Imam Malik : 1561
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍأَنَّ عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ لَقِيَ خِنْزِيرًا بِالطَّرِيقِ فَقَالَ لَهُ انْفُذْ بِسَلَامٍ فَقِيلَ لَهُ تَقُولُ هَذَا لِخِنْزِيرٍ فَقَالَ عِيسَى ابْنُ مَرْيَمَ إِنِّي أَخَافُ أَنْ أُعَوِّدَ لِسَانِي الْمَنْطِقَ بِالسُّوءِ
ई बात हमसे संबंधित है कि [यह्या बिन सईद] से मलिक कहिन, 'ईसा बिन मरियम एक सड़क पर एक सुअर से मिले, फिर उ कहिन: 'सुरक्षित रूप से गुजरौ! ' केहू पूछिस; 'तुम सुअर से अइसने बोलत हौ! ' ईसा बिन मरियम ने जवाब दिया: 'मुझे डर है कि मेरी जीभ गंदे शब्द कहने के आदत पड़ जाय'।
Imam Malik : 1562
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عَلْقَمَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ بِلَالِ بْنِ الْحَارِثِ الْمُزَنِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ الرَّجُلَ لَيَتَكَلَّمُ بِالْكَلِمَةِ مِنْ رِضْوَانِ اللَّهِ مَا كَانَ يَظُنُّ أَنْ تَبْلُغَ مَا بَلَغَتْ يَكْتُبُ اللَّهُ لَهُ بِهَا رِضْوَانَهُ إِلَى يَوْمِ يَلْقَاهُ وَإِنَّ الرَّجُلَ لَيَتَكَلَّمُ بِالْكَلِمَةِ مِنْ سَخَطِ اللَّهِ مَا كَانَ يَظُنُّ أَنْ تَبْلُغَ مَا بَلَغَتْ يَكْتُبُ اللَّهُ لَهُ بِهَا سَخَطَهُ إِلَى يَوْمِ يَلْقَاهُ
मलिक ने [मुहम्मद बिन अमरू बिन अलकामह] से [अपने पिता] से [बिलाल बिन अल हारिस अल मुजानी] से बतावा है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'एक आदमी ने एक वाक्य कहा जो अल्लाह द्वारा अनुमोदित किया गया था, जबकि वह नहीं जानत रहा कि वाक्य कितना बड़ा रहा, तो उ वाक्य के साथ अल्लाह ने अपने दिन मंजूरी तक दर्ज किया फैसला। एक मनई भी रहा जे एक वाक्य कहिस जेसे अल्लाह नाराज रहा, जबकि ओका पता नाहीं रहा कि ऊ वाक्य केतना बड़ा रहा, जेहिसे अल्लाह ओकरे लिए आपन कोप कायामत तक दर्ज किहिस।'
Imam Malik : 1563
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ السَّمَّانِ أَنَّهُ أَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَإِنَّ الرَّجُلَ لَيَتَكَلَّمُ بِالْكَلِمَةِ مَا يُلْقِي لَهَا بَالًا يَهْوِي بِهَا فِي نَارِ جَهَنَّمَ وَإِنَّ الرَّجُلَ لَيَتَكَلَّمُ بِالْكَلِمَةِ مَا يُلْقِي لَهَا بَالًا يَرْفَعُهُ اللَّهُ بِهَا فِي الْجَنَّةِ
मलिक ने [अब्दुल्लाह बिन दीनार] से [अबू सालिह अस सम्मान] से बतावा कि उ ओनका रिपोर्ट किहिन, कि [अबू हुरैरा] कहिन, 'वास्तव मा एक आदमी एक वाक्य कहिहै जेका उ तुच्छ समझत है, लेकिन वहिके बजाय ओका जहानम के नरक मा भेजत है। अऊर सचमुच एक मनई एक वाक्य कही जेका ऊ मामूली समझत है, लेकिन ऊ वाक्य ओका स्वर्ग मा भेज देई'।
Imam Malik : 1564
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَقَدِمَ رَجُلَانِ مِنْ الْمَشْرِقِ فَخَطَبَا فَعَجِبَ النَّاسُ لِبَيَانِهِمَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ مِنْ الْبَيَانِ لَسِحْرًا أَوْ قَالَ إِنَّ بَعْضَ الْبَيَانِ لَسِحْرٌ
[जैद बिन असलम] से [अब्दुल्ला बिन उमर] से मलिक कहिन; 'दुई मनई पूरब से आए अऊर उइ एक उपदेश दिहिन कि लोग ओनके व्याख्या से चकित होइ गें, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब कहिन: 'वास्तव मा कुछ व्याख्या जादू हैं,' या उ कहिन: 'वास्तव मा कुछ व्याख्या जादू हैं''।
Imam Malik : 1565
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ الْوَلِيدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ صَيَّادٍ أَنَّ الْمُطَّلِبَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ حَنْطَبَ الْمَخْزُومِيَّ أَخْبَرَهُأَنَّ رَجُلًا سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا الْغِيبَةُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ تَذْكُرَ مِنْ الْمَرْءِ مَا يَكْرَهُ أَنْ يَسْمَعَ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَإِنْ كَانَ حَقًّا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا قُلْتَ بَاطِلًا فَذَلِكَ الْبُهْتَانُ
मलिक ने [अल वालिद बिन अब्दुल्ला बिन शैयद] से मुझसे कहा कि [अल मुथल्लिब बिन अब्दुल्ला बिन हंथब अल मखजुमी] उन्होंन उनसे रिपोर्ट की, कि एक आदमी रहा जे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछिस, 'पिठबंधन का है?' रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम तब जवाब दिहिन: 'तुम केहू से कुछ अइसन कहत हौ जेका सुनै से उ नफरत करत हौ'। ऊ आदमी फिर से पूछिस; 'हे रसूल अल्लाह भले ही जो कहा गया है वो सच हो' रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु 'अलेहि वसल्लम ने कहा: 'अगर आप जो कहते हैं वह झूठ है तो वह झूठ है'।
Imam Malik : 1566
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ وَقَاهُ اللَّهُ شَرَّ اثْنَيْنِ وَلَجَ الْجَنَّةَ فَقَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَا تُخْبِرْنَا فَسَكَتَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ عَادَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ مِثْلَ مَقَالَتِهِ الْأُولَى فَقَالَ لَهُ الرَّجُلُ لَا تُخْبِرْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ فَسَكَتَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِثْلَ ذَلِكَ أَيْضًا فَقَالَ الرَّجُلُ لَا تُخْبِرْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِثْلَ ذَلِكَ أَيْضًا ثُمَّ ذَهَبَ الرَّجُلُ يَقُولُ مِثْلَ مَقَالَتِهِ الْأُولَى فَأَسْكَتَهُ رَجُلٌ إِلَى جَنْبِهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ وَقَاهُ اللَّهُ شَرَّ اثْنَيْنِ وَلَجَ الْجَنَّةَ مَا بَيْنَ لَحْيَيْهِ وَمَا بَيْنَ رِجْلَيْهِ مَا بَيْنَ لَحْيَيْهِ وَمَا بَيْنَ رِجْلَيْهِ مَا بَيْنَ لَحْيَيْهِ وَمَا بَيْنَ رِجْلَيْهِ
मलिक ने [जैद बिन असलम] से [अथा बिन यासर] से बताया कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह जेका दुई चीजन से बचावै, उ जन्नत मा घुस जाई'। तब एक मनई कहिस; 'हे अल्लाह के रसूल हमसे मत बताओ! ' रसूलुल्लाह शाल्लल्लाहु 'अलेहि वसल्लम चुप रहे, फिर उन्होंने फिर कहा जैसा कि उन्होंने पहले कहा था। ऊ मनई कहिस; 'हमसे मत बताओ हे अल्लाह के रसूल! ' रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चुप रहे। ऊ फिर से दोहराइस, फिर ऊ आदमी फिर से कहिस; 'हमसे मत बताओ हे अल्लाह के रसूल! ' रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फिर से कहा। ऊ मनई जाके कहिस जइसे ऊ पहिले कहिस रहा, फिर दूसर मनई ओका चुप कराइन। फिर रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह जेका दुइ चीजन के बुराई से बचावै, उ निश्चित रूप से स्वर्ग मा घुस जाई: जवन ओकरे दुइ दाढ़ी के बीच है - ओकर मुँह - अऊर जवन ओकरे गोड़न के बीच है। ओकरे दुइ दाढ़ी के बीच का है अऊर का गोड़न के बीच मा है। ओकर दाढ़ी के बीच का है अऊर ओकर गोड़न के बीच का है'।
Imam Malik : 1567
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِدَخَلَ عَلَى أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ وَهُوَ يَجْبِذُ لِسَانَهُ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ مَهْ غَفَرَ اللَّهُ لَكَ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ إِنَّ هَذَا أَوْرَدَنِي الْمَوَارِدَ
मोका बतावा गा है कि [जैद बिन असलम] से [अपने पिता] से मलिक कहिन, 'उमर बिन खत्ताब [अबू बकर अस सिद्दीक] से तब मिले जब उ आपन जीभ निकालत रहें। उमर ने पूछा; 'यहु। अल्लाह तोहका माफ करै'। अबू बकर कहिन; 'वास्तव मा ई वही है जवन मोका विनाश के ओर ले जात है'।
Imam Malik : 1568
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ قَالَ كُنْتُ أَنَا وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَعِنْدَ دَارِ خَالِدِ بْنِ عُقْبَةَ الَّتِي بِالسُّوقِ فَجَاءَ رَجُلٌ يُرِيدُ أَنْ يُنَاجِيَهُ وَلَيْسَ مَعَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَحَدٌ غَيْرِي وَغَيْرُ الرَّجُلِ الَّذِي يُرِيدُ أَنْ يُنَاجِيَهُ فَدَعَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ رَجُلًا آخَرَ حَتَّى كُنَّا أَرْبَعَةً فَقَالَ لِي وَلِلرَّجُلِ الَّذِي دَعَاهُ اسْتَأْخِرَا شَيْئًا فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَتَنَاجَى اثْنَانِ دُونَ وَاحِدٍ
[अब्दुल्ला बिन दीनार] से मलिक कहिन रहैं; 'मैं अऊर [अब्दुल्ला बिन उमर] खालिद बिन उकबा के घरे रहेन जवन बाजार मा है। एक मनई आवा अऊर ओनके साथे फुसफुसाहट करै चाहत रहा, जबकि उ समय अब्दुल्ला बिन उमर के साथे हमरे अऊर फुसफुसावै वाले जवान के अलावा केहू नाहीं रहा। तौ अब्दुल्ला बिन उमर एक अउर मनई का बोलाइन तौ हम चार जने रहेन। तब अब्दुल्ला बिन उमर ने तब मुझसे और उस व्यक्ति से कहा जिसे उन्होंने बोलाया; 'थोड़ा पीछे जाओ, हमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुना है: 'दू लोग एक दूसरे के बिना एक दूसरे से फुसफुसाने न दें'।
Imam Malik : 1569
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا كَانَ ثَلَاثَةٌ فَلَا يَتَنَاجَى اثْنَانِ دُونَ وَاحِدٍ
[नफी'] से मलिक ने [अब्दुल्लाह बिन उमर] से बताया कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अगर तीन लोग -इकट्ठा हो रहे हैं-, तो दूसरे को शामिल किए बिना दोनों को फुसफुसाने न दें'।
Imam Malik : 1570
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍأَنَّ رَجُلًا قَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَكْذِبُ امْرَأَتِي يَا رَسُولَ اللَّهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا خَيْرَ فِي الْكَذِبِ فَقَالَ الرَّجُلُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَعِدُهَا وَأَقُولُ لَهَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا جُنَاحَ عَلَيْكَ
ई बात मुझसे संबंधित है कि [शफवान बिन सुलेम] से मलिक ने कहा, 'एक आदमी ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा; 'मैं अपनी पत्नी से झूठ बोलूँगा, हे अल्लाह के रसूल'। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'झूठ बोलने में कोई भलाई नहीं है' व्यक्ति ने कहा; 'हे अल्लाह के रसूल, हम उनसे वादा किहे रहेन अऊर हम ओका व्यक्त करब'। तो पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'तुम्हारे लिए कोई पाप नहीं है'।
Imam Malik : 1571
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ أَنَّهُ قَالَقِيلَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيَكُونُ الْمُؤْمِنُ جَبَانًا فَقَالَ نَعَمْ فَقِيلَ لَهُ أَيَكُونُ الْمُؤْمِنُ بَخِيلًا فَقَالَ نَعَمْ فَقِيلَ لَهُ أَيَكُونُ الْمُؤْمِنُ كَذَّابًا فَقَالَ لَا
[शफवान बिन सुलेम] से मलिक ने बताया था; 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा गया कि का एक मोमिन कायर हो सकत है?' उ जवाब दिहिन: 'हाँ'। फिरि पूछिन; 'का आस्तिक खुल सकत है?' उ जवाब दिहिन: 'हाँ'। फिरि पूछिन; 'का एक आस्तिक झूठा होइ सकत है?' उ जवाब दिहिन: 'नहीं'।
Imam Malik : 1572
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ اللَّهَ يَرْضَى لَكُمْ ثَلَاثًا وَيَسْخَطُ لَكُمْ ثَلَاثًا يَرْضَى لَكُمْ أَنْ تَعْبُدُوهُ وَلَا تُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا وَأَنْ تَعْتَصِمُوا بِحَبْلِ اللَّهِ جَمِيعًا وَأَنْ تَنَاصَحُوا مَنْ وَلَّاهُ اللَّهُ أَمْرَكُمْ وَيَسْخَطُ لَكُمْ قِيلَ وَقَالَ وَإِضَاعَةَ الْمَالِ وَكَثْرَةَ السُّؤَالِ
मलिक ने [सुहैल बिन अबू सलीह] से [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] से कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह तीन चीजन से तोहसे खुश है अऊर तीन चीजन से तोहसे नफरत करत है। आप प्रसन्न होइहैं अगर: आप ओनके पूजा करत हैं अऊर ओनके साथ कुछौ नाहीं जोड़त हैं, आप अल्लाह के धर्म के रस्सियन का एक साथ मजबूती से पकड़त हैं अऊर एक दूसरे का ओ व्यक्ति के बारे मा सलाह देत हैं जेका अल्लाह आपके कामन के रखवाली दिहिस है। अगर तोहसे नफरत है; बहुत बात करत, पैसा बर्बाद करत अऊर बहुत सारा सवाल पूछत।
Imam Malik : 1573
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مِنْ شَرِّ النَّاسِ ذُو الْوَجْهَيْنِ الَّذِي يَأْتِي هَؤُلَاءِ بِوَجْهٍ وَهَؤُلَاءِ بِوَجْهٍ
मलिक ने [अबू अज जिनाद] से [अल अराज] से [अबू हुरैराह] से कहा कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा: 'सबसे बुरा इंसान एक दो चेहरा वाला व्यक्ति है। कुछ लोगन के पास एक चेहरा से आवत है, अऊर कुछ लोगन के पास दूसर चेहरा से आवत है'।
Imam Malik : 1574
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ أَبِي حَكِيمٍ أَنَّهُ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ عَبْدِ الْعَزِيزِ يَقُولُكَانَ يُقَالُ إِنَّ اللَّهَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى لَا يُعَذِّبُ الْعَامَّةَ بِذَنْبِ الْخَاصَّةِ وَلَكِنْ إِذَا عُمِلَ الْمُنْكَرُ جِهَارًا اسْتَحَقُّوا الْعُقُوبَةَ كُلُّهُمْ
मलिक ने [इस्माइल बिन अबू हकीम] से मुझसे कहा कि उ [उमर बिन अब्दुल अजीस] का कहते सुने हैं: 'कहा जात है कि अल्लाह तबराक वा तआला विशिष्ट पापन के लिए आम तौर पर लोगन का यातना नाहीं देई, लेकिन अगर बुराई खुलेआम कीन जात है, तौ ओन सबका सजा पावै का अधिकार है'।
Imam Malik : 1575
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِوَخَرَجْتُ مَعَهُ حَتَّى دَخَلَ حَائِطًا فَسَمِعْتُهُ وَهُوَ يَقُولُ وَبَيْنِي وَبَيْنَهُ جِدَارٌ وَهُوَ فِي جَوْفِ الْحَائِطِ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ أَمِيرُ الْمُؤْمِنِينَ بَخٍ بَخٍ وَاللَّهِ لَتَتَّقِيَنَّ اللَّهَ أَوْ لَيُعَذِّبَنَّكَ
मोका बतावा गा है कि [इशाक बिन अब्दुल्ला बिन अबू तल्हा] से मलिक [अनस बिन मलिक] से कहिन; 'जब हम [उमर बिन खत्ताब अमीरुल मुकमिनिन] के साथे बाहर गयेन जब तक हम एक इमारत तक नाहीं पहुँचेन, त हम ओनका कहत सुने रहेन, जबकि उ समय हमरे अऊर ओनके बीच एक दीवार रही, उ इमारत के अंत मा रहे, 'अच्छा, अच्छा! अल्लाह के कसम, अल्लाह से डरो -हे उमर-, नाहीं त उ तोहका यातना देई'।
Imam Malik : 1576
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَامِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِأَنَّهُ كَانَ إِذَا سَمِعَ الرَّعْدَ تَرَكَ الْحَدِيثَ وَقَالَ سُبْحَانَ الَّذِي يُسَبِّحُ الرَّعْدُ بِحَمْدِهِ وَالْمَلَائِكَةُ مِنْ خِيفَتِهِ ثُمَّ يَقُولُ إِنَّ هَذَا لَوَعِيدٌ لِأَهْلِ الْأَرْضِ شَدِيدٌ
मलिक ने ['अमीर बिन अब्दुल्ला बिन जुबैर] से मुझसे कहा कि अगर उ गरज के आवाज सुनत है, तौ उ बातचीत छोड़ देत है अऊर पढ़त है; 'सुभाना अल्लादज़ी युसबिहु र'दु बी हमदीहि वा अल मलैकातु मिन खिफातिहि।-महिमा अल्लाह का हो, जे गरज के साथ अपनी स्तुति अऊर स्वर्गदूतन से पवित्र होत है जे ओसे डरत हैं-'। तब उ कहिन; 'वास्तव मा ई धरती के निवासियन के लिए एक कठोर चेतावनी है'।
Imam Malik : 1577
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَأَنَّ أَزْوَاجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرَدْنَ أَنْ يَبْعَثْنَ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ إِلَى أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ فَيَسْأَلْنَهُ مِيرَاثَهُنَّ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ لَهُنَّ عَائِشَةُ أَلَيْسَ قَدْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا فَهُوَ صَدَقَةٌ
मलिक ने [इब्न शिहाब] से ['उर्वाह बिन जुबैर] से [ऐस्याह] उम्मुल मुकमिनिन से बतावा कि पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के पत्नियन जब पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के मउत होइ गै, तौ उ उथमान बिन अफ़्फान का अबूबक बकरा भेजै चाहत रहें, जेहिमा उ आपन शिकार से रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम। त आयशा ओनसे कहिस; 'क्या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नहीं कहा था: 'हम जो पीछे छोड़ते हैं, हम वारिस नहीं पाते हैं। हम जवन पीछे छोड़ित है ऊ भिक्षा है'।
Imam Malik : 1578
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَقْتَسِمُ وَرَثَتِي دَنَانِيرَ مَا تَرَكْتُ بَعْدَ نَفَقَةِ نِسَائِي وَمَئُونَةِ عَامِلِي فَهُوَ صَدَقَةٌ
मलिक ने [अबू अज जिनाद] से [अल अराज] से [अबू हुरैरा] से कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मेरे वारिस दिनार का वारिस नहीं हैं। अपनी मेहरारून के भरण-पोषण अऊर अपने मजदूरन के मजदूरी के बाद जउन कुछ बचा है, ऊ भिक्षा है।
Imam Malik : 1579
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ نَارُ بَنِي آدَمَ الَّتِي يُوقِدُونَ جُزْءٌ مِنْ سَبْعِينَ جُزْءًا مِنْ نَارِ جَهَنَّمَ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنْ كَانَتْ لَكَافِيَةً قَالَ إِنَّهَا فُضِّلَتْ عَلَيْهَا بِتِسْعَةٍ وَسِتِّينَ جُزْءًا
[अबू अज़ जिनाद] से [अल अराज] से [अबू हुरैराह] से मलिक द्वारा मोका बतावा गा है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कहिन: 'आदम के संतानन के आग जेका उ प्रज्वलित करत हैं, उ जहानाम के नरक के आग के सत्तर भागन का एक हिस्सा है'। साथियन ने पूछा, 'हे अल्लाह के रसूल, अगर उहै होत, तौ वाकई उहै काफी होत'। उ उत्तर दिहिन: 'सचमुच, नरक के अग्नि उनसठ भागन से श्रेष्ठ है'।
Imam Malik : 1580
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَمِّهِ أَبِي سُهَيْلِ بْنِ مَالِكٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّهُ قَالَأَتُرَوْنَهَا حَمْرَاءَ كَنَارِكُمْ هَذِهِ لَهِيَ أَسْوَدُ مِنْ الْقَارِ وَالْقَارُ الزِّفْتُ
मलिक ने मुझसे अपने चाचा [अबू सुहैल बिन मलिक] से [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] से कहा, 'का तुमने सोचा कि जहन्नाम का आग तोहार आग के तरह लाल रहा? सचमुच, जहन्नाम के आग अल कार' से भी काली है। अल कार टार है।