Imam Malik : 1521
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنْ عَطَسَ فَشَمِّتْهُ ثُمَّ إِنْ عَطَسَ فَشَمِّتْهُ ثُمَّ إِنْ عَطَسَ فَشَمِّتْهُ ثُمَّ إِنْ عَطَسَ فَقُلْ إِنَّكَ مَضْنُوكٌقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي بَكْرٍ لَا أَدْرِي أَبَعْدَ الثَّالِثَةِ أَوْ الرَّابِعَةِ
मलिक हमरा [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर] स [अपन पिता] स कहलथि जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे अगर कियो छींकत त तसीमित करू। जँ फेर छींकब तँ तत्मितलह करू, तखन फेर छींकब तँ उसिमिटलाह करू। यदि अहां एखनो छींक रहल छी तखन कहब; "अहाँकेँ सर्दी भ' गेल अछि।" अब्दुल्ला बिन अबू बकर कहलनि; 'पता नहि तेसर वा चारिमक बाद -कहब-'।
Imam Malik : 1522
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَكَانَ إِذَا عَطَسَ فَقِيلَ لَهُ يَرْحَمُكَ اللَّهُ قَالَ يَرْحَمُنَا اللَّهُ وَإِيَّاكُمْ وَيَغْفِرُ لَنَا وَلَكُمْ
हमरा कहल गेल अछि जे [नाफी’] सँ मलिक कहलनि, 'जखन [अब्दुल्लाह बिन उमर] छींकलनि, तखन कियो हुनका लेल दुआ केलक; 'यारहमुकल्लाह -अल्लाह अहाँ पर रहम करथि-' तेँ ओ उत्तर देलनि; 'यारहमुना अल्लाहु वा इय्याकुम वा यगफीरु लाना वा लकुम -अल्लाह हमरा आ अहाँ पर रहम करथि आ हमर आ अहाँक पाप माफ करथि-'।
Imam Malik : 1523
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ أَنَّ رَافِعَ بْنَ إِسْحَقَ مَوْلَى الشِّفَاءِ أَخْبَرَهُ قَالَدَخَلْتُ أَنَا وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي طَلْحَةَ عَلَى أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ نَعُودُهُ فَقَالَ لَنَا أَبُو سَعِيدٍ أَخْبَرَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ الْمَلَائِكَةَ لَا تَدْخُلُ بَيْتًا فِيهِ تَمَاثِيلُ أَوْ تَصَاوِيرُشَكَّ إِسْحَقُ لَا يَدْرِي أَيَّتَهُمَا قَالَ أَبُو سَعِيدٍ
मलिक हमरा [इशक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू थल्हाह] स कहलनि जे [रफी’ बिन इशाक], जे ऐश सिफा’ के पूर्व गुलाम छलाह, हुनका रिपोर्ट केलनि, ओ कहलनि, ‘हम अब्दुल्लाह बिन अबू तलहह के संग अबू सैद अल खुदरी के घर मे हुनका सं भेंट करय लेल गेलहुं’. तेँ [अबू सईद] हमरा सभकेँ कहलनि; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा सूचित केलनि जे एहन घर मे फरिश्ता नहि प्रवेश करताह जाहि मे मूर्ति वा चित्र हो'। इशाक अनिश्चित छल जे दुनू मे सँ कोन अबू सईद कहल गेल अछि'।
Imam Malik : 1524
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي النَّضْرِ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ أَنَّهُ دَخَلَ عَلَى أَبِي طَلْحَةَ الْأَنْصَارِيِّيَعُودُهُ قَالَ فَوَجَدَ عِنْدَهُ سَهْلَ بْنَ حُنَيْفٍ فَدَعَا أَبُو طَلْحَةَ إِنْسَانًا فَنَزَعَ نَمَطًا مِنْ تَحْتِهِ فَقَالَ لَهُ سَهْلُ بْنُ حُنَيْفٍ لِمَ تَنْزِعُهُ قَالَ لِأَنَّ فِيهِ تَصَاوِيرَ وَقَدْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِيهَا مَا قَدْ عَلِمْتَ فَقَالَ سَهْلٌ أَلَمْ يَقُلْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَّا مَا كَانَ رَقْمًا فِي ثَوْبٍ قَالَ بَلَى وَلَكِنَّهُ أَطْيَبُ لِنَفْسِي
मलिक हमरा [अबू नदलर] स [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] स कहलथि जे ओ [अबू तल्हाह अल अंसारी] स भेंट करय चाहैत छथि जे हुनका स भेंट करथि। अबू अन नडलर कहलनि; 'तखन हुनका [सहल बिन हुनाइफ] पहिने सँ बगल मे भेटलनि।' तखन अबू तलहा ककरो बजौलनि जे हुनका नीचाँक चटाई निकालि देल जाय। सहल बिन हुनाइफ पुछलकै; 'अहाँ किएक खींचलहुँ ?' ओ उत्तर देलनि; 'किएक त' एहि मे एकटा चित्र अछि, भले नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जेना अहाँ सभ केँ बुझल अछि, कहने छथि'। तखन सहल कहलनि: 'की रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कपड़ा पर लिखल बात छोड़ि नहि कहलनि'। ओ कहलनि: 'सत्य अछि, मुदा ई हमर आत्मा केँ बेसी शान्त करयवला अछि'।
Imam Malik : 1525
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّهَا اشْتَرَتْ نُمْرُقَةً فِيهَا تَصَاوِيرُ فَلَمَّا رَآهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَامَ عَلَى الْبَابِ فَلَمْ يَدْخُلْ فَعَرَفَتْ فِي وَجْهِهِ الْكَرَاهِيَةَ وَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَتُوبُ إِلَى اللَّهِ وَإِلَى رَسُولِهِ فَمَاذَا أَذْنَبْتُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَمَا بَالُ هَذِهِ النُّمْرُقَةِ قَالَتْ اشْتَرَيْتُهَا لَكَ تَقْعُدُ عَلَيْهَا وَتَوَسَّدُهَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ أَصْحَابَ هَذِهِ الصُّوَرِ يُعَذَّبُونَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يُقَالُ لَهُمْ أَحْيُوا مَا خَلَقْتُمْ ثُمَّ قَالَ إِنَّ الْبَيْتَ الَّذِي فِيهِ الصُّوَرُ لَا تَدْخُلُهُ الْمَلَائِكَةُ
मलिक हमरा [अल कासिम बिन मुहम्मद] स [अल कासिम बिन मुहम्मद] स [ऐसिया] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पत्नी स कहलथि जे ओ एकटा नुमरुका कीनने छथि जाहि पर एकटा तस्वीर छल। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जखन हुनका देखलनि त ओ दरबज्जा के सामने ठाढ़ भ गेलाह आ घर मे प्रवेश नहि केलनि। ऐश्या देखलक जे ओकर चेहरा पर घृणाक भाव छलैक, तेँ ओ पुछलकै; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हम अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह के प्रति पश्चाताप करैत छी, हम कोन पाप केलहुं अछि?' रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे एहि तकिया मे की गलती अछि? ओ उत्तर देलथिन; 'हम एकरा एहि लेल कीनने छी जे अहाँ एकरा संग बैसि सकब वा तकियाक रूप मे उपयोग क' सकब'। तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, सचमुच जे व्यक्ति ई चित्र खींचत ओकरा क़यामत के दिन यातना देल जायत। हुनका सभ केँ कहल गेलनि; 'जे बनौने छी ओकरा पुनर्जीवित करू,' तखन ओ कहलनि: 'सत्ते, स्वर्गदूत कोनो घर मे प्रवेश नहि करताह जाहि पर चित्र होएत'।
Imam Malik : 1526
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي صَعْصَعَةَ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ أَنَّهُ قَالَدَخَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْتَ مَيْمُونَةَ بِنْتِ الْحَارِثِ فَإِذَا ضِبَابٌ فِيهَا بَيْضٌ وَمَعَهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبَّاسٍ وَخَالِدُ بْنُ الْوَلِيدِ فَقَالَ مِنْ أَيْنَ لَكُمْ هَذَا فَقَالَتْ أَهْدَتْهُ لِي أُخْتِي هُزَيْلَةُ بِنْتُ الْحَارِثِ فَقَالَ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ وَخَالِدِ بْنِ الْوَلِيدِ كُلَا فَقَالَا أَوَلَا تَأْكُلُ أَنْتَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَقَالَ إِنِّي تَحْضُرُنِي مِنْ اللَّهِ حَاضِرَةٌ قَالَتْ مَيْمُونَةُ أَنَسْقِيكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مِنْ لَبَنٍ عِنْدَنَا فَقَالَ نَعَمْ فَلَمَّا شَرِبَ قَالَ مِنْ أَيْنَ لَكُمْ هَذَا فَقَالَتْ أَهْدَتْهُ لِي أُخْتِي هُزَيْلَةُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرَأَيْتِكِ جَارِيَتَكِ الَّتِي كُنْتِ اسْتَأْمَرْتِينِي فِي عِتْقِهَا أَعْطِيهَا أُخْتَكِ وَصِلِي بِهَا رَحِمَكِ تَرْعَى عَلَيْهَا فَإِنَّهُ خَيْرٌ لَكِ
हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [सुलेमान बिन यासर] स॑ [अब्दुररहमान बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुर्रहमान बिन अबू शा’शाअह] स॑ मलिक न॑ कहलकै कि ‘रसुलुल्लाह शल्लाहु अलैहि वसलम मैमुनाह बिंत अल हरिस के घर म॑ प्रवेश करलकै, प्रत्यक्ष रूप स॑ भीतर अपनऽ अंडा के साथ कईएक मॉनिटर छिपकली छेलै । ओहि समय ओ अब्दुल्ला बिन अब्बास आ खालिद बिन वालिद के संग छलाह | पुछलखिन: 'ई कत' सँ आयल?' मैमुना जबाब देलकै, 'हमर बहिन, हुडजैला बिंट अल हरिथ हमरा द' देलकै'। ओ अब्दुल्ला बिन अब्बास आ खालिद बिन वालिद सँ कहलनि: ‘अहाँ दुनू गोटे खाउ’। पुछै छै; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अहाँ एकरा किएक नहि खाइत छी? ' ओ उत्तर देलनि : 'सत्ते एकटा पकवान अल्लाह सँ आयल अछि' । मैमुना पुछलकै; 'अहाँ चाहब जे हम सभ अहाँकेँ दूध परोसब?' ओ उत्तर देलनि: 'हँ'। आ जखन दूध पीबय बला छलाह तखन पुछलखिन: 'ई कतय सँ अबैत अछि?' मैमुना उत्तर देलनि; 'हमर बहिन, हुडजैला हमरा उपहार देलनि'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, अहाँक की विचार अछि अपन महिला दास के बारे मे जेकरा अहाँ एक बेर हमरा छोड़य लेल कहने रही? अपन बहिन के दियौ -वापस दियौ- आ दोस्ती के जारी राखू जाहि स ओ एकर देखभाल करथि कियाक त ओ अहाँक लेल नीक अछि''।
Imam Malik : 1527
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ عَنْ خَالِدِ بْنِ الْوَلِيدِ بْنِ الْمُغِيرَةِأَنَّهُ دَخَلَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْتَ مَيْمُونَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأُتِيَ بِضَبٍّ مَحْنُوذٍ فَأَهْوَى إِلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِيَدِهِ فَقَالَ بَعْضُ النِّسْوَةِ اللَّاتِي فِي بَيْتِ مَيْمُونَةَ أَخْبِرُوا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمَا يُرِيدُ أَنْ يَأْكُلَ مِنْهُ فَقِيلَ هُوَ ضَبٌّ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَرَفَعَ يَدَهُ فَقُلْتُ أَحَرَامٌ هُوَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَقَالَ لَا وَلَكِنَّهُ لَمْ يَكُنْ بِأَرْضِ قَوْمِي فَأَجِدُنِي أَعَافُهُ قَالَ خَالِدٌ فَاجْتَرَرْتُهُ فَأَكَلْتُهُ وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَنْظُرُ
मलिक हमरा [इब्न शिहाब] स [अबू उमामा बिन सहल बिन हुनैफ] स [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] स [खालिद बिन वलीद बिन अल मुगिराह] स कहने छथि जे ओ आ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पत्नी मैमुना क घर मे प्रवेश केलथि। तखन हुनका लोकनि कें ग्रिल्ड मॉनिटर बिच्छूक मांस परोसल गेलनि, तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एकरा लेबय लेल हाथ बढ़ौलनि, मुदा ओतय जे महिला लोकनि छलीह से कहलनि; 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहि दियौन जे ओ की खाय चाहैत छथि ! ' तेँ हुनका कहल गेलनि; 'से छै मॉनिटर छिपकली के मांस, हे अल्लाह के रसूलुल्लाह'। तेँ ओ फेर हाथ उठौलनि। खालिद बिन वालिद पुछलकै; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, की हराम अछि?' ओ उत्तर देलनि: 'नहि, बस एतबे जे ई मांस हमर इलाका मे नहि भेटैत अछि, तें हमरा घृणा होइत अछि'. खालिद बजलाह; 'हम तखन ओकरा काटि क' खा लेलहुँ, जखन कि रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम देखैत रहलाह'।
Imam Malik : 1528
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَجُلًا نَادَى رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا تَرَى فِي الضَّبِّ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَسْتُ بِآكِلِهِ وَلَا بِمُحَرِّمِهِ
मलिक हमरा [अब्दुल्लाह बिन दिनार] स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स कहने छथि जे एकटा आदमी छल जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के फोन क रहल छल; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, मॉनिटर बिच्छू के मांस के बारे में की कहब?' रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलनि जे हम एकरा नहि खाइत छी आ एकरा मना नहि करैत छी।
Imam Malik : 1529
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُصَيْفَةَ أَنَّ السَّائِبَ بْنَ يَزِيدَ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ سَمِعَ سُفْيَانَ بْنَ أَبِي زُهَيْرٍ وَهُوَ رَجُلٌ مِنْ أَزْدِ شَنُوءَةَ مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ يُحَدِّثُ نَاسًا مَعَهُ عِنْدَ بَابِ الْمَسْجِدِ فَقَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ اقْتَنَى كَلْبًا لَا يُغْنِي عَنْهُ زَرْعًا وَلَا ضَرْعًا نَقَصَ مِنْ عَمَلِهِ كُلَّ يَوْمٍ قِيرَاطٌ قَالَ أَنْتَ سَمِعْتَ هَذَا مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ إِي وَرَبِّ هَذَا الْمَسْجِدِ
मलिक हमरा [यजीद बिन हुशैफा] स कहलक जे [जैना सा`इब बिन यजीद] कहलक जे ओ ओकरा कहलक जे ओ [सुफयान बिन अबू जुहैर] के सुनने छल - ओ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पुरुष साथी छल, अजदी सियानुआ स आयल छल, ओ मस्जिद के दरवाजा पर लोक के हदीस कहैत छल - ओ कहलक 'हम रसुलुल्लाह के सुनने छी।' सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहैत छथि : 'जे कियो जँ अहाँ एहन कुकुर राखब जकर उपयोग फसल वा माल-जालक रखबारी मे नहि हो त' अहाँक कर्म मे सभ दिन एक किरात कम भ' जायत। जेना सा`इब बिन यजीद पूछने छलाह; 'की अहाँ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ ई बात सुनलहुँ?' ओ उत्तर देलथिन; 'हँ, एहि मस्जिदक रब्ब द्वारा'।
Imam Malik : 1530
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ اقْتَنَى كَلْبًا إِلَّا كَلْبًا ضَارِيًا أَوْ كَلْبَ مَاشِيَةٍ نَقَصَ مِنْ عَمَلِهِ كُلَّ يَوْمٍ قِيرَاطَانِ
[नाफी’] स॑ मलिक न॑ हमरा [अब्दुल्लाह बिन उमर] स॑ बतैलकै कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि जे भी प्रशिक्षित कुत्ता के अलावा कुत्ता या पशुधन के रखवाली लेली कुत्ता रखै छै, ओकरऽ प्रथा हर दिन दू किरात कम होय जैतै’ ।
Imam Malik : 1531
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَرَ بِقَتْلِ الْكِلَابِ
[नाफी’] स मलिक हमरा [अब्दुल्लाह बिन उमर] स कहलथि जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कुकुर कए मारबाक आदेश देलथि।
Imam Malik : 1532
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ رَأْسُ الْكُفْرِ نَحْوَ الْمَشْرِقِ وَالْفَخْرُ وَالْخُيَلَاءُ فِي أَهْلِ الْخَيْلِ وَالْإِبِلِ وَالْفَدَّادِينَ أَهْلِ الْوَبَرِ وَالسَّكِينَةُ فِي أَهْلِ الْغَنَمِ
मालिक हमरा [अबू अज़ जिनाद] स [अल अ'राज] स [अबू हुरैरा] स कहलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे कुफर क जड़ पूर्व स अछि, जखन कि अहंकार आ अहंकार घोड़ा आ ऊंट क मालिक मे भेटैत अछि। रहल बात अल फदाद के त ई बेदुइन लोक में आ शांति बकरी मालिक में भेटैत अछि.
Imam Malik : 1533
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي صَعْصَعَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ أَنَّهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُوشِكُ أَنْ يَكُونَ خَيْرَ مَالِ الْمُسْلِمِ غَنَمٌ يَتْبَعُ بِهَا شَعَفَ الْجِبَالِ وَمَوَاقِعَ الْقَطْرِ يَفِرُّ بِدِينِهِ مِنْ الْفِتَنِ
हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि [अब्दुररहमान बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुर्रहमान बिन अबू शा'शाअह] स॑ [अपनऽ पिता] स॑ [अबू सईद अल खुदरी] स॑ मलिक न॑ कहलकै, ‘रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै: ‘एक मुसलमान लेली लगभग सबसे अच्छा संपत्ति बकरी छै; बकरीक संग ओ पहाड़क चोटी आ बरखा भेल स्थान सभ केँ पार करैत अपन धर्म केँ विभिन्न निंदा सँ बचा लेलक' |
Imam Malik : 1534
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَحْتَلِبَنَّ أَحَدٌ مَاشِيَةَ أَحَدٍ بِغَيْرِ إِذْنِهِ أَيُحِبُّ أَحَدُكُمْ أَنْ تُؤْتَى مَشْرُبَتُهُ فَتُكْسَرَ خِزَانَتُهُ فَيُنْتَقَلَ طَعَامُهُ وَإِنَّمَا تَخْزُنُ لَهُمْ ضُرُوعُ مَوَاشِيهِمْ أَطْعِمَاتِهِمْ فَلَا يَحْتَلِبَنَّ أَحَدٌ مَاشِيَةَ أَحَدٍ إِلَّا بِإِذْنِهِ
[नाफी’] स मालिक हमरा [इब्न उमर] स कहलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलथि जे मालिक क अनुमति क बिना कियो दोसर क माल-जाल कए दूध नहि देब। जँ कोठली मे घुमि जाय, तखन भंडारणक अलमारी नष्ट भ' गेल आ भोजन स्थानांतरित भ' जाय त' नीक लागत? माल-जालक दूधक झोरा मात्र ओकर भोजनक संग्रहणक स्थान होइत छैक, तेँ ककरो बिना अनुमतिक दोसरक माल-जाल केँ दूध नहि देबाक चाही।'
Imam Malik : 1535
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ ابْنَ عُمَرَكَانَ يُقَرَّبُ إِلَيْهِ عَشَاؤُهُ فَيَسْمَعُ قِرَاءَةَ الْإِمَامِ وَهُوَ فِي بَيْتِهِ فَلَا يَعْجَلُ عَنْ طَعَامِهِ حَتَّى يَقْضِيَ حَاجَتَهُ مِنْهُ
मलिक हमरा [नाफी’] स बतेलथि जे जखन [इब्न उमर क] रात्रिभोज तैयार भेल त इमाम कए नमाज पढ़ैत सुनलथि जखन ओ एखनो अपन घर मे छलाह। तेँ जा धरि भोजन समाप्त नहि क' लेलक ता धरि ओ अपन भोजन मे जल्दबाजी नहि केलनि।
Imam Malik : 1536
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ عَنْ مَيْمُونَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سُئِلَ عَنْ الْفَأْرَةِ تَقَعُ فِي السَّمْنِ فَقَالَ انْزِعُوهَا وَمَا حَوْلَهَا فَاطْرَحُوهُ
हमरा कहल गेल अछि जे [इब्न शिहाब] स मलिक स [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] स [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] स [मैमुनाह] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पत्नी स, रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स एक बेर एकटा रात क बारे मे पूछल गेल छल जे घी मे खसि पड़ल। अस्तु, ओ उत्तर देलनि: ' -चूहा- ल' लिअ, आ जे किछु ओकर चारूकात अछि ओकरा फेकि दियौक'।
Imam Malik : 1537
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ أَبِي حَازِمِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ السَّاعِدِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنْ كَانَ فَفِي الْفَرَسِ وَالْمَرْأَةِ وَالْمَسْكَنِ يَعْنِي الشُّؤْمَ
मलिक हमरा [सहल बिन सअद अस सईदी] स [अबू हाजिम बिन दिनार] स बतेलथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलथि जे अगर कोनो अछि त ओ घोड़ा, महिला आ आवास मे अछि। जेकर मतलब अछि नकारात्मक मान्यता - निराशावाद - .
Imam Malik : 1538
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ حَمْزَةَ وَسَالِمٍ ابْنَيْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الشُّؤْمُ فِي الدَّارِ وَالْمَرْأَةِ وَالْفَرَسِ
मलिक हमरा [इब्न शिहाब] स॑ [हमजाह] आरू अब्दुल्लाह बिन उमर केरऽ बेटा [सलीम] स॑, [अब्दुल्लाह बिन उमर] स॑ बतैलकै कि अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै: ‘ई विश्वास कि कोनो चीज स॑ दुर्भाग्य पैदा होय सकै छै, आवास, महिला, आरू घोड़ा म॑ छै’ ।
Imam Malik : 1539
و حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ قَالَجَاءَتْ امْرَأَةٌ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ دَارٌ سَكَنَّاهَا وَالْعَدَدُ كَثِيرٌ وَالْمَالُ وَافِرٌ فَقَلَّ الْعَدَدُ وَذَهَبَ الْمَالُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَعُوهَا ذَمِيمَةً
हमरा [याह्या बिन सईद] स मालिक कहलक छल; एकटा महिला रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लग आबि कहलक; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हम सब घर में रहैत छी, ओहि में रहय वाला के संख्या बेसी अछि, आ धन के भरमार अछि।' तखन निवासीक संख्या कम भेल आ धन समाप्त भ गेल। अल्लाह के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कहलनि जे घर के अपमानित होबय दियौक।
Imam Malik : 1540
حَدَّثَنِي مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لِلَقْحَةٍ تُحْلَبُ مَنْ يَحْلُبُ هَذِهِ فَقَامَ رَجُلٌ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا اسْمُكَ فَقَالَ لَهُ الرَّجُلُ مُرَّةُ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اجْلِسْ ثُمَّ قَالَ مَنْ يَحْلُبُ هَذِهِ فَقَامَ رَجُلٌ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا اسْمُكَ فَقَالَ حَرْبٌ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اجْلِسْ ثُمَّ قَالَ مَنْ يَحْلُبُ هَذِهِ فَقَامَ رَجُلٌ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا اسْمُكَ فَقَالَ يَعِيشُ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ احْلُبْ
मलिक हमरा [याह्या बिन सईद] स कहलनि जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एकटा ऊँट के बारे मे कहलनि जे बच्चा के जन्म देबय वाला छल आ फेर ओकरा दूध पिबैत छल: 'ई के दूध देत?' तखन एकटा आदमी ठाढ़ भ गेल, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन: 'अहाँक नाम की अछि?' ओ आदमी उत्तर देलक। 'हम मुर्रा छी'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: बैसू! ' ओ फेर पुछलखिन : 'ई के दुहत ?' ओतय एकटा आदमी ठाढ़ छल। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन: 'अहाँक नाम की अछि?' ओ आदमी उत्तर देलक, 'हम हरब छी'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: बैसू! ' ओ फेर पुछलखिन : 'ई के दुहत ?' तखन एकटा आदमी ठाढ़ भ’ गेल। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन: 'अहाँक नाम की अछि?' ओ आदमी उत्तर देलक। 'हाँ'इसी'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन हुनका कहलखिन: 'एकरा दूध दियौक! ' .