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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)
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इमाम मलिक (الامام مالك) - 1594 हदीस

नबी ईसा ने सुअर से नम्रता से कहा

इमाम मलिक : 1561

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍأَنَّ عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ لَقِيَ خِنْزِيرًا بِالطَّرِيقِ فَقَالَ لَهُ انْفُذْ بِسَلَامٍ فَقِيلَ لَهُ تَقُولُ هَذَا لِخِنْزِيرٍ فَقَالَ عِيسَى ابْنُ مَرْيَمَ إِنِّي أَخَافُ أَنْ أُعَوِّدَ لِسَانِي الْمَنْطِقَ بِالسُّوءِ

मुझे बताया गया है कि मलिक [याह्या बिन सईद] ने कहा, "ईसा बिन मरियम को सड़क पर एक सुअर मिला, तो उन्होंने कहा: "सुरक्षित होकर निकल जाओ!" किसी ने पूछा; "तुम यह एक सुअर से कहते हो!" ईसा बिन मरियम ने जवाब दिया: "मुझे डर है कि मेरी ज़बान गंदी बातें कहने की आदी हो जाएगी।"

परमेश्‍वर की स्वीकृति और क्रोध पर शब्दों का प्रभाव

इमाम मलिक : 1562

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عَلْقَمَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ بِلَالِ بْنِ الْحَارِثِ الْمُزَنِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ الرَّجُلَ لَيَتَكَلَّمُ بِالْكَلِمَةِ مِنْ رِضْوَانِ اللَّهِ مَا كَانَ يَظُنُّ أَنْ تَبْلُغَ مَا بَلَغَتْ يَكْتُبُ اللَّهُ لَهُ بِهَا رِضْوَانَهُ إِلَى يَوْمِ يَلْقَاهُ وَإِنَّ الرَّجُلَ لَيَتَكَلَّمُ بِالْكَلِمَةِ مِنْ سَخَطِ اللَّهِ مَا كَانَ يَظُنُّ أَنْ تَبْلُغَ مَا بَلَغَتْ يَكْتُبُ اللَّهُ لَهُ بِهَا سَخَطَهُ إِلَى يَوْمِ يَلْقَاهُ

मलिक ने मुझे [मुहम्मद बिन अमरू बिन अलकामा] से [अपने पिता] से [बिलाल बिन अल हारिस अल मुज़ानी] से बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "एक आदमी एक ऐसा वाक्य कहता है जो अल्लाह को मंजूर होता है, जबकि वह नहीं जानता कि वह वाक्य कितना बड़ा है, ताकि उस वाक्य के साथ अल्लाह उसके लिए पुनरुत्थान के दिन तक अपनी स्वीकृति दर्ज कर ले। एक आदमी ऐसा भी है जो एक ऐसा वाक्य कहता है जिससे अल्लाह नाराज होता है। अल्लाह, जबकि वह नहीं जानता था कि वाक्य कितना बड़ा है, इसलिए अल्लाह ने उसके लिए पुनरुत्थान के दिन तक अपना क्रोध दर्ज कर लिया।"

स्वर्ग और नरक पर शब्दों का प्रभाव

इमाम मलिक : 1563

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ السَّمَّانِ أَنَّهُ أَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَإِنَّ الرَّجُلَ لَيَتَكَلَّمُ بِالْكَلِمَةِ مَا يُلْقِي لَهَا بَالًا يَهْوِي بِهَا فِي نَارِ جَهَنَّمَ وَإِنَّ الرَّجُلَ لَيَتَكَلَّمُ بِالْكَلِمَةِ مَا يُلْقِي لَهَا بَالًا يَرْفَعُهُ اللَّهُ بِهَا فِي الْجَنَّةِ

मलिक ने मुझे [अब्दुल्ला बिन दीनार] से [अबू सलीह अस सम्मन] से बताया कि [अबू हुरैरा] ने कहा, "बेशक, एक आदमी एक ऐसा वाक्य कहेगा जिसे वह मामूली समझता है, लेकिन यह उसे नरक में पहुंचा देगा। और निश्चित रूप से, एक आदमी एक ऐसा वाक्य कहेगा जिसे वह मामूली समझता है, लेकिन यह उसे स्वर्ग में पहुंचा देगा।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा कि कुछ व्याख्याएँ जादुई हैं

इमाम मलिक : 1564

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَقَدِمَ رَجُلَانِ مِنْ الْمَشْرِقِ فَخَطَبَا فَعَجِبَ النَّاسُ لِبَيَانِهِمَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ مِنْ الْبَيَانِ لَسِحْرًا أَوْ قَالَ إِنَّ بَعْضَ الْبَيَانِ لَسِحْرٌ

मुझे [ज़ैद बिन असलम] के मालिक ने [अब्दुल्ला बिन उमर] से कहा था; "दो लोग पूरब से आए और उन्होंने ऐसा उपदेश दिया कि लोग उनकी बातों से हैरान रह गए। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फिर कहा: 'बेशक, कुछ बातें जादू की हैं,' या उन्होंने कहा: 'बेशक, कुछ बातें जादू की हैं'।"

इस्लाम में ग़िबा की परिभाषा को समझना

इमाम मलिक : 1565

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ الْوَلِيدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ صَيَّادٍ أَنَّ الْمُطَّلِبَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ حَنْطَبَ الْمَخْزُومِيَّ أَخْبَرَهُأَنَّ رَجُلًا سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا الْغِيبَةُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ تَذْكُرَ مِنْ الْمَرْءِ مَا يَكْرَهُ أَنْ يَسْمَعَ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَإِنْ كَانَ حَقًّا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا قُلْتَ بَاطِلًا فَذَلِكَ الْبُهْتَانُ

मलिक ने मुझे [अल वालिद बिन अब्दुल्लाह बिन शैय्यद] से बताया कि [अल मुथलिब बिन अब्दुल्लाह बिन हंथब अल मखज़ुमी] ने उन्हें बताया कि एक आदमी ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से पूछा, "चुगली करना क्या है?" अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने जवाब दिया: "तुम अपने बारे में कुछ ऐसा कहते हो जिसे सुनना बुरा लगता है।" उस आदमी ने फिर पूछा: "ऐ अल्लाह के रसूल, अगर जो कहा गया है वह सच भी हो?" अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा: "अगर तुम जो कहते हो वह झूठ है, तो वह झूठ है।"

रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दो बातें बताई हैं जो स्वर्ग में प्रवेश का कारण बनती हैं

इमाम मलिक : 1566

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ وَقَاهُ اللَّهُ شَرَّ اثْنَيْنِ وَلَجَ الْجَنَّةَ فَقَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَا تُخْبِرْنَا فَسَكَتَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ عَادَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ مِثْلَ مَقَالَتِهِ الْأُولَى فَقَالَ لَهُ الرَّجُلُ لَا تُخْبِرْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ فَسَكَتَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِثْلَ ذَلِكَ أَيْضًا فَقَالَ الرَّجُلُ لَا تُخْبِرْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِثْلَ ذَلِكَ أَيْضًا ثُمَّ ذَهَبَ الرَّجُلُ يَقُولُ مِثْلَ مَقَالَتِهِ الْأُولَى فَأَسْكَتَهُ رَجُلٌ إِلَى جَنْبِهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ وَقَاهُ اللَّهُ شَرَّ اثْنَيْنِ وَلَجَ الْجَنَّةَ مَا بَيْنَ لَحْيَيْهِ وَمَا بَيْنَ رِجْلَيْهِ مَا بَيْنَ لَحْيَيْهِ وَمَا بَيْنَ رِجْلَيْهِ مَا بَيْنَ لَحْيَيْهِ وَمَا بَيْنَ رِجْلَيْهِ

मलिक ने मुझे [ज़ैद बिन असलम] से [अथा बिन यासर] से बताया कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जिसे अल्लाह दो चीज़ों से बचाएगा, वह जन्नत में जाएगा।" फिर एक आदमी ने कहा; "अल्लाह के रसूल, हमें मत बताओ!" रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चुप रहे, फिर उन्होंने फिर से कहा जैसा उन्होंने पहले कहा था। उस आदमी ने कहा; "अल्लाह के रसूल, हमें मत बताओ!" रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चुप रहे। उन्होंने इसे फिर से दोहराया, फिर उस आदमी ने फिर से कहा; "हमें मत बताओ, अलैहि वसल्लम!" रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फिर से कहा। वह आदमी गया और जैसा उसने पहले कहा था वैसा ही कहा, फिर दूसरे आदमी ने उसे चुप करा दिया। फिर रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई अल्लाह दो चीज़ों की बुराई से बचाएगा, वह ज़रूर जन्नत में जाएगा: जो उसकी दो दाढ़ी (मुंह) के बीच है और जो उसके दो पैरों के बीच है। जो उसकी दो दाढ़ी के बीच है और जो उसके दो पैरों के बीच है। जो उसकी दो दाढ़ी के बीच है और जो उसके दो पैरों के बीच है।"

अबू बकर ने पाप में पड़ने के डर से अपनी जीभ खींच ली

इमाम मलिक : 1567

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِدَخَلَ عَلَى أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ وَهُوَ يَجْبِذُ لِسَانَهُ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ مَهْ غَفَرَ اللَّهُ لَكَ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ إِنَّ هَذَا أَوْرَدَنِي الْمَوَارِدَ

मलिक ने मुझे [ज़ैद बिन असलम] के पिता से याद किया, जिन्होंने कहा, "उमर बिन खत्ताब की मुलाक़ात [अबू बक्र अस सिद्दीक] से तब हुई जब वह अपनी ज़बान खींच रहे थे। उमर ने पूछा: "यह क्या है? अल्लाह तुम्हें माफ़ करे।" अबू बक्र ने कहा: "असल में, यही मुझे बर्बादी की ओर ले जा रहा है।"

किसी तीसरे व्यक्ति के सामने कानाफूसी करने पर प्रतिबंध

इमाम मलिक : 1568

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ قَالَ كُنْتُ أَنَا وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَعِنْدَ دَارِ خَالِدِ بْنِ عُقْبَةَ الَّتِي بِالسُّوقِ فَجَاءَ رَجُلٌ يُرِيدُ أَنْ يُنَاجِيَهُ وَلَيْسَ مَعَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَحَدٌ غَيْرِي وَغَيْرُ الرَّجُلِ الَّذِي يُرِيدُ أَنْ يُنَاجِيَهُ فَدَعَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ رَجُلًا آخَرَ حَتَّى كُنَّا أَرْبَعَةً فَقَالَ لِي وَلِلرَّجُلِ الَّذِي دَعَاهُ اسْتَأْخِرَا شَيْئًا فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَتَنَاجَى اثْنَانِ دُونَ وَاحِدٍ

मुझे बताया था कि [अब्दुल्ला बिन दिनार] के मालिक ने कहा; "[अब्दुल्ला बिन उमर] और मैं खालिद बिन उकबा के घर पर थे जो बाज़ार में था। एक आदमी आया और उनसे कानाफूसी करना चाहता था, जबकि उस समय अब्दुल्ला बिन उमर के साथ मेरे और उस नौजवान के अलावा कोई नहीं था जो कानाफूसी करना चाहता था। तो अब्दुल्ला बिन उमर ने एक और आदमी को बुलाया ताकि हम चार लोग हो जाएं। फिर अब्दुल्ला बिन उमर ने मुझसे और उस आदमी से कहा; 'थोड़ा पीछे जाओ, मैंने रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कहते सुना है: 'दो लोग एक दूसरे के बिना कानाफूसी न करें।'"

दो व्यक्तियों के बीच कानाफूसी पर प्रतिबन्ध

इमाम मलिक : 1569

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا كَانَ ثَلَاثَةٌ فَلَا يَتَنَاجَى اثْنَانِ دُونَ وَاحِدٍ

मलिक (नफी) ने मुझे (अब्दुल्ला बिन उमर) बताया कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "अगर तीन लोग (इकट्ठा) हों, तो उनमें से कोई भी दूसरे को शामिल किए बिना कानाफूसी न करे।"

क्या अपनी पत्नी से झूठ बोलना ठीक है?

इमाम मलिक : 1570

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍأَنَّ رَجُلًا قَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَكْذِبُ امْرَأَتِي يَا رَسُولَ اللَّهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا خَيْرَ فِي الْكَذِبِ فَقَالَ الرَّجُلُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَعِدُهَا وَأَقُولُ لَهَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا جُنَاحَ عَلَيْكَ

मुझे बताया गया है कि मलिक [शफ़वान बिन सुलेमान] ने कहा, "एक आदमी ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा; "मैं अपनी पत्नी से झूठ बोलूंगा, ऐ रसूलल्लाह।" रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "झूठ बोलने में कोई भलाई नहीं है।" कहा: "तुम्हारे लिए कोई गुनाह नहीं है।"

एक आस्तिक सावधान और नकारात्मक हो सकता है, लेकिन झूठा नहीं

इमाम मलिक : 1571

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ أَنَّهُ قَالَقِيلَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيَكُونُ الْمُؤْمِنُ جَبَانًا فَقَالَ نَعَمْ فَقِيلَ لَهُ أَيَكُونُ الْمُؤْمِنُ بَخِيلًا فَقَالَ نَعَمْ فَقِيلَ لَهُ أَيَكُونُ الْمُؤْمِنُ كَذَّابًا فَقَالَ لَا

मुझे बताया था कि मलिक (शफ़वान बिन सुलेमान) ने कहा; "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) से पूछा गया, "क्या कोई मोमिन कायर हो सकता है?" उन्होंने जवाब दिया: 'हाँ।" फिर दोबारा पूछा; "क्या कोई मोमिन राजदंड हो सकता है?" उन्होंने जवाब दिया: "हाँ।" फिर दोबारा पूछा; "क्या कोई मोमिन झूठा हो सकता है?" उन्होंने जवाब दिया: "नहीं।"

तीन चीज़ें जिनसे परमेश्‍वर घृणा करता है

इमाम मलिक : 1572

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ اللَّهَ يَرْضَى لَكُمْ ثَلَاثًا وَيَسْخَطُ لَكُمْ ثَلَاثًا يَرْضَى لَكُمْ أَنْ تَعْبُدُوهُ وَلَا تُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا وَأَنْ تَعْتَصِمُوا بِحَبْلِ اللَّهِ جَمِيعًا وَأَنْ تَنَاصَحُوا مَنْ وَلَّاهُ اللَّهُ أَمْرَكُمْ وَيَسْخَطُ لَكُمْ قِيلَ وَقَالَ وَإِضَاعَةَ الْمَالِ وَكَثْرَةَ السُّؤَالِ

मलिक ने मुझे [सुहैल बिन अबू सलीह] से [उनके पिता] से [अबू हुरैरा] तक बताया कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "अल्लाह तुमसे तीन चीज़ों के लिए खुश होता है और तीन चीज़ों के लिए तुमसे नफ़रत करता है। वह तुमसे खुश होता है अगर: तुम उसकी इबादत करो और उसके साथ किसी को साझी न ठहराओ, तुम अल्लाह के दीन की रस्सी को एक साथ मज़बूती से थामे रहो और एक दूसरे को उन लोगों के बारे में सलाह दो जिन्हें अल्लाह ने तुम्हारे मामलों पर निगरानी दी है। वह नफ़रत करता है अगर: तुम बहुत ज़्यादा बातें करो, अपना माल बर्बाद करो और बहुत ज़्यादा सवाल पूछो।"

दो-मुँहा होने का निषेध

इमाम मलिक : 1573

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مِنْ شَرِّ النَّاسِ ذُو الْوَجْهَيْنِ الَّذِي يَأْتِي هَؤُلَاءِ بِوَجْهٍ وَهَؤُلَاءِ بِوَجْهٍ

मलिक ने मुझे [अबू अज़ ज़िनाद] से [अल अराज] से [अबू हुरैरा] से बताया कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "सबसे बुरा इंसान वह है जो दो-मुँहा होता है। वह कुछ लोगों के पास एक मुँह से आता है, और दूसरों के पास दूसरे मुँह से आता है।"

समाज के लिए वह शक्ति जो उत्कृष्ट संभावनाओं को जन्म देती है

इमाम मलिक : 1574

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ أَبِي حَكِيمٍ أَنَّهُ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ عَبْدِ الْعَزِيزِ يَقُولُكَانَ يُقَالُ إِنَّ اللَّهَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى لَا يُعَذِّبُ الْعَامَّةَ بِذَنْبِ الْخَاصَّةِ وَلَكِنْ إِذَا عُمِلَ الْمُنْكَرُ جِهَارًا اسْتَحَقُّوا الْعُقُوبَةَ كُلُّهُمْ

मलिक ने मुझे [इस्माईल बिन अबू हकीम] से बताया कि उसने [उमर बिन अब्दुल अज़ीज़] को यह कहते सुना: "कहा जाता है कि अल्लाह तबारक व तआला आम तौर पर लोगों को खास गुनाहों के लिए सज़ा नहीं देगा, लेकिन अगर बुराई खुलेआम की जाए, तो वे सभी सज़ा के लायक हैं।"

उमर बिन खत्ताब के अपने लिए शब्द

इमाम मलिक : 1575

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِوَخَرَجْتُ مَعَهُ حَتَّى دَخَلَ حَائِطًا فَسَمِعْتُهُ وَهُوَ يَقُولُ وَبَيْنِي وَبَيْنَهُ جِدَارٌ وَهُوَ فِي جَوْفِ الْحَائِطِ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ أَمِيرُ الْمُؤْمِنِينَ بَخٍ بَخٍ وَاللَّهِ لَتَتَّقِيَنَّ اللَّهَ أَوْ لَيُعَذِّبَنَّكَ

मुझे बताया गया है कि मलिक (इसहाक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहा) ने (अनस बिन मलिक) कहा; "जब मैं (उमर बिन खत्ताब अमीरुल मुकमिनिन) के साथ बाहर गया, यहाँ तक कि एक इमारत तक पहुँच गया, तो मैंने उसे यह कहते सुना, जबकि उस समय मेरे और उसके बीच एक दीवार थी, वह इमारत के अंत में था, "अच्छा, अच्छा! अल्लाह की कसम, अल्लाह से डरो (ओ उमर), वरना वह तुम्हें सज़ा देगा।"

जब आप गड़गड़ाहट सुनें तो प्रार्थना पढ़ें

इमाम मलिक : 1576

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَامِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِأَنَّهُ كَانَ إِذَا سَمِعَ الرَّعْدَ تَرَكَ الْحَدِيثَ وَقَالَ سُبْحَانَ الَّذِي يُسَبِّحُ الرَّعْدُ بِحَمْدِهِ وَالْمَلَائِكَةُ مِنْ خِيفَتِهِ ثُمَّ يَقُولُ إِنَّ هَذَا لَوَعِيدٌ لِأَهْلِ الْأَرْضِ شَدِيدٌ

मलिक ने मुझे ['अमीर बिन अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर] से बताया कि जब वह गरजने की आवाज़ सुनते थे, तो बातचीत छोड़ देते थे और कहते थे: "पवित्र अल्लाह है, जिसकी गरज अपनी तारीफ़ से पवित्र करती है और उन फ़रिश्तों को जो उससे डरते हैं।" फिर उन्होंने कहा: "बेशक, यह धरती के रहने वालों के लिए एक कड़ी चेतावनी है।"

पैगम्बर की विरासत दान है

इमाम मलिक : 1577

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَأَنَّ أَزْوَاجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرَدْنَ أَنْ يَبْعَثْنَ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ إِلَى أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ فَيَسْأَلْنَهُ مِيرَاثَهُنَّ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ لَهُنَّ عَائِشَةُ أَلَيْسَ قَدْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا فَهُوَ صَدَقَةٌ

मलिक ने मुझे [इब्न शिहाब] से [उरवाह बिन ज़ुबैर] से [ऐस्या] उम्मुल मुकमिनीन से बताया कि जब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मौत हुई, तो उनकी पत्नियाँ उस्मान बिन अफ़्फ़ान को अबू बक्र अस शिद्दीक के पास भेजना चाहती थीं ताकि वे रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अपनी विरासत के बारे में पूछ सकें। तो आयशा ने उनसे कहा; "क्या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह नहीं कहा था: "हम जो पीछे छोड़ते हैं, वह हमें विरासत में नहीं मिलता। हम जो पीछे छोड़ते हैं वह दान है।"

पैगम्बर का खजाना मृत्यु के बाद दान बन गया

इमाम मलिक : 1578

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَقْتَسِمُ وَرَثَتِي دَنَانِيرَ مَا تَرَكْتُ بَعْدَ نَفَقَةِ نِسَائِي وَمَئُونَةِ عَامِلِي فَهُوَ صَدَقَةٌ

मुझे मलिक (अबू अज़ ज़िनद) ने (अल अरज) से (अबू हुरैरा) बताया है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "मेरे वारिसों को दीनार नहीं मिलेंगे। मेरी पत्नियों के गुज़ारे और मेरे मज़दूरों की मज़दूरी के बाद जो कुछ मेरे पास बचा है, वह खैरात है।"

आदम के बच्चों की आग नरक की आग का हिस्सा है

इमाम मलिक : 1579

حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ نَارُ بَنِي آدَمَ الَّتِي يُوقِدُونَ جُزْءٌ مِنْ سَبْعِينَ جُزْءًا مِنْ نَارِ جَهَنَّمَ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنْ كَانَتْ لَكَافِيَةً قَالَ إِنَّهَا فُضِّلَتْ عَلَيْهَا بِتِسْعَةٍ وَسِتِّينَ جُزْءًا

मुझे मलिक ने [अबू अज़ ज़िनाद] से [अल अराज] से [अबू हुरैरा] से बताया है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहा: "आदम की औलाद की आग जो वे जलाते हैं, वह जहन्नम की आग के सत्तर हिस्सों में से एक हिस्सा है।" साथियों ने पूछा, "अल्लाह के रसूल, अगर वह होती, तो वह काफी होता।" उन्होंने जवाब दिया: "बेशक, जहन्नम की आग उनसठ हिस्सों से बेहतर है।"

नरक की आग का चित्र

इमाम मलिक : 1580

و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَمِّهِ أَبِي سُهَيْلِ بْنِ مَالِكٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّهُ قَالَأَتُرَوْنَهَا حَمْرَاءَ كَنَارِكُمْ هَذِهِ لَهِيَ أَسْوَدُ مِنْ الْقَارِ وَالْقَارُ الزِّفْتُ

मलिक ने मुझे अपने चाचा [अबू सुहैल बिन मलिक] से [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] से बताया, जिन्होंने कहा, "क्या आपको लगता है कि नरक की आग आपकी इस आग की तरह लाल है? वास्तव में नरक की आग अल-क़र से अधिक काली है।" अल-क़र टार है।