Imam Malik : 1541
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِقَالَ لِرَجُلٍ مَا اسْمُكَ فَقَالَ جَمْرَةُ فَقَالَ ابْنُ مَنْ فَقَالَ ابْنُ شِهَابٍ قَالَ مِمَّنْ قَالَ مِنْ الْحُرَقَةِ قَالَ أَيْنَ مَسْكَنُكَ قَالَ بِحَرَّةِ النَّارِ قَالَ بِأَيِّهَا قَالَ بِذَاتِ لَظًى قَالَ عُمَرُ أَدْرِكْ أَهْلَكَ فَقَدْ احْتَرَقُواقَالَ فَكَانَ كَمَا قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ
मलिक हमरा [याह्या बिन सईद] स कहलथि जे [उमर बिन खत्ताब] एकटा आदमी स पूछलथि; 'अहाँ की नाम अछि?' ओ आदमी उत्तर देलक, 'जमराह'। उमर फेर पुछलखिन-ककर बच्चा? ओ आदमी उत्तर देलक, 'स्यहाबक बेटा'। उमर फेर पुछलथिन्ह - कोन जनजाति सँ ? ओ आदमी उत्तर देलक, 'हुर्काह सँ -जरि गेल-'। तखन उमर फेर पुछलथिन्ह - अहाँ कतय रहैत छी ? ओ आदमी उत्तर देलक। 'हररातिन नर -आगि के गाम-,' ओ फेर पुछलखिन, 'कोन भाग मे?' ओ आदमी उत्तर देलक, 'द्ज़ातु लाझाक इलाका मे -जखन लौ अछि-'। उमर तखन कहलनि; 'अपन परिवार लग जाउ, सत्ते जरा देल गेल अछि'। याह्या बिन सैद कहलनि, 'तखन उमर रदलिअल्लाहु 'अनहु' हमरा सभ केँ कहलनि जेकाँ भेल।'
Imam Malik : 1542
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّهُ قَالَاحْتَجَمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَجَمَهُ أَبُو طَيْبَةَ فَأَمَرَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِصَاعٍ مِنْ تَمْرٍ وَأَمَرَ أَهْلَهُ أَنْ يُخَفِّفُوا عَنْهُ مِنْ خَرَاجِهِ
मलिक हमरा [हुमैद अथ थाविल] स [अनस बिन मलिक] स कहलथि जे ओ कहलथि, 'रसुलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसलम हजम केलथि, जखन कि जे कपिंग क रहल छलाह ओ अबू थाइबाह छलाह, तखन रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम हुनका एक शा' खजूर देलथि, आ अपन परिवार कए कहलथि जे अपन कर क बोझ हल्का करू'।
Imam Malik : 1543
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ ابْنِ مُحَيِّصَةَ الْأَنْصَارِيِّ أَحَدِ بَنِي حَارِثَةَأَنَّهُ اسْتَأْذَنَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي إِجَارَةِ الْحَجَّامِ فَنَهَاهُ عَنْهَا فَلَمْ يَزَلْ يَسْأَلُهُ وَيَسْتَأْذِنُهُ حَتَّى قَالَ اعْلِفْهُ نُضَّاحَكَ يَعْنِي رَقِيقَكَ
मलिक हमरा [इब्नु शिहाब] स बनि हरिसा के सदस्य [इब्नु मुहैशाह अल अंसारी] स बतौलनि, ओ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स हजम मजदूर के मजदूरी के संबंध में अनुमति मंगलखिन, तखन ओ एकरा मना क देलखिन। तेँ ओ हुनकासँ ताबत धरि माँगैत रहलाह आ अनुमति मँगैत रहलाह जाबत धरि ओ नहि बजलाह : 'अपन दास केँ द' दियौक'।
Imam Malik : 1544
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَرَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُشِيرُ إِلَى الْمَشْرِقِ وَيَقُولُ هَا إِنَّ الْفِتْنَةَ هَاهُنَا إِنَّ الْفِتْنَةَ هَاهُنَا مِنْ حَيْثُ يَطْلُعُ قَرْنُ الشَّيْطَانِ
हमरा कहल गेल अछि जे [अब्दुल्लाह बिन दिनार] सँ मलिक [अब्दुल्लाह बिन उमर] सँ कहलनि; 'हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पूरब के तरफ इशारा करैत देखलहुं आ कहैत छलाह: 'वास्तव में फितनाह ओतय सं अछि, सचमुच फितनाह ओतय सं अछि, ओहि ठाम सं अछि जतय शैतान के सींग प्रकट होइत अछि''.
Imam Malik : 1545
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ أَبِي لُبَابَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ قَتْلِ الْحَيَّاتِ الَّتِي فِي الْبُيُوتِ
मालिक हमरा [नाफी’] स [अबू लुबाबा] स बतेलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम घर मे साँप मारबा स मना केलथि।
Imam Malik : 1546
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ سَائِبَةَ مَوْلَاةٍ لِعَائِشَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ قَتْلِ الْجِنَّانِ الَّتِي فِي الْبُيُوتِ إِلَّا ذَا الطُّفْيَتَيْنِ وَالْأَبْتَرَ فَإِنَّهُمَا يَخْطِفَانِ الْبَصَرَ وَيَطْرَحَانِ مَا فِي بُطُونِ النِّسَاءِ
मलिक हमरा [स`इबाह] पूर्व दासी आइशा सँ [नफी’] सँ कहलनि जे, अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम घर मे छोट-छोट साँप केर समूह केँ मारय सँ मना कयलनि, सिवाय द्ज़ू थुफियातैन आ अल अबतर केर, कारण ई दुनू समूह आँखि केँ चकाचौंध करैत अछि आ गर्भ मे जे अछि ओकर गर्भपात करा सकैत अछि।
Imam Malik : 1547
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ صَيْفِيٍّ مَوْلَى ابْنِ أَفْلَحَ عَنْ أَبِي السَّائِبِ مَوْلَى هِشَامِ بْنِ زُهْرَةَ أَنَّهُ قَالَ دَخَلْتُ عَلَى أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّفَوَجَدْتُهُ يُصَلِّي فَجَلَسْتُ أَنْتَظِرُهُ حَتَّى قَضَى صَلَاتَهُ فَسَمِعْتُ تَحْرِيكًا تَحْتَ سَرِيرٍ فِي بَيْتِهِ فَإِذَا حَيَّةٌ فَقُمْتُ لِأَقْتُلَهَا فَأَشَارَ أَبُو سَعِيدٍ أَنْ اجْلِسْ فَلَمَّا انْصَرَفَ أَشَارَ إِلَى بَيْتٍ فِي الدَّارِ فَقَالَ أَتَرَى هَذَا الْبَيْتَ فَقُلْتُ نَعَمْ قَالَ إِنَّهُ قَدْ كَانَ فِيهِ فَتًى حَدِيثُ عَهْدٍ بِعُرْسٍ فَخَرَجَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى الْخَنْدَقِ فَبَيْنَا هُوَ بِهِ إِذْ أَتَاهُ الْفَتَى يَسْتَأْذِنُهُ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ ائْذَنْ لِي أُحْدِثُ بِأَهْلِي عَهْدًا فَأَذِنَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ خُذْ عَلَيْكَ سِلَاحَكَ فَإِنِّي أَخْشَى عَلَيْكَ بَنِي قُرَيْظَةَ فَانْطَلَقَ الْفَتَى إِلَى أَهْلِهِ فَوَجَدَ امْرَأَتَهُ قَائِمَةً بَيْنَ الْبَابَيْنِ فَأَهْوَى إِلَيْهَا بِالرُّمْحِ لِيَطْعُنَهَا وَأَدْرَكَتْهُ غَيْرَةٌ فَقَالَتْ لَا تَعْجَلْ حَتَّى تَدْخُلَ وَتَنْظُرَ مَا فِي بَيْتِكَ فَدَخَلَ فَإِذَا هُوَ بِحَيَّةٍ مُنْطَوِيَةٍ عَلَى فِرَاشِهِ فَرَكَزَ فِيهَا رُمْحَهُ ثُمَّ خَرَجَ بِهَا فَنَصَبَهُ فِي الدَّارِ فَاضْطَرَبَتْ الْحَيَّةُ فِي رَأْسِ الرُّمْحِ وَخَرَّ الْفَتَى مَيِّتًا فَمَا يُدْرَى أَيُّهُمَا كَانَ أَسْرَعَ مَوْتًا الْفَتَى أَمْ الْحَيَّةُ فَذُكِرَ ذَلِكَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ إِنَّ بِالْمَدِينَةِ جِنًّا قَدْ أَسْلَمُوا فَإِذَا رَأَيْتُمْ مِنْهُمْ شَيْئًا فَآذِنُوهُ ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ فَإِنْ بَدَا لَكُمْ بَعْدَ ذَلِكَ فَاقْتُلُوهُ فَإِنَّمَا هُوَ شَيْطَانٌ
हमरा इब्न अफलाह के पूर्व दास [शैफी] स, हिशाम बिन ज़ुहरा के पूर्व दास [अबू स`इब] स मलिक कहने छलाह, ओ कहलनि; 'हमरा अबू सैद अल खुदरीसँ भेंट भेल छल, मुदा ओहि समय ओ नमाज पढ़ि रहल छलाह ।' हम तखन हुनकर प्रतीक्षा मे बैसल रही जाबत ओ समाप्त नहि भ गेलाह, तखन हुनकर घर मे गद्दा के नीचा किछु हिलैत आवाज सुनाई पड़ल। साँप निकलल, तेँ हम एकरा मारबाक लेल उठि गेलहुँ । अबू सैद हमरा बैसल रहबाक इशारा केलनि। समाप्त भेला पर हमरा एकटा घर देखा क' पुछलखिन; 'अहाँ ई कोठली देखैत छी ?' हम उत्तर देलियनि, 'हँ'। [अबू सईद] तखन कहलनि, एक बेर एकटा युवक छल जे एखनहि विवाह केने छल, तखन ओ युवक अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग खंडक दिस चलि गेल। जखन ओ एखनो हुनका संग छलाह तखन ओ युवक रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लग अनुमति मांगैत आबि गेलाह | ओ कहैत छथि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हमरा अपन पत्नी स भेंट करबाक अनुमति दिअ, कियाक त हमर विवाह एखनहि भेल अछि'। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) हुनका अनुमति देलखिन। तखन ओ युवक केँ कहलकै, "अपन हथियार ल' लिअ; हमरा डर अछि जे बनू कुरैझा अहाँ केँ रोकि देत।" युवक पत्नी लग घुरि गेल। दरबज्जा पर ओकरा भेटलैक, आ ओकरा एतेक ईर्ष्या भेलैक जे ओकरा पर ओकर भाला लगभग फेकि देलक। मुदा ओ बजलीह, "जा धरि भीतर नहि जाउ आ देखब जे अहाँक घर मे की भ' रहल अछि ता धरि हड़बड़ी नहि करू." ओ भीतर गेलाह तऽ हुनका पलंग पर एकटा साँप कुंडलित भेटलनि । भालासँ साँपकेँ छुरा मारि घरमे लटका कऽ ओकरा संग बाहर निकलि गेल। साँप भालाक नोक हिला देलक आ युवक मरि क’ खसि पड़ल। ई पता नै छै कि कोन पहिने मरि गेलै, युवक आकि साँप। ई बात नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक पहुँचा देल गेल, आ ओ कहलनि, "सत्ते मदीना मे जिन्न के एकटा समूह अछि जे इस्लाम के अपना लेलक अछि. जँ अहाँ हुनका सभ केँ किछु करैत देखैत छी त' तीन दिनक अनुमति दियौक।" जँ -तीन दिनक बाद- एखनो देखाइत अछि तखन ओकरा मारि दियौक कारण ई शैतान अछि' ।
Imam Malik : 1548
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَرْمَلَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الرَّاكِبُ شَيْطَانٌ وَالرَّاكِبَانِ شَيْطَانَانِ وَالثَّلَاثَةُ رَكْبٌ
मलिक हमरा [अब्दुररहमान बिन हरमलाह] स [अमर बिन शुअइब] स [अपन पिता] स [अपन दादा] स बतेलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहने छलाह: 'जे व्यक्ति असगर सवारी करैत अछि ओ शैतान अछि।' दू टा सवार दू टा शैतान आ तीन टा सवार एकटा कारवां।'
Imam Malik : 1549
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَرْمَلَةَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الشَّيْطَانُ يَهُمُّ بِالْوَاحِدِ وَالْاثْنَيْنِ فَإِذَا كَانُوا ثَلَاثَةً لَمْ يَهُمَّ بِهِمْ
हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [अब्दुररहमान बिन हरमलाह] स॑ मलिक [सैद बिन मुसैयब] स॑ कहलकै कि रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि शैतान क॑ वू लोगऽ क॑ पसंद छै जे असगरे या दू आदमी छै । जँ तीन गोटे छथि तँ हुनका नीक नहि लगैत छन्हि' ।
Imam Malik : 1550
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَحِلُّ لِامْرَأَةٍ تُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ تُسَافِرُ مَسِيرَةَ يَوْمٍ وَلَيْلَةٍ إِلَّا مَعَ ذِي مَحْرَمٍ مِنْهَا
मलिक हमरा [सैद बिन अबू सईद अल मकबुरी] स॑ [अबू हुरैरा] स॑ कहलकै कि रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि ‘अल्लाह आरू आखिरी दिन प॑ विश्वास करै वाला महिला लेली ई हलाल नै छै कि वू अपनऽ महरम के साथ छोड़ी क॑ एक दिन आरू एक रात के यात्रा करै’ ।
Imam Malik : 1551
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي عُبَيْدٍ مَوْلَى سُلَيْمَانَ بْنِ عَبْدِ الْمَلِكِ عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ يَرْفَعُهُإِنَّ اللَّهَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى رَفِيقٌ يُحِبُّ الرِّفْقَ وَيَرْضَى بِهِ وَيُعِينُ عَلَيْهِ مَا لَا يُعِينُ عَلَى الْعُنْفِ فَإِذَا رَكِبْتُمْ هَذِهِ الدَّوَابَّ الْعُجْمَ فَأَنْزِلُوهَا مَنَازِلَهَا فَإِنْ كَانَتْ الْأَرْضُ جَدْبَةً فَانْجُوا عَلَيْهَا بِنِقْيِهَا وَعَلَيْكُمْ بِسَيْرِ اللَّيْلِ فَإِنَّ الْأَرْضَ تُطْوَى بِاللَّيْلِ مَا لَا تُطْوَى بِالنَّهَارِ وَإِيَّاكُمْ وَالتَّعْرِيسَ عَلَى الطَّرِيقِ فَإِنَّهَا طُرُقُ الدَّوَابِّ وَمَأْوَى الْحَيَّاتِ
मलिक हमरा सुलेमान बिन अब्दुल मलिक के पूर्व गुलाम [अबू उबैद] स कहलनि, [खालिद बिन मदन] स हुनका अपन बरकत देलखिन, अल्लाह के रसूलुल्लाह कहलनि: 'सत्ते, अल्लाह तबराका व ताआला, परम कोमल आ कोमलता स प्रेम करैत छथि, एहि स प्रसन्न छथि आ नम्र के मदद करैत छथि, एहन नहि जेना ओ अभद्रता के मदद नहि करैत छथि। जँ अहाँ एहि जानवरक पहाड़ पर सवार छी तँ ओकरा ओकर जगह पर रोकि दियौक। यदि जमीन सूखल छै तखन गति बढ़ाऊं जाबे तक गाड़ी एखनहु मजबूत छै. राति मे चलबाक चाही, कारण जमीन छोट भ' जाइत छैक - दूरी - राति मे, दिनक स्थिति सँ भिन्न। बीच बाट मे आराम नहि करू, कारण ओएह पशुक बाट आ साँपक निवास स्थान थिक'।
Imam Malik : 1552
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ سُمَيٍّ مَوْلَى أَبِي بَكْرٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ السَّفَرُ قِطْعَةٌ مِنْ الْعَذَابِ يَمْنَعُ أَحَدَكُمْ نَوْمَهُ وَطَعَامَهُ وَشَرَابَهُ فَإِذَا قَضَى أَحَدُكُمْ نَهْمَتَهُ مِنْ وَجْهِهِ فَلْيُعَجِّلْ إِلَى أَهْلِهِ
मलिक हमरा अबू बकर के पूर्व दास [सुमाय्या] स, [अबू सालिह] स [अबू हुरैरा] स कहलखिन जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन: 'यात्रा यातना के एक रूप छै, व्यक्ति के नींद, भोजन, आ पेय पदार्थ स वंचित रहैत छै। तेँ जखन अहाँ सभ मे सँ कियो अपन आवश्यकता पूरा क' लेत तखन ओ अपन परिवार मे घुरि जाय।'
Imam Malik : 1553
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَمِّهِ أَبِي سُهَيْلِ بْنِ مَالِكٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ سَمِعَ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ وَهُوَ يَخْطُبُ وَهُوَ يَقُولُلَا تُكَلِّفُوا الْأَمَةَ غَيْرَ ذَاتِ الصَّنْعَةِ الْكَسْبَ فَإِنَّكُمْ مَتَى كَلَّفْتُمُوهَا ذَلِكَ كَسَبَتْ بِفَرْجِهَا وَلَا تُكَلِّفُوا الصَّغِيرَ الْكَسْبَ فَإِنَّهُ إِذَا لَمْ يَجِدْ سَرَقَ وَعِفُّوا إِذْ أَعَفَّكُمْ اللَّهُ وَعَلَيْكُمْ مِنْ الْمَطَاعِمِ بِمَا طَابَ مِنْهَا
मालिक हमरा अपन मामा [अबू सुहैल बिन मलिक] सँ [अपन पिता] सँ बतौलनि जे ओ [उस्मान बिन अफ्फान] केँ प्रवचन दैत सुनलनि जे कहैत छथि: 'जे दासी पर काज करबाक कोनो लूरि नहि छैक, ओकरा पर बोझ नहि दियौक, जँ अहाँ ओकरा पर बोझ लगाउ त' ओ अपन जननांग सँ काज करत।' बच्चा पर काजक बोझ नहि दियौक, कारण जँ ओकरा नहि भेटतैक तऽ ओ चोरा लेत। अपन इज्जत के रक्षा करू, निश्चित रूप स अल्लाह अहाँक इज्जत के रक्षा करताह, आ नीक भोजन के संग खायत।'
Imam Malik : 1554
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْعَبْدُ إِذَا نَصَحَ لِسَيِّدِهِ وَأَحْسَنَ عِبَادَةَ اللَّهِ فَلَهُ أَجْرُهُ مَرَّتَيْنِ
[नाफी’] स॑ मलिक न॑ हमरा [अब्दुल्लाह बिन उमर] स॑ बतैलकै कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि अगर कोय दास अपनऽ मालिक केरऽ आज्ञा मान॑ छै आरू अल्लाह केरऽ इबादत करै म॑ अच्छा छै त॑ ओकरा दू बार इनाम मिलतै’ ।
Imam Malik : 1555
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ قَالَكُنَّا إِذَا بَايَعْنَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى السَّمْعِ وَالطَّاعَةِ يَقُولُ لَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِيمَا اسْتَطَعْتُمْ
मलिक हमरा [अब्दुल्लाह बिन दिनार] सँ कहलनि जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] कहलनि; 'जदि हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के प्रति वफादारी के प्रण करब जे सुनब आ मानब त ओ हमरा सब स कहताह: 'जेतना अहाँ सब क सकैत छी'।
Imam Malik : 1556
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ عَنْ أُمَيْمَةَ بِنْتِ رُقَيْقَةَ أَنَّهَا قَالَتْأَتَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي نِسْوَةٍ بَايَعْنَهُ عَلَى الْإِسْلَامِ فَقُلْنَ يَا رَسُولَ اللَّهِ نُبَايِعُكَ عَلَى أَنْ لَا نُشْرِكَ بِاللَّهِ شَيْئًا وَلَا نَسْرِقَ وَلَا نَزْنِيَ وَلَا نَقْتُلَ أَوْلَادَنَا وَلَا نَأْتِيَ بِبُهْتَانٍ نَفْتَرِيهِ بَيْنَ أَيْدِينَا وَأَرْجُلِنَا وَلَا نَعْصِيَكَ فِي مَعْرُوفٍ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِيمَا اسْتَطَعْتُنَّ وَأَطَقْتُنَّ قَالَتْ فَقُلْنَ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَرْحَمُ بِنَا مِنْ أَنْفُسِنَا هَلُمَّ نُبَايِعْكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي لَا أُصَافِحُ النِّسَاءَ إِنَّمَا قَوْلِي لِمِائَةِ امْرَأَةٍ كَقَوْلِي لِامْرَأَةٍ وَاحِدَةٍ أَوْ مِثْلِ قَوْلِي لِامْرَأَةٍ وَاحِدَةٍ
हमरा कहल गेल अछि जे [मुहम्मद बिन अल मुनकदीर] सँ मलिक [उमैमा बिंत रुकाइकाह] सँ कहलनि; 'हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स भेंट केलहुं जखन महिला सब इस्लाम के प्रति वफादारी के प्रण केलनि।' हम कहैत छी; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हम अहाँ स प्रण करैत छी जे अल्लाह के संग कोनो बात नै करब, चोरी नै करब, व्यभिचार नै करब, अपन बच्चा के हत्या नै करब, हाथ-पैर के बीच जे बुराई केने छी से नै करब, आ नीक काज में अहाँक आज्ञा नै मानब'। तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आगू कहलनि जे, ‘अहाँ जतेक सक्षम आ मजबूत छी’। उमैमा कहलखिन, हम हुनका जवाब देलियनि जे अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह हमरा सब लेल अपना स बेसी प्रिय छथि। हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, एतय आऊ, हम अहाँक प्रति वफादारी करब'। तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन्ह जे सचमुच हम महिला स हाथ नहि मिलाब। सौ स्त्रीगणक प्रति हमर बात जेना एक स्त्री केँ हमर बात अछि, वा एक स्त्री केँ हमर बात'।
Imam Malik : 1557
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَتَبَ إِلَى عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ مَرْوَانَ يُبَايِعُهُ فَكَتَبَ إِلَيْهِ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ أَمَّا بَعْدُ لِعَبْدِ اللَّهِ عَبْدِ الْمَلِكِ أَمِيرِ الْمُؤْمِنِينَ سَلَامٌ عَلَيْكَ فَإِنِّي أَحْمَدُ إِلَيْكَ اللَّهَ الَّذِي لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ وَأُقِرُّ لَكَ بِالسَّمْعِ وَالطَّاعَةِ عَلَى سُنَّةِ اللَّهِ وَسُنَّةِ رَسُولِهِ فِيمَا اسْتَطَعْتُ
मलिक हमरा [अब्दुल्लाह बिन दिनार] सं कहलनि जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] अब्दुल मलिक बिन मरवान कें हुनका सं वफादारी करबाक लेल चिट्ठी लिखने छलाह, ओ लिखलनि; 'बिस्मिल्लाहि अररहमान अरराहिम; amma ba'du, अब्दुल्लाह, अब्दुल मलिक अमीरुल मु'मिनिन के, समृद्धि अहाँ पर हो, हम अहाँ के लेल अल्लाह के स्तुति करैत छी, जिनका सिवाय कोनो देवता के इबादत के लायक नै अछि, आ हम घोषणा करैत छी जे हम अहाँ के अल्लाह के सुन्नत आ हुनकर रसूलुल्लाह के सुन्नत स ऊपर सुनब आ मानब'।
Imam Malik : 1558
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ قَالَ لِأَخِيهِ كَافِرٌ فَقَدْ بَاءَ بِهَا أَحَدُهُمَا
मलिक हमरा [अब्दुल्लाह बिन दिनार] स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स कहलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलथि: जे कियो अपन भाई स कहत; ‘अहाँ अविश्वास करू,’ तखन अहाँक अविश्वास दुनू मे सँ एकटा पर घुरि जायत।
Imam Malik : 1559
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا سَمِعْتَ الرَّجُلَ يَقُولُ هَلَكَ النَّاسُ فَهُوَ أَهْلَكُهُمْ
मलिक हमरा [सुहैल बिन अबू सालिह] स [अपन पिता] स [अबू हुरैरा] स कहलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे अगर अहां कोनो आदमी कए कहैत सुनब; 'ओ लोकक नाश हो' तखन अधिकांशक नाश करयवला ओएह छथि' ।
Imam Malik : 1560
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَقُلْ أَحَدُكُمْ يَا خَيْبَةَ الدَّهْرِ فَإِنَّ اللَّهَ هُوَ الدَّهْرُ
मलिक हमरा [अबू अज़ जिनाद] स [अल अ'राज] स [अबू हुरैरा] स कहलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलथि: ‘अहाँ मे स कियो नहि कहय; 'काल कतेक दुर्भाग्यपूर्ण अछि, 'कारण अल्लाह अवधि छथि'।