत, अल्लाह एकर इंतजाम जरूर करताह। जे कियो धैर्य रखबाक प्रयास करत, अल्लाह ओकरा धीरज अवश्य देत। धैर्य स नीक आ व्यापक वरदान ककरो नहि देल गेल अछि'।

Hadith

Imam Malik : 1586

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ وَهُوَ عَلَى الْمِنْبَرِ وَهُوَ يَذْكُرُ الصَّدَقَةَ وَالتَّعَفُّفَ عَنْ الْمَسْأَلَةِ الْيَدُ الْعُلْيَا خَيْرٌ مِنْ الْيَدِ السُّفْلَى وَالْيَدُ الْعُلْيَا هِيَ الْمُنْفِقَةُ وَالسُّفْلَى هِيَ السَّائِلَةُ

हमरा ई बात [नाफी’] स मालिक स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स कहल गेल अछि जे कहने छलाह, 'जखन ओ मंच पर छलाह त दक्षिणा आ भीख मांगबा स इज्जत बनौने रहबाक जिक्र केलथि, ओ कहने छलाह: 'नीचा के हाथ स ऊपर के हाथ नीक अछि'। ऊपरक हाथ जे दैत अछि आ नीचाँक जे माँगैत अछि'।

Hadith

Imam Malik : 1587

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرْسَلَ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ بِعَطَاءٍ فَرَدَّهُ عُمَرُ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِمَ رَدَدْتَهُ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَلَيْسَ أَخْبَرْتَنَا أَنَّ خَيْرًا لِأَحَدِنَا أَنْ لَا يَأْخُذَ مِنْ أَحَدٍ شَيْئًا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّمَا ذَلِكَ عَنْ الْمَسْأَلَةِ فَأَمَّا مَا كَانَ مِنْ غَيْرِ مَسْأَلَةٍ فَإِنَّمَا هُوَ رِزْقٌ يَرْزُقُكَهُ اللَّهُ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ أَمَا وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَا أَسْأَلُ أَحَدًا شَيْئًا وَلَا يَأْتِينِي شَيْءٌ مِنْ غَيْرِ مَسْأَلَةٍ إِلَّا أَخَذْتُهُ

हमरा मलिक स [जैद बिन असलम] स [अथा बिन यासर] स कहल गेल अछि जे रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम उमर बिन खत्ताब कए किछु पठेलथि, फेर उमर वापस क देलथि। त रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका स पूछलखिन: अहाँ एकरा किएक वापस केलहुं? उमर जवाब देलखिन, 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, की अहाँ हमरा सब के ई नहि कहने छी जे व्यक्ति के भलाई दोसर व्यक्ति स किछु नहि लेब?' रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, तकर मतलब ई अछि जे जँ ओ पूछय। जँ माँगि क' नहि अछि त' ओ रिज़की अछि जे अल्लाह अहाँ केँ दैत छथि।' उमर बिन खट्टाब कहलनि; 'जकर हाथ सँ हमर आत्मा अछि, हम ककरो सँ किछु नहि माँगब, आ जे हम नहि माँगलहुँ ताबत धरि कियो नहि देत'।

Hadith

Imam Malik : 1588

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَأَنْ يَأْخُذَ أَحَدُكُمْ حَبْلَهُ فَيَحْتَطِبَ عَلَى ظَهْرِهِ خَيْرٌ لَهُ مِنْ أَنْ يَأْتِيَ رَجُلًا أَعْطَاهُ اللَّهُ مِنْ فَضْلِهِ فَيَسْأَلَهُ أَعْطَاهُ أَوْ مَنَعَهُ

मलिक हमरा [अबू अज़ जिनाद] स [अबू हुरैरा] स [अल अ'राज] स बतेलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कहने छथि: 'ओहि व्यक्ति क कसम, जिनकर हाथ मे हमर आत्मा अछि, जौं अहाँ मे स कियो अपन रस्सी ल कए जलाऊ लकड़ी ताकि कए अपन कान्ह पर ल जाएत, त ओकरा लेल इ नीक रहत जे ओ एहन आदमी लग जेताह जेकरा भरपूर देल गेल अछि।' रियायत आ ओकरासँ पूछू जे ओकरा देल गेल अछि वा अस्वीकार कएल गेल।'

Hadith

Imam Malik : 1589

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ رَجُلٍ مِنْ بَنِي أَسَدٍ أَنَّهُ قَالَنَزَلْتُ أَنَا وَأَهْلِي بِبَقِيعِ الْغَرْقَدِ فَقَالَ لِي أَهْلِي اذْهَبْ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَاسْأَلْهُ لَنَا شَيْئًا نَأْكُلُهُ وَجَعَلُوا يَذْكُرُونَ مِنْ حَاجَتِهِمْ فَذَهَبْتُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَوَجَدْتُ عِنْدَهُ رَجُلًا يَسْأَلُهُ وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا أَجِدُ مَا أُعْطِيكَ فَتَوَلَّى الرَّجُلُ عَنْهُ وَهُوَ مُغْضَبٌ وَهُوَ يَقُولُ لَعَمْرِي إِنَّكَ لَتُعْطِي مَنْ شِئْتَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّهُ لَيَغْضَبُ عَلَيَّ أَنْ لَا أَجِدَ مَا أُعْطِيهِ مَنْ سَأَلَ مِنْكُمْ وَلَهُ أُوقِيَّةٌ أَوْ عَدْلُهَا فَقَدْ سَأَلَ إِلْحَافًا قَالَ الْأَسَدِيُّ فَقُلْتُ لَلَقْحَةٌ لَنَا خَيْرٌ مِنْ أُوقِيَّةٍ قَالَ مَالِك وَالْأُوقِيَّةُ أَرْبَعُونَ دِرْهَمًا قَالَ فَرَجَعْتُ وَلَمْ أَسْأَلْهُ فَقُدِمَ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعْدَ ذَلِكَ بِشَعِيرٍ وَزَبِيبٍ فَقَسَمَ لَنَا مِنْهُ حَتَّى أَغْنَانَا اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ

हमरा मलिक स [जैद बिन असलम] स [अथा बिन यासर] स [बनी असद स एकटा आदमी] स कहल गेल अछि जे कहने छल, 'हम आ हमर पत्नी बकी' अल घरकाद मे रुकलहुं, तखन हमर परिवार कहलक, 'अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क रसूलुल्लाह स भेंट करू, फेर किछु मांगू जे हम सब खा सकब'। तखन ओ सब अपन-अपन जरूरत के जिक्र केलनि, तखन हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के देखय गेलहुं, हमरा कियो हुनका सं किछु मांगैत भेटल. रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'हमरा लग आब कोनो एहन चीज नहि अछि जे हम अहाँ के द सकब'। ओ आदमी तमसाइत ई कहैत चलि गेल, ‘सत्ते, अहाँ जे चाहब ओकरा द’ सकैत छी! ' त रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि : 'ओ हमरा पर तमसा गेल छलाह, कारण हमरा लग ओ नहि छल जे ओ मँगल छलाह।' अहाँ सभ मे सँ जे कियो एकटा उकिया वा ओकर समकक्ष रहितो माँगैत अछि, ओ सचमुच जबरदस्ती किछु मँगने अछि'। अल असदी कहलनि; 'हमरऽ लगभग बछड़ा पैदा करै वाला ऊँट एक 'उकिया' स॑ बेहतर छै । मालिक बजलाह; 'एक 'उकिया चालीस दिरहम'। बानू अस'द के आदमी तखन कहलकै, 'हम बिना पूछने वापस आबि गेलहुं'। तखन रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ककरो आटा आ गहूम देलनि, तखन ओ हमरा सभ केँ ताबत धरि बाँटि देलनि जा धरि अल्लाह अज्जा व जल्ला हमरा सभक लेल पर्याप्त नहि भ’ गेलाह।'

Hadith

Imam Malik : 1590

و عَنْ مَالِك عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّهُ سَمِعَهُ يَقُولُمَا نَقَصَتْ صَدَقَةٌ مِنْ مَالٍ وَمَا زَادَ اللَّهُ عَبْدًا بِعَفْوٍ إِلَّا عِزًّا وَمَا تَوَاضَعَ عَبْدٌ إِلَّا رَفَعَهُ اللَّهُقَالَ مَالِك لَا أَدْرِي أَيُرْفَعُ هَذَا الْحَدِيثُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمْ لَا

[अल अला` बिन अब्दुररहमान] स मालिक स कि ओ हुनका कहैत सुनलथि जे दान के कारण धन मे कमी नहि होयत, आ अल्लाह महिमा के अलावा क्षमाशील सेवक के नहि बढ़बैत छथि। आ कोनो नौकर तवाहू' ताबत धरि नहि बनबैत अछि जाबत अल्लाह ओकर पद नहि उठबैत अछि'। मालिक बजलाह; 'हमरा नै पता छै कि ई हदीस नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लेलऽ अच्छा छै या नै' ।

Hadith

Imam Malik : 1591

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اسْتَعْمَلَ رَجُلًا مِنْ بَنِي عَبْدِ الْأَشْهَلِ عَلَى الصَّدَقَةِ فَلَمَّا قَدِمَ سَأَلَهُ إِبِلًا مِنْ الصَّدَقَةِ فَغَضِبَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى عُرِفَ الْغَضَبُ فِي وَجْهِهِ وَكَانَ مِمَّا يُعْرَفُ بِهِ الْغَضَبُ فِي وَجْهِهِ أَنْ تَحْمَرَّ عَيْنَاهُ ثُمَّ قَالَ إِنَّ الرَّجُلَ لَيَسْأَلُنِي مَا لَا يَصْلُحُ لِي وَلَا لَهُ فَإِنْ مَنَعْتُهُ كَرِهْتُ الْمَنْعَ وَإِنْ أَعْطَيْتُهُ أَعْطَيْتُهُ مَا لَا يَصْلُحُ لِي وَلَا لَهُ فَقَالَ الرَّجُلُ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَا أَسْأَلُكَ مِنْهَا شَيْئًا أَبَدًا

हमरा ई मलिक सँ [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर] सँ [हुनकर पिता] सँ रिवायत भेल अछि जे कहलनि जे, 'अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) बनी अब्दुल अल अशहल सँ एकटा आदमी केँ जकात संग्रहकर्ता नियुक्त केलनि।' पहुँचला पर ओ आदमी जकात सँ ऊँट मंगलक। तखन अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क्रोधित भ गेलाह, आ हुनकर क्रोध हुनकर चेहरा पर देखबा मे आबि गेलनि। ओकर तामसक संकेत मे ईहो छलैक जे ओकर आँखि लाल भ’ गेलैक। तखन ओ कहलनि: ‘एकटा आदमी हमरासँ एहन चीज मंगलक जे ने हमरा लेल अछि आ ने ओकरा लेल। जँ हम हुनका मना करैत छी तँ हमरा मना करब - देब - नीक नहि लगैत अछि । जँ हम ओकरा द' दैत छी त' एकर मतलब जे हम एहन चीज द' रहल छी जे ने हमरा लेल अछि आ ने ओकरा स्वीकार करबाक लेल।' तखन ओ आदमी कहलक: हे अल्लाह केर रसूलुल्लाह, हम अहाँ सँ कहियो किछु नहि माँगब।

Hadith

Imam Malik : 1592

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْأَرْقَمِادْلُلْنِي عَلَى بَعِيرٍ مِنْ الْمَطَايَا أَسْتَحْمِلُ عَلَيْهِ أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ فَقُلْتُ نَعَمْ جَمَلًا مِنْ الصَّدَقَةِ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْأَرْقَمِ أَتُحِبُّ أَنَّ رَجُلًا بَادِنًا فِي يَوْمٍ حَارٍّ غَسَلَ لَكَ مَا تَحْتَ إِزَارِهِ وَرُفْغَيْهِ ثُمَّ أَعْطَاكَهُ فَشَرِبْتَهُ قَالَ فَغَضِبْتُ وَقُلْتُ يَغْفِرُ اللَّهُ لَكَ أَتَقُولُ لِي مِثْلَ هَذَا فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْأَرْقَمِ إِنَّمَا الصَّدَقَةُ أَوْسَاخُ النَّاسِ يَغْسِلُونَهَا عَنْهُمْ

ई हमरा मलिक स॑ [जैद बिन असलम] स॑ [हुनकरऽ पिता] स॑ कहलऽ गेलऽ छेलै जे कहलकै: [अब्दुररहमान बिन अल अरकाम] न॑ कहलकै, 'हमरा एगो ऊंट देखाबै जेकरा प॑ हम्में सवार होय सकै छियै, जेकरा प॑ हम्में मुसलमानऽ के सेनापति क॑ ढोय सकै छियै ।' हम कहलियनि, 'हँ, भिक्षा ऊँट सँ एकटा नर ऊँट अछि।' तखन अब्दुल्ला बिन अल अरकाम पुछलखिन, 'की अहाँ के नीक लागत जँ कोनो मोटका आदमी अहाँक लेल अपन अंडरगारमेंट आ अपन जाँघ बहुत गरम दिन मे धो देत?' तखन ओ अहाँकेँ पानि देलक आ अहाँ पीबि लेलहुँ?' असलम कहलक जे हम तमसा गेलहुँ आ कहलियनि जे अल्लाह अहाँ केँ माफ करथि, अहाँ हमरा ई किएक कहैत छी? अब्दुल्ला बिन अरकाम कहलकै, 'सत्ते जकात लोगऽ के गंदगी छै जेकरा वू खुद सें साफ करी दै छै।'

Hadith

Imam Malik : 1593

حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِاسْتَعْمَلَ مَوْلًى لَهُ يُدْعَى هُنَيًّا عَلَى الْحِمَى فَقَالَ يَا هُنَيُّ اضْمُمْ جَنَاحَكَ عَنْ النَّاسِ وَاتَّقِ دَعْوَةَ الْمَظْلُومِ فَإِنَّ دَعْوَةَ الْمَظْلُومِ مُجَابَةٌ وَأَدْخِلْ رَبَّ الصُّرَيْمَةِ وَرَبَّ الْغُنَيْمَةِ وَإِيَّايَ وَنَعَمَ ابْنِ عَفَّانَ وَابْنِ عَوْفٍ فَإِنَّهُمَا إِنْ تَهْلِكْ مَاشِيَتُهُمَا يَرْجِعَانِ إِلَى الْمَدِينَةِ إِلَى زَرْعٍ وَنَخْلٍ وَإِنَّ رَبَّ الصُّرَيْمَةِ وَالْغُنَيْمَةِ إِنْ تَهْلِكْ مَاشِيَتُهُ يَأْتِنِي بِبَنِيهِ فَيَقُولُ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ أَفَتَارِكُهُمْ أَنَا لَا أَبَا لَكَ فَالْمَاءُ وَالْكَلَأُ أَيْسَرُ عَلَيَّ مِنْ الذَّهَبِ وَالْوَرِقِ وَايْمُ اللَّهِ إِنَّهُمْ لَيَرَوْنَ أَنِّي قَدْ ظَلَمْتُهُمْ إِنَّهَا لَبِلَادُهُمْ وَمِيَاهُهُمْ قَاتَلُوا عَلَيْهَا فِي الْجَاهِلِيَّةِ وَأَسْلَمُوا عَلَيْهَا فِي الْإِسْلَامِ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَوْلَا الْمَالُ الَّذِي أَحْمِلُ عَلَيْهِ فِي سَبِيلِ اللَّهِ مَا حَمَيْتُ عَلَيْهِمْ مِنْ بِلَادِهِمْ شِبْرًا

मलिक हमरा [जैद बिन असलम] स [अपन पिता] स बतेलथि जे [उमर इब्न खट्टाब] अपन पूर्व दास हुनय्या कए सीमा क रखवाली लेल नियुक्त केलथि। तखन उमर कहलखिन: हे हुनय्या! लोक पर अत्याचार करबा स परहेज करू आ उत्पीड़ित क विनती स डरू। कारण, दबल-कुचलल लोकक विनतीक उत्तर भेटैत छैक। ऊँट-बकरीक मालिक जे कम छथि, प्रवेश करू। इब्न अफान आ इब्न अवफ के माल-जाल छोड़ि दियौक, जँ समाप्त भ’ गेल त’ मदीना वापस आबि खेती आ खेती करत। चरबाह जिनकर ऊँट वा बकरी कम अछि, जखन ओ सभ समाप्त भ’ जायत तखन ओ सभ अपन बच्चा सभक संग हमरा लग आबि क’ कहत जे हे आस्थावानक सेनापति! हे आस्थावान के सेनापति ! अहाँ हुनका सभकेँ छोड़ि देबनि? हम अहाँसँ विमुख नहि छी, पानि आ घास हमरा लेल सोना-चानीसँ हल्लुक अछि । अल्लाह के कसम, ओ सब देखैत छथि जे हम हुनका सब पर अन्याय केने छी। ई हुनका लोकनिक जमीन आ पानि थिक।' जाहिलिया युग मे एकरा लेल लड़ल आ इस्लामी युग मे एकरा आत्मसमर्पण क देलक। जिनकर हाथ मे हमर आत्मा अछि, जँ हम अल्लाहक बाट मे अनने धन नहि रहैत त' हम हुनका लोकनिक जमीनक एक इंच तक रक्षा नहि करितहुँ ।

Hadith

Imam Malik : 1594

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لِي خَمْسَةُ أَسْمَاءٍ أَنَا مُحَمَّدٌ وَأَنَا أَحْمَدُ وَأَنَا الْمَاحِي الَّذِي يَمْحُو اللَّهُ بِيَ الْكُفْرَ وَأَنَا الْحَاشِرُ الَّذِي يُحْشَرُ النَّاسُ عَلَى قَدَمِي وَأَنَا الْعَاقِبُ

हमरा [इब्न शिहाब] स मलिक द्वारा [मुहम्मद बिन जाबिर बिन मुथइम] स कहल गेल अछि जे पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा स कहने छथि: 'हमर पांच नाम अछि: हम मुहम्मद, अहमद, अल माही छी जिनका संग अल्लाह हमरा संग कुफर के समाप्त क देने छथि, अल हसीर, जिनका नीचा सब मनुष्य हमर पैर के तलवा पर जमा अछि, आ अल 'अकीब'।