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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)
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Imam Malik (الامام مالك) - 1594 हदीस

हदीस

Imam Malik : 141

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَمِّهِ أَبِي سُهَيْلِ بْنِ مَالِكٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ قَالَمَا أَعْرِفُ شَيْئًا مِمَّا أَدْرَكْتُ عَلَيْهِ النَّاسَ إِلَّا النِّدَاءَ بِالصَّلَاةِ

याह्या हमरा के मालिक से [उनकर चाचा, अबू सुहैल बिन मलिक] से [उनकर पिता] से बतवले जे कहले कि, 'हमरा नमाज के पुकार - अदान - के छोड़ के कुछूओ नईखे मालूम कि लोग का करेला।'

हदीस

Imam Malik : 142

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَسَمِعَ الْإِقَامَةَ وَهُوَ بِالْبَقِيعِ فَأَسْرَعَ الْمَشْيَ إِلَى الْمَسْجِدِ

हमरा के [नाफी] [अब्दुल्ला बिन उमर] से मलिक से बतावल गईल बा कि उ बकी' में रहला के दौरान इकामत सुनले रहले, ओकरा बाद उ मस्जिद में भाग गईले'।

हदीस

Imam Malik : 143

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَأَذَّنَ بِالصَّلَاةِ فِي لَيْلَةٍ ذَاتِ بَرْدٍ وَرِيحٍ فَقَالَ أَلَا صَلُّوا فِي الرِّحَالِ ثُمَّ قَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَأْمُرُ الْمُؤَذِّنَ إِذَا كَانَتْ لَيْلَةٌ بَارِدَةٌ ذَاتُ مَطَرٍ يَقُولُ أَلَا صَلُّوا فِي الرِّحَالِ

याह्या हमरा से मलिक से [नफी’] से बतवले, कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] ठंडा अवुरी हवादार रात में नमाज के आह्वान कईले रहले। अपना नमाज के आह्वान में उ कहले कि, 'घर में प्रार्थना करीं।' तब उ कहले कि, 'अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) एक बेर बहुत ठंडा अवुरी बरसात के रात में मुअज्जिन के आदेश देले कि, 'घर में नमाज पढ़ाई।'

हदीस

Imam Malik : 144

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ لَا يَزِيدُ عَلَى الْإِقَامَةِ فِي السَّفَرِ إِلَّا فِي الصُّبْحِ فَإِنَّهُ كَانَ يُنَادِي فِيهَا وَيُقِيمُ وَكَانَ يَقُولُ إِنَّمَا الْأَذَانُ لِلْإِمَامِ الَّذِي يَجْتَمِعُ النَّاسُ إِلَيْهِ

[नफी’] से मलिक से हमरा के बतावल गईल रहे, कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] जब कवनो सफर में रहले त सिर्फ सुबह के नमाज के छोड़ के इकामत कहत रहले। उ नमाज में नमाज के आह्वान अवुरी इकामत के उच्चारण कईले। ऊ कहत बाड़न कि; 'नमाज के आह्वान खाली इमाम खातिर होला - मस्जिद में - जहाँ जमात के नमाज होला'।

हदीस

Imam Malik : 145

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ أَنَّ أَبَاهُ قَالَ لَهُإِذَا كُنْتَ فِي سَفَرٍ فَإِنْ شِئْتَ أَنْ تُؤَذِّنَ وَتُقِيمَ فَعَلْتَ وَإِنْ شِئْتَ فَأَقِمْ وَلَا تُؤَذِّنْقَالَ يَحْيَى سَمِعْت قَوْله تَعَالَى يَقُولُ لَا بَأْسَ أَنْ يُؤَذِّنَ الرَّجُلُ وَهُوَ رَاكِبٌ

याह्या हमरा के [हिस्याम बिन उर्वाह] से मलिक से बतवले कि [उनकर पिता] उनुका से कहले कि, 'अगर आप कवनो सफर प बानी, जबकि आप नमाज अवुरी इकामत चाहतानी, त अयीसन करीं।' आ अगर रउरा चाहत बानी त बस इकामत बिना नमाज के पुकार के कर सकेनी'। याह्या कहले, 'हम मालिक के कहत सुनले बानी कि आदमी के नमाज के आह्वान करे में कवनो बुराई नईखे, भले उ अपना गाड़ी में होखे'।

हदीस

Imam Malik : 146

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُمَنْ صَلَّى بِأَرْضٍ فَلَاةٍ صَلَّى عَنْ يَمِينِهِ مَلَكٌ وَعَنْ شِمَالِهِ مَلَكٌ فَإِذَا أَذَّنَ وَأَقَامَ الصَّلَاةَ أَوْ أَقَامَ صَلَّى وَرَاءَهُ مِنْ الْمَلَائِكَةِ أَمْثَالُ الْجِبَالِ

हमरा से मलिक से [याह्या बिन सईद] से [सैद बिन मुसैयब] से बतावल गईल बा उ कहले कि, 'जे केहू जमीन के टुकड़ा प नमाज पढ़ी, निश्चित रूप से फरिश्ता ओकरा दाहिना-बांया नमाज पढ़ीहे।' अगर उ नमाज अवुरी इकामत, चाहे सिर्फ इकमात के आवाज़ देवे त निश्चित रूप से ओकरा पीछे पहाड़ निहन फरिश्ता नमाज पढ़ीहे'।

हदीस

Imam Malik : 147

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ بِلَالًا يُنَادِي بِلَيْلٍ فَكُلُوا وَاشْرَبُوا حَتَّى يُنَادِيَ ابْنُ أُمِّ مَكْتُومٍ

याह्या हमरा के [अब्दुल्लाह बिन दिनार] से मालिक से [अब्दुल्लाह बिन उमर] से बतवले कि रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'वास्तव में बिलाल रात में नमाज के आवाज़ देवेले, एहसे जब तक अब्दुल्लाह बिन उम्मी मकतुम नमाज के आह्वान ना करीहे, तब तक खाईं-पीईं'।

हदीस

Imam Malik : 148

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ بِلَالًا يُنَادِي بِلَيْلٍ فَكُلُوا وَاشْرَبُوا حَتَّى يُنَادِيَ ابْنُ أُمِّ مَكْتُومٍ قَالَ وَكَانَ ابْنُ أُمِّ مَكْتُومٍ رَجُلًا أَعْمَى لَا يُنَادِي حَتَّى يُقَالَ لَهُ أَصْبَحْتَ أَصْبَحْتَ

हमरा से मलिक से [इब्नु शिहाब] से [सलीम बिन अब्दुल्लाह] से बतावल गईल बा कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'वास्तव में बिलाल रात में नमाज के आह्वान करेले, जब तक इब्न उम्मी मकतुम नमाज के आह्वान ना करे तब तक खाए-पीए के काम करेले'। सलीम बिन अब्दुल्ला कहले कि, अब्दुल्ला बिन उम्मी मकतुम एगो आन्हर रहले, जब तक उनुका से ना कहल गईल कि भोर हो गईल, भोर हो गईल बा, तब तक उ नमाज के आह्वान ना कईले।

हदीस

Imam Malik : 149

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا افْتَتَحَ الصَّلَاةَ رَفَعَ يَدَيْهِ حَذْوَ مَنْكِبَيْهِ وَإِذَا رَفَعَ رَأْسَهُ مِنْ الرُّكُوعِ رَفَعَهُمَا كَذَلِكَ أَيْضًا وَقَالَ سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ وَكَانَ لَا يَفْعَلُ ذَلِكَ فِي السُّجُودِ

हमरा के मलिक से यह्याया [इब्न शिहाब] से [सलीम बिन अब्दुल्लाह] से [अब्दुल्लाह बिन उमर] से बतवले बाड़े, कि जब रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम नमाज शुरू कईले त उ आपन हाथ अपना कंधा तक ऊपर उठवले। जब उ प्रणाम से उठले त उ नमाज पढ़त-पढ़त दुनो हाथ भी उठवले: 'सामी'अल्लाहु लिमान हमीदाह, रब्बना वालाकल हमदू -अल्लाह उनुकर स्तुति करे वाला लोग खातिर सर्वश्री हवे। हे हमार रब्ब, अकेले तोहरा के सब स्तुति बा-'। लेकिन जब उ सजदा कईले त अयीसन ना कईले'।

हदीस

Imam Malik : 150

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عَلِيِّ بْنِ حُسَيْنِ بْنِ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ أَنَّهُ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُكَبِّرُ فِي الصَّلَاةِ كُلَّمَا خَفَضَ وَرَفَعَ فَلَمْ تَزَلْ تِلْكَ صَلَاتَهُ حَتَّى لَقِيَ اللَّهَ

हमरा के मलिक से [इब्न शिहाब] से [अली बिन हुसैन बिन अली बिन अबू तालिब] से बतावल गईल बा, जवन कहले रहले कि, नमाज में अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब तकबीर कहले जब उ उठ के गिर जाए वाला रहले। जब तक उ मर ना गईले तब तक उ हमेशा अयीसन करत रहले'।

हदीस

Imam Malik : 151

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَرْفَعُ يَدَيْهِ فِي الصَّلَاةِ

हमरा से मलिक से [याह्या बिन सईद] से [सुलेमान बिन यासर] से रिवायत बा, कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम नमाज में हाथ उठवले।

हदीस

Imam Malik : 152

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَكَانَ يُصَلِّي لَهُمْ فَيُكَبِّرُ كُلَّمَا خَفَضَ وَرَفَعَ فَإِذَا انْصَرَفَ قَالَ وَاللَّهِ إِنِّي لَأَشْبَهُكُمْ بِصَلَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

मलिक हमरा से [इब्न शिहाब] से [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान बिन औफ] से बतवले कि [अबू हुरैरा] नमाज में अगुवाई करत रहले। ऊ हर बेर उठ के नीचे उतरे पर तकबीर कहत रहले. जब उ नमाज खतम क देत रहले त कहत रहले कि अल्लाह के कसम हम उहे हई, जेकर नमाज रसूलुल्लाह (स.अ.व.) के नमाज से सबसे जादे मिलत जुलत बा।

हदीस

Imam Malik : 153

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ يُكَبِّرُ فِي الصَّلَاةِ كُلَّمَا خَفَضَ وَرَفَعَ

हमरा से मलिक से [इब्न सिहाब] से [सलीम बिन अब्दुल्लाह] से रिवायत बा, कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] हर बेर जब उतर के उठत रहले त अपना नमाज में तकबीर कहत रहले’।

हदीस

Imam Malik : 154

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ إِذَا افْتَتَحَ الصَّلَاةَ رَفَعَ يَدَيْهِ حَذْوَ مَنْكِبَيْهِ وَإِذَا رَفَعَ رَأْسَهُ مِنْ الرُّكُوعِ رَفَعَهُمَا دُونَ ذَلِكَ

याह्या हमरा के [नफी’] से मालिक से बतवले, कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] नमाज शुरू करत घरी आपन हाथ अपना कंधा तक ऊपर उठावत रहले। आ अगर झुकला से माथा उठा लेला त ओकरा से नीचे हाथ उठावेला'।

हदीस

Imam Malik : 155

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي نُعَيْمٍ وَهْبِ بْنِ كَيْسَانَ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِأَنَّهُ كَانَ يُعَلِّمُهُمْ التَّكْبِيرَ فِي الصَّلَاةِ قَالَ فَكَانَ يَأْمُرُنَا أَنْ نُكَبِّرَ كُلَّمَا خَفَضْنَا وَرَفَعْنَا

हमरा के [अबू नुअइम वहाब बिन कैसन] से मलिक से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] से बतावल गईल बा, कि उ ओ लोग के नमाज में तकबीर करे के सिखवले बाड़े'। उ कहले कि, 'उ - अल्लाह के रसूलुल्लाह - हमनी के कहले रहले कि हर बेर जब हमनी के नीचे जाके उठनी जा त तकबीर कहे के चाही'।

हदीस

Imam Malik : 156

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُإِذَا أَدْرَكَ الرَّجُلُ الرَّكْعَةَ فَكَبَّرَ تَكْبِيرَةً وَاحِدَةً أَجْزَأَتْ عَنْهُ تِلْكَ التَّكْبِيرَةُقَالَ مَالِك وَذَلِكَ إِذَا نَوَى بِتِلْكَ التَّكْبِيرَةِ افْتِتَاحَ الصَّلَاةِ

[इब्न शिहाब] से मालिक से बतवले रहले उ कहले रहले; 'अगर आदमी प्रणाम कईले बा त उ एक तकबीर करेला, त उ तकबीर ओकरा खाती काफी बा'। मलिक कहले, 'अइसन कि अगर उनुकर इरादा बा कि उनुकर तकबीर -खोल- नमाज शुरू करस'।

हदीस

Imam Malik : 157

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَرَأَ بِالطُّورِ فِي الْمَغْرِبِ

याह्या हमरा के मलिक से [इब्न शिहाब] से [मुहम्मद बिन जुबैर बिन मुथइम] से [उनकर पिता] से बतवले बाड़े कि उ कहले बाड़े कि, 'हम रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम मगरीब के नमाज में अथ थुर अक्षर पढ़ले सुनले बानी'।

हदीस

Imam Malik : 158

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ أُمَّ الْفَضْلِ بِنْتَ الْحَارِثِسَمِعَتْهُ وَهُوَ يَقْرَأُ وَالْمُرْسَلَاتِ عُرْفًا فَقَالَتْ لَهُ يَا بُنَيَّ لَقَدْ ذَكَّرْتَنِي بِقِرَاءَتِكَ هَذِهِ السُّورَةَ إِنَّهَا لَآخِرُ مَا سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقْرَأُ بِهَا فِي الْمَغْرِبِ

हमरा से मलिक से [इब्न सिहाब] से [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] से [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] से बतावल गइल बा, कि [उम्मूल अल फदल बिंत अल हरिथ] उनुका के ‘वालमुरसलाती उर्फा’ पढ़त सुनले रहले। उम्मुल अल फडल बिंत अल हरिथ कहले, 'हे बेटा! रउरा एह चिट्ठी के पढ़ला से रउरा हमरा के याद दिअवले बानी, कि ई आखिरी चिट्ठी रहे जवन हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुनले रहीं, ऊ एकरा के मगरीब के नमाज में पढ़ले बाड़न’.

हदीस

Imam Malik : 159

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي عُبَيْدٍ مَوْلَى سُلَيْمَانَ بْنِ عَبْدِ الْمَلِكِ عَنْ عُبَادَةَ بْنِ نُسَيٍّ عَنْ قَيْسِ بْنِ الْحَارِثِ عَنْ أَبِي عَبْدِ اللَّهِ الصُّنَابِحِيِّ قَالَقَدِمْتُ الْمَدِينَةَ فِي خِلَافَةِ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ فَصَلَّيْتُ وَرَاءَهُ الْمَغْرِبَ فَقَرَأَ فِي الرَّكْعَتَيْنِ الْأُولَيَيْنِ بِأُمِّ الْقُرْآنِ وَسُورَةٍ سُورَةٍ مِنْ قِصَارِ الْمُفَصَّلِ ثُمَّ قَامَ فِي الثَّالِثَةِ فَدَنَوْتُ مِنْهُ حَتَّى إِنَّ ثِيَابِي لَتَكَادُ أَنْ تَمَسَّ ثِيَابَهُ فَسَمِعْتُهُ قَرَأَ بِأُمِّ الْقُرْآنِ وَبِهَذِهِ الْآيَةِ{ رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِنْ لَدُنْكَ رَحْمَةً إِنَّكَ أَنْتَ الْوَهَّابُ }

हमरा के [अबू उबैद] पूर्व गुलाम सुलेमान बिन अब्दुल मलिक से मालिक से बतवले बाड़े, [उबादा बिन नुसाई] से [कायस बिन अल हरिथ] से [अबू अब्दुल्लाह अश शुनाबीही] से कहले बाड़े; 'हम [अबू बकर अस सिद्दिक] के खिलाफत के दौरान मदीना आईल रहनी। फेर हम उनका पीछे मगरिब के नमाज पढ़नी, उ पहिला दु रकाअत में उम्मूल कुरान आ छोट-छोट अल मुफशशाल अक्षर पढ़ले। फेर ऊ तीसरा रकाअत खातिर खड़ा हो गइलन, फेर हम उनका नजदीक आ गइनी जबले कि हमार कपड़ा लगभग उनका कपड़ा से ना छूवत रहे. उम्मूल कुरान आ ई आयत पढ़त सुननी; '-हमार प्रभु, रउआ हमनी के मार्गदर्शन कइला के बाद हमनी के दिल के गलती के ओर मत बनाईं, आ रउआ से कृपा करीं; काहे कि तू -उपहार- '' के दाता हउअ। -प्रश्न के बा। अली इमरान : 8- के बा।

हदीस

Imam Malik : 160

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ إِذَا صَلَّى وَحْدَهُ يَقْرَأُ فِي الْأَرْبَعِ جَمِيعًا فِي كُلِّ رَكْعَةٍ بِأُمِّ الْقُرْآنِ وَسُورَةٍ مِنْ الْقُرْآنِ وَكَانَ يَقْرَأُ أَحْيَانًا بِالسُّورَتَيْنِ وَالثَّلَاثِ فِي الرَّكْعَةِ الْوَاحِدَةِ مِنْ صَلَاةِ الْفَرِيضَةِ وَيَقْرَأُ فِي الرَّكْعَتَيْنِ مِنْ الْمَغْرِبِ كَذَلِكَ بِأُمِّ الْقُرْآنِ وَسُورَةٍ سُورَةٍ

हमरा के [नफी’] से मलिक से बतावल गईल बा, कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] अकेले नमाज पढ़े के समय उ चारो रकाअत पढ़ेले। हर रकात में उ उम्मूल कुरान आ कुरान से एगो सूरह पढ़ेला। आ कबो-कबो फरदलू के नमाज में एक रकाअत में दू-तीन सूरह पढ़ेला। मगरीब के नमाज के दु रकाअत में उ उम्मूल कुरान अवुरी सूरह' भी पढ़ले।